सपादा गांव की जर्जर सड़क बनी मुसीबत, बरसात में एम्बुलेंस तक नहीं पहुंच पाती, कई बार शिकायत के बाद भी नहीं हुई मरम्मत

जर्जर सड़क को दिखाते ग्रामीण | Prabhat Khabar Network
चांडिल के सपादा गांव में सड़क की बदहाली से ग्रामीण परेशान हैं। बरसात में कीचड़ के कारण एम्बुलेंस नहीं पहुंच पाती, प्रशासन से मरम्मत की मांग की गई है।
चांडिल। सरायकेला -खरसावां जिला अंतर्गत चांडिल अनुमंडल क्षेत्र के कुकड़ू प्रखंड के सपादा गांव की मुख्य सड़क बदहाल स्थिति के कारण ग्रामीणों के लिए परेशानी का सबब बनी हुई है. गांव की लगभग 400 से 500 मीटर लंबी सड़क पूरी तरह जर्जर हो चुकी है. बरसात के दिनों में सड़क कीचड़ और बड़े-बड़े गड्ढों में तब्दील हो गई है, जिससे लोगों का पैदल चलना भी मुश्किल हो गया है. सड़क की खराब स्थिति का सबसे अधिक असर स्कूली बच्चों, बुजुर्गों, किसानों और मरीजों पर पड़ रहा है. ग्रामीणों ने बताया कि बारिश के दौरान सड़क पर जलजमाव और कीचड़ होने के कारण वाहनों का परिचालन लगभग ठप हो जाता है. कई बार बाइक और साइकिल सवार फिसलकर दुर्घटना का शिकार हो चुके हैं. सबसे गंभीर स्थिति तब उत्पन्न होती है, जब किसी मरीज को अस्पताल ले जाने की जरूरत पड़ती है. सड़क खराब रहने के कारण एम्बुलेंस गांव तक नहीं पहुंच पाती, जिससे मरीजों को चारपाई या अन्य साधनों से मुख्य सड़क तक लाना पड़ता है. इससे आपातकालीन स्थिति में मरीजों की जान पर भी खतरा बना रहता है. ग्रामीणों ने बताया कि इस समस्या को लेकर वे कई बार प्रखंड प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को लिखित रूप से अवगत करा चुके हैं. इसके बावजूद आज तक सड़क निर्माण या मरम्मत की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की गई. हर वर्ष बरसात में यही स्थिति उत्पन्न होती है, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका है. ग्रामीणों ने बताया कि सड़क की बदहाली के कारण गांव का विकास भी प्रभावित हो रहा है. किसानों को कृषि उपज बाजार तक पहुंचाने में परेशानी होती है, जबकि विद्यार्थियों को स्कूल आने-जाने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है. बरसात के मौसम में ग्रामीणों का दैनिक जीवन पूरी तरह प्रभावित हो जाता है. ग्रामीणों ने राज्य सरकार, जिला प्रशासन और संबंधित विभाग से मांग की है कि जनहित को देखते हुए सपादा गांव की मुख्य सड़क का अविलंब निर्माण अथवा मरम्मत कराई जाए. उनका कहना है कि सड़क बनने से हजारों ग्रामीणों को राहत मिलेगी और गांव में आवागमन के साथ-साथ स्वास्थ्य, शिक्षा एवं कृषि गतिविधियां भी सुचारु रूप से संचालित हो सकेंगी. ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन करने को बाध्य होंगे.
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