Seraikela Kharsawan News : नवाचार व उद्यमिता में आगे आयें छात्राएं : डीसी

Published by : ATUL PATHAK Updated At : 11 Mar 2026 10:57 PM

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उन्होंने वर्षा जल के वैज्ञानिक संग्रहण, भूगर्भ पुनर्भरण और जल के सतत उपयोग पर विस्तार से बताया

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सरायकेला. जिला प्रशासन की पहल पर पानी की खेती नामक नवाचारी पायलट परियोजना का आगाज कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय सरायकेला में बुधवार को किया गया. इस अवसर पर डीसी नितिश कुमार सिंह ने पारंपरिक विधि-विधान के साथ इसका औपचारिक उद्घाटन किया. परियोजना के मुख्य उद्देश्य वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देना, भू-गर्भ जल पुनर्भरण सुनिश्चित करना, जल संरक्षण को प्रोत्साहन, जिससे क्षेत्र में भूजल स्तर बढ़े व केजीबीभी की छात्राओं को स्वच्छ और पर्याप्त जल उपलब्ध कराना था. कार्यक्रम में एक्वालईन भुवनम के रथिन भद्र ने प्रस्तुति दी. उन्होंने वर्षा जल के वैज्ञानिक संग्रहण, भूगर्भ पुनर्भरण और जल के सतत उपयोग पर विस्तार से बताया. परियोजना से वर्षा जल को वैज्ञानिक तरीके से संग्रहित कर भूगर्भ में पहुंचाया जाएगा, जिससे भू-जल स्तर सुधरेगा और मिट्टी की नमी बनी रहेगी. मौके पर डीसी ने कहा कि यह पहल केवल विद्यालय परिसर तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके सकारात्मक परिणामों पर भविष्य में इस तकनीक को जिले के अन्य क्षेत्रों में भी लागू किया जा सकता है. इस प्रकार की जल संरक्षण तकनीक के माध्यम से आदिवासी समुदायों व किसानों को वर्ष भर सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने में सहायता मिलेगी, जिससे कृषि उत्पादन में वृद्धि होगी व ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी. डीसी ने नवाचार व उद्यमिता की दिशा में आगे बढ़ने के लिए छात्राओं को प्रेरित किया. कहा कि छात्राओं को केवल नौकरी करने तक सीमित न रहकर रोजगार सृजन करने का लक्ष्य रखना चाहिए.

सरायकेला में रसोई गैस की किल्लत, होटल प्रभावित

सरायकेला में अब रसोई गैस की किल्लत शुरू हो गयी है. होटल कारोबार पर भी असर पड़ रहा है. रसोई गैस की आपूर्ति नहीं होने से सरायकेला के छोटे छोटे होटल संचालक पुराने पद्धति की और रुख कर रहे हैं. वहीं रेस्टोरेंट संचालक मेन्यू में कटौती कर रहे हैं. रेस्टोरेंट संचालक जगबंधु आचार्य ने बताया कि गैस की किल्लत होने से बहुत से मेन्यू में कटौती की जा रही है जिससे गैस बचाया जा सके. कॉमर्शियल गैस नही मिल रहा है काफी दिक्कत हो रही है. वहीं होटल संचालक राजू दास ने कहा कि गैस की जगह अब कोयला व लकड़ी का चुल्हा तैयार किया जा रहा है ताकि लोगों को समय पर नाश्ता समेत अन्य खाने उपलब्ध हो. गैस की किल्लत हो गयी है.

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