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seraikela kharsawan news: राजनगर में जल संरक्षण: गैबियन, तालाब और ट्रेंच से बदल रही तस्वीर

Updated at : 25 Mar 2025 1:01 AM (IST)
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seraikela kharsawan news: राजनगर में जल संरक्षण: गैबियन, तालाब और ट्रेंच से बदल रही तस्वीर

खेतों की उत्पादकता संग किसानों की आमदनी भी बढ़ी, जल संचयन ने किसानों को बनाया आत्मनिर्भर

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खरसावां.

सरायकेला-खरसावां जिला में अत्यधिक दोहन, कम वर्षा और जल संरक्षण की कमी के कारण भू-गर्भीय जलस्तर लगातार गिर रहा है. खासकर ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में हैंडपंप, कुएं और ट्यूबवेल सूखने लगते हैं, जिससे पीने और सिंचाई के पानी की भारी कमी हो जाती है. जल की बर्बादी को रोककर और जलसंरक्षण तकनीकों को अपनाकर हम इस गंभीर समस्या से निपट सकते हैं. ऐसी ही पहल राजनगर के कई गांवों में की जा रही है. इसका सीधा लाभ क्षेत्र के किसानों को मिल रहा है.

जल के प्रवाह को नियंत्रित करने को खेतों में छोटे चेकडैम, कंटूर ट्रेंच, जल सोख्ता का निर्माण

राजनगर में जलछाजन कार्यक्रम के तहत जल संरक्षण की योजना पर कार्य शुरू किया. वर्षा जल के प्रवाह को नियंत्रित करने के लिए खेतों में छोटे चेकडैम, कंटूर ट्रेंच, जल सोख्ता नाला, गली प्लग, गैबियन बांध एवं मेढ़बंदी का निर्माण किया गया. इससे बहते पानी की गति कम हुई और मिट्टी का कटाव रुक गया. संचित जल का संग्रह छोटे तालाब, सोख्ता गड्ढों व फर्म पोंड्स में किया गया.

किसानों को मिला दोहरा लाभ

संरक्षित जल का उपयोग किसान अब सिंचाई, पौधशाला, सब्जी उत्पादन, मल्टी-लेयर खेती व रबी सीजन की फसलों में कर पा रहे हैं. इससे खेतों की उत्पादकता बढ़ी है. किसानों की आमदनी में वृद्धि हुई है. उपजाऊ मिट्टी का संरक्षण हुआ, जिससे भूमि की उर्वरता बनी रही. संचित जल के उपयोग से खेती का रकबा और उत्पादन बढ़ गया. कई किसानों ने अब मल्टी-क्रॉपिंग सिस्टम अपनाना शुरू कर दिया है. साथ ही बचे हुए पानी का उपयोग पशुपालन, किचन गार्डन और वर्मी कंपोस्टिंग में भी किया जा रहा है.

तीन बरसाती नालों में गैबियन बना रोका गया पानी

नाबार्ड की मदद से बारुदरहा जलछाजन कार्यक्रम के तहत खंडाडेरा, धुरीपदा व बारुबेड़ा में छोटे-छोटे नालों के पानी को रोकने के लिए गैबियन डैम (छोटे डैम) का निर्माण किया गया है. बरसाती नालों के पानी को रोकने के लिए तार की जाली के भीतर अलग-अलग पत्थर, चट्टान व मिट्टी की इंटरलॉकिंग कर गैबियन बनाया गया. इससे नालों में बहने वाले बारिश के पानी को काफी हद तक रोका गया. अब इन गांवों के नालों में बने गैबियन में गर्मी के मौसम में भी पानी का भंडारण रहता है.

जल संरक्षण के लिए धुरीपदा पंचायत में चल रहीं कई योजनाएं

राजनगर में नाबार्ड प्रायोजित जलछाजन योजना के तहत धुरीपदा, बारुबेड़ा, गोंडामारा, बांदु, महाराजगंज, खंडाडेरा, कोटारचारा में तालाबों का निर्माण कराया गया है. गांव की बेकार पड़ी ज़मीन में छोटे-छोटे तालाब बनाकर बारिश के पानी को संरक्षित किया जाता है. फिर गांव के लोग इसी तालाब के पानी का उपयोग घरेलू कार्यों के साथ-साथ खेती के लिए भी करते हैं. इन तालाबों के आस-पास कई प्रकार की फसलें उगाई जा रही हैं, जिससे गांव के लोगों को अतिरिक्त रोजगार भी मिल रहा है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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DEVENDRA KUMAR is a contributor at Prabhat Khabar.

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