Kharsawan: अधूरे पड़े 500 बेड अस्पताल का मामला विस में उठा, दशरथ गागराई ने पूछा सवाल

Updated at : 18 Mar 2026 8:03 PM (IST)
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Hospital Building

अधूरा पड़ा अस्पताल का भवन

Kharsawan: खरसावां के आमदा में अधूरे पड़े 500 बेड के अस्पताल भवन का मामला विधानसभा में उठा. विधायक दशरथ गागराई ने स्वास्थ्य मंत्री डॉ इरफान अंसारी से इसे जल्द पूरा कराकर शुरू कराने की मांग की है.

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शचिंद्र कुमार दाश
Kharsawan: खरसावां विधायक दशरथ गागराई ने बुधवार को विधान सभा के बजट सत्र के अंतिम दिन गैर सरकारी संकल्प के तहत खरसावां के आमदा में अधूरे पड़े 500 बेड के अस्पताल निर्माण कार्य को पूर्ण कराने की मांग की. विधायक दशरथ गागराई के सवाल का जबाव देते हुए स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग मंत्री डॉ इरफान अंसारी ने कहा कि अधूरे पड़े 500 बेड के अस्पताल को रिडेवलपमेंट कर इसे मेडिकल कॉलेज में तब्दील किया जाएगा. स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि 2026-27 में मेडिकल कॉलेज का कार्य पूर्ण हो जाएगा. स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि जल्द ही वह विभागीय अधिकारियों की टीम के साथ खरसावां का दौरा कर निर्माणाधीन अस्पताल का निरीक्षण करेंगे. उन्होंने कहा कि राज्य में अगले एक साल में आठ मेडिकल कॉलेज बनेंगे.

12 साल से अधूरा पड़ा अस्पताल, जल्द शुरू कराएं : गागराई

खरसावां विधायक दशरथ गागराई विधान सभा में ने कहा कि खरसावां के आमदा में 500 बेड के अस्पताल का निर्माण कार्य पिछले 12 वर्षों से अधिक से समय से अधूरा पड़ा हुआ है. उन्होंने सरकार से अस्पताल निर्माण के बाकी बचे कार्यों का जल्द से जल्द निविदा की प्रक्रिया पूरा कर निर्माण कार्य पूर्ण कराने और अस्पताल को चालू कराने की मांग की. जिससे लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध हो सके. विधायक दशरथ गागराई ने स्वास्थ्य मंत्री से इसी माह ही खरसावां का दौरा करने की अपील की, ताकि वे वस्तुस्थिति से अवगत हो सकें.

क्या है मामला ?

खरसावां विधायक दशरथ गागराई द्वारा पेश किये गये गैर सरकारी संकल्प के जबाव देते हुए विभाग की ओर से बताया गया कि वर्ष 2011 में रांची जिला में निर्माणधीन 500 बेड के अस्पताल की तर्ज पर खरसावां में 500 बेड वाले अस्पताल भवन के निर्माण के लिए 153.96 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति दी गयी थी. कार्य की गति धीमी रहने के कारण संवेदक एनबीसीसी लिमिटेड, नई दिल्ली के साथ किये गये एकरारनामा को खत्म कर दिया गया. साथ ही झारखंड राज्य भवन निर्माण निगम लिमिटेड, रांची द्वारा फिर से इस योजना के लिए 353.04 करोड़ रुपये का प्राक्कलन उपलब्ध कराया गया, जो मूल मूल स्वीकृत राशि से काफी अधिक है.

पीपीपी मोड पर चलेगा मेडिकल कॉलेज

बाद में समीक्षा कर उस निर्माणाधीन भवन को यथा स्थिति के रूप में वीजीएफ स्कीम (VGF Scheme) के तहत पीपीपी मोड पर मेडिकल कॉलेज में अपग्रेड करने का निर्णय लिया गया है. वर्तमान में प्रथम चरण में भारत सरकार द्वारा गिरिडीह, जामताड़ा, खूंटी और धनबाद जिले के सदर अस्पतालों को वीजीएफ स्कीम (VGF Scheme) के तहत पीपीपी मोड पर मेडिकल कॉलेज में विकसित किये जाने की स्वीकृति दी जा चुकी है. दूसरी सूचि में सरायकेला-खरसावां के अस्पताल को अपग्रेड कर वीजीएफ स्कीम (VGF Scheme) के तहत पीपीपी मोड पर मेडिकल कॉलेज में विकसित किये जाने संबंधी सैद्धांतिक सहमति प्राप्त कर ली गयी है. इस मामले में भारत सरकार को प्रस्ताव भेजा जाना बाकी है.

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अमलेश नंदन सिन्हा प्रभात खबर डिजिटल में वरिष्ठ पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता में 20 से अधिक वर्षों का अनुभव है. रांची विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई करने के बाद से इन्होंने कई समाचार पत्रों के साथ काम किया. इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत रांची एक्सप्रेस से की, जो अपने समय में झारखंड के विश्वसनीय अखबारों में से एक था. एक दशक से ज्यादा समय से ये डिजिटल के लिए काम कर रहे हैं. झारखंड की खबरों के अलावा, समसामयिक विषयों के बारे में भी लिखने में रुचि रखते हैं. विज्ञान और आधुनिक चिकित्सा के बारे में देखना, पढ़ना और नई जानकारियां प्राप्त करना इन्हें पसंद है.

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