धर्म-आध्यात्म : 15 दिनों के अणवसर के बाद स्वस्थ हुए महाप्रभु, नेत्रोत्सव पर 14 जुलाई को नवयौवन रुप में देंगे दर्शन

Author Sachindra Dash|Edited by Priya Gupta
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धर्म-आध्यात्म : 15 दिनों के अणवसर के बाद स्वस्थ हुए महाप्रभु, नेत्रोत्सव पर 14 जुलाई को नवयौवन रुप में देंगे दर्शन

हरिभंजा स्थित महाप्रभु जगन्नाथ का भव्य मंदिर | Prabhat Khabar Network

सरायकेला-खरसावां के जगन्नाथ मंदिरों में 14 जुलाई को नेत्रोत्सव मनाया जाएगा। 15 दिनों के अणवसर के बाद प्रभु अपने भक्तों को नवयौवन स्वरूप में दर्शन देंगे।

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सरायकेला-खरसावां. सरायकेला-खरसावां जिले के जगन्नाथ मंदिरों में मंगलवार को आस्था और श्रद्धा का विशेष पर्व नेत्रोत्सव मनाया जाएगा. करीब 15 दिनों तक अणवसर गृह में गुप्त सेवा और उपचार के बाद प्रभु जगन्नाथ, बड़े भाई बलभद्र एवं बहन सुभद्रा आज भक्तों को नवयौवन स्वरूप में दर्शन देंगे. सरायकेला, खरसावां, हरिभंजा, चांडिल, सीनी समेत जिले के करीब एक दर्जन जगन्नाथ मंदिरों में सुबह से ही विशेष पूजा-अर्चना और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ नेत्रोत्सव की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं. बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए मंदिर समितियों ने विशेष व्यवस्था की है.

स्नान पूर्णिमा के बाद 15 दिनों तक चला उपचार धार्मिक मान्यता के अनुसार स्नान पूर्णिमा पर 108 कलशों के पवित्र जल से महास्नान के बाद भगवान अस्वस्थ हो जाते हैं. इसके बाद उन्हें अणवसर गृह में विश्राम कराया जाता है, जहां सेवायत परंपरागत विधि से उनकी गुप्त सेवा करते हैं. इस अवधि में भगवान को औषधीय जड़ी-बूटियों से तैयार विशेष दवा और फलाहार अर्पित किया जाता है. अणवसर के दौरान मंदिर के पट आम श्रद्धालुओं के लिए बंद रहते हैं. नेत्रोत्सव के साथ खुलेगा मंदिर का पट नेत्रोत्सव के अवसर पर भगवान के विग्रहों का विशेष श्रृंगार किया जाएगा. अणवसर काल में विग्रहों की रंगाई-पुताई और अलंकरण का कार्य भी पूरा किया गया है.

मान्यता है कि इस दिन प्रभु के नवयौवन स्वरूप के दर्शन करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है. पूजा के बाद भक्तों के बीच महाप्रसाद का वितरण किया जाएगा. 16 जुलाई को निकलेगी ऐतिहासिक रथयात्रा नेत्रोत्सव के अगले दिन 16 जुलाई को जिले के विभिन्न जगन्नाथ मंदिरों से भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा भव्य रथयात्रा के साथ गुंडिचा मंदिर के लिए प्रस्थान करेंगे. सरायकेला-खरसावां जिले के करीब एक दर्जन स्थानों पर पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ रथयात्रा आयोजित होगी, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं के शामिल होने की उम्मीद है. सदियों पुरानी यह परंपरा आज भी क्षेत्र की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान का प्रमुख आधार बनी हुई है.


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लेखक के बारे में

By Sachindra Dash

शचिंद्र कुमार दाश प्रभात खबर के वरीय संवाददाता हैं और हिंदी पत्रकारिता में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखते हैं। वे झारखंड और ओडिशा की राजनीति, प्रशासन, ग्रामीण विकास, सामाजिक सरोकार, कानून-व्यवस्था तथा जनहित से जुड़े मुद्दों की रिपोर्टिंग करते हैं। इसके साथ ही कला, भाषा, संस्कृति, आध्यात्म और समसामयिक विषयों पर लेखन में उनकी विशेष रुचि है। नई जानकारियां जुटाना और उन्हें प्रमाणिक तथ्यों के साथ पाठकों तक पहुंचाना उनकी कार्यशैली की प्रमुख विशेषता है। उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, शिक्षा, खेल, पर्यावरण, साहित्य, संस्कृति से जुड़े विषयों को समेटती है। शचिंद्र कुमार दाश ग्राउंड रिपोर्टिंग पर विशेष जोर देते हैं। वे घटनास्थल पर पहुंचकर तथ्यों के आधार पर समाचार प्रस्तुत करने तथा आम लोगों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाने का प्रयास करते हैं।

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