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Saraikela News : गांव के बढ़े हुए विस्थापित परिवारों को पुनर्वास नीति का लाभ व नौकरी दे सरकार

Updated at : 06 Oct 2024 11:57 PM (IST)
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Saraikela News : गांव के बढ़े हुए विस्थापित परिवारों को पुनर्वास नीति का लाभ व नौकरी दे सरकार

खरसावां : सुरू जलाशय योजना के विस्थापितों ने की बैठक

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– 1982-83 में थे 59 विस्थापित परिवार, अब बढ़ कर हो गये 134

– 1983 में पहली बार 3.12 करोड़ से सुरू जलाशय योजना शुरू हुई थी

– 2014-15 में योजना के लिये 64.87 करोड़ की मंजूरी दी गयी

खरसावां.

खरसावां प्रखंड की रिडींग पंचायत के लखनडीह में सुरू जलाशय योजना के विस्थापितों ने बैठक कर राज्य सरकार से बढ़े हुए विस्थापित परिवारों के लिए पुनर्वास व नौकरी की मांग की. वर्ष 1982-83 के सर्वे में सुरू जलाशय योजना के लिए खरसावां अंचल के लखनडीह व रायजेमा के चैतनपुर व रेयाडदा टोला के 59 परिवारों को विस्थापित मान कर मुआवजा दिया गया था, जो काफी कम था. दूसरी ओर, ग्रामीणों का तर्क है कि इस योजना का 35 वर्षों तक काम नहीं हुआ. अब 2016-17 से सुरू जलाशय योजना का कार्य तेजी से चल रही है. वर्तमान में इन 59 विस्थापित परिवारों का आकार काफी बड़ा हो गया है. जनसंख्या में भी वृद्धि हुई है. वर्तमान में 59 परिवारों का आकार बढ़कर 134 हो गया है. प्रभावित विस्थापितों की मांग है कि बढ़े हुए परिवारों को विस्थापित मान कर 2012 की नयी पुनर्वास नीति के तहत मुआवजा, जमीन व नौकरी देने की मांग की है. ग्रामीणों ने कहा कि मांगों पर सकारात्मक विचार नहीं हुआ, तो संवैधानिक तरीके से आंदोलन करेंगे.

30 वर्षों में योजना की राशि 20 गुना बढ़ सकती है, तो फिर पुनर्वास नीति-2012 के तहत लाभ क्यों नहीं : विस्थापित

विस्थापितों के अनुसार, जब 1983 में पहली बार सुरू जलाशय योजना को मंजूरी दी गयी थी, उस वक्त इस योजना की प्राक्कलित राशि 3.12 करोड थी. लेकिन इसका काम आगे नहीं बढ़ सका. फिर 2004 में इस योजना के क्रियान्वयन के लिए 39.60 करोड़ की मंजूरी दी गयी. कुछ दिनों तक काम चलने के बाद योजना बंद हो गयी. इसके बाद वर्ष 2013-14 में योजना की शुरुआत की गयी, तो प्राक्कलन राशि बढ़ कर 64.87 करोड़ हो गयी. विस्थापितों का तर्क है कि अगर 30 वर्षों में योजना की राशि 20 गुना बढ़ सकती है, तो फिर सभी विस्थापितों को 2012 के पुनर्वास नीति के तहत क्यों लाभ नहीं दिया जा सकता है. विस्थापितों ने 2012 की नयी पुनर्वास नीति तहत मुआवजा, जमीन व नौकरी की मांग की.

बैठक में ये रहे मौजूद

विस्थापितों की बैठक में स्थानीय सांसद कालीचरण मुंडा को भी आमंत्रित किया गया था. लेकिन वे नहीं पहुंचे. कांग्रेस के प्रदेश सचिव छोटराय किस्कू विस्थापितों की समस्या से अवगत हुए. उन्होंने इस मुद्दे पर सांसद के साथ चर्चा करने की बात कही. बैठक में विस्थापित परिवार से सोयना सरदार, सुदन लाल मुंडा, राजेंद्र लोहार, रामचंद्र लोहार, रामचंद्र मुंडा, चैतन लोहार, रुइया मुंडा, मदन मुंडा, राहुल मुंडा, मंगल सिंह मुंडा, सुनिया मुंडा, सुशीला मुंडा, सरस्वती मुंडा, विमला लोहार, मनोज लोहार आदि उपस्थित थे.————–

विस्थापन नीति -2003 के तहत 2006-07 में 50 परिवारों को मिला था मुआवजा

वर्ष 1982-83 में सर्वे कर सुरू जलाशय योजना के लिए खरसावां अंचल के लखनडीह व रायजेमा (चैतनपुर) गांव के 59 परिवारों को विस्थापित माना गया था. जानकारी के अनुसार, इसमें से लखनडीह के 36 व रायजेमा के 14 परिवारों को विस्थापित मान कर पुर्नवास नीति-2003 के तहत वर्ष 2006-07 में भुगतान किया गया था. हालांकि, मुआवजे की राशि काफी कम थी. शेष नौ परिवारों का भुगतान लंबित है. अभी विस्थापित परिवारों के पास कुछ भी नहीं है. विस्थापित-2012 की नयी पुनर्वास नीति तहत मुआवजा, जमीन व नौकरी की मांग कर रहे हैं.

सुरू जलाशय योजना से 3400 हेक्टयर भूमि पर होगी सिंचाई

खरसावां प्रखंड मुख्यालय से करीब 10 किमी की दूरी पर पहाड़यों की तलहटी पर लखनडीह गांव बसा है. हुडांगदा व लखनडीह गांव के बीच सुरू नदी पर जलाशय योजना का निर्माण किया जा रहा है. सुरू जलाशय योजना के पूर्ण होने से 3400 हेक्टेयर जमीन पर खरीफ फसल व 1403 हेक्टेयर जमीन पर रबी फसल की खेती हो सकेगी. करीब एक दर्जन से अधिक गांवों के खेतों तक सिंचाई का पानी पहुंचेगा. ग्रामीणों ने बताया कि सोना जलाशय योजना का निर्माण कार्य तेजी से चल रही है. अगले वर्ष तक इस जलाशय योजना के पूर्ण होने की संभावना है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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