झारखंड : महिला ने पति से मांगा भरण पोषण के लिए पैसे, गांव ने किया परिवार का बहिष्कार, क्या है मामला

Edited by Kunal Kishore
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झारखंड के सरायकेला में एक अजीब मामला सामने आया है. यहां एक पूरे परिवार को गांव के सरकारी कुएं और चापानल से पानी नहीं लेने का फरमान जारी किया गया है. इसके बाद महिला ने सरायकेला थाना में लिखित शिकायत दी है.

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सरायकेला: सरायकेला प्रखंड अंर्तगत जुरगुड़िया गांव में एक परिवार का पिछले दो महीने से गांव में सामाजिक बहिष्कार किया गया है. सामाजिक बहिष्कार करने से गांव के कोई भी लोग पीड़ित परिवार के साथ कोई बातचीत नहीं करते हैं. गांव में बैठक कर गांव के सरकारी कुआं और चापानल से पानी नहीं लेने, राशन दुकान से सामान नहीं लेने का भी फरमान जारी किया गया है. इस तरह के फरमान से परेशान होकर परिवार की विधवा महिला दानगी हांसदा ने सरायकेला थाना पहुंच कर न्याय की गुहार लगायी है. महिला ने गांव के ग्राम प्रधान विक्रम हांसदा, रंजीत टुडु, सामु मुर्मू, सुभाष टुडु ,भद्र मार्डी, रामजीत मार्डी सहित अन्य के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग करते हुए थाना में लिखित शिकायत की है.

क्या है मामला

विधवा महिला दानगी हांसदा का कहना है कि 22 अप्रैल 2021 को बेटी सोनिया हांसदा की शादी दावना के सिंगराय मार्डी के साथ हुई थी. शादी के एक महीने बाद ही बेटी को ससुराल में शाररिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाने लगा. इसके बाद व्यवहार न्यायलय जमशेदपुर में बेटी ने भरण पोषण हेतु सिंगराय मुर्मू के ऊपर केस दर्ज कर दिया. महिला बताती है कि पिछले महीने एक जून को सिंगराई मुर्मू हमारे पैतृक गांव जुरगूड़िया आए और ग्राम प्रधान विक्रम हांसदा को प्रलोभन दे कर गांव में बैठक कराया. जिसमें ग्राम प्रधान विक्रम हांसदा, रामजीत मार्डी, भद्र टुडु सहित अन्य ग्रामीण सिंगराई मुर्मू के बहकावे में आ गए और मेरे परिवार का सामाजिक बहिष्कार करते हुए दस हजार रुपये का दंड भी लगा दिया. यहां तक की यह फरमान जारी कर दिया गया कि गांव का कोई भी व्यक्ति हमारे परिवार के साथ बातचीत करता तो उस पर भी दस हजार का दंड लगाया जाएगा. इसके बाद मुझसे केस वापस लेने और दस हजार दंड स्वरूप देने पर सामाजिक बहिष्कार को वापस लेने की बात कही गई.

क्या कहना है लोगों का

पोनोत परगना आदिवासी सेंगल अभियान के सुगनाथ हेंब्रम कहते हैं कि विधवा महिला के साथ षड्यंत्र कर अन्याय और अत्याचार किया जा रहा है. इस मामले की जांच कर दोषीयों पर कड़ी कार्रवाई किया जानी चाहिए. वहीं जुरगुड़िया के ग्रामीण रामजीत मार्डी ने कहा कि बहिष्कार का कुछ मामला नहीं है, ग्राम सभा की बैठक हुई थी जिसमें किसी प्रकार का बहिष्कार का मामला नहीं है और गांव के सभी लोग आपस में मिल जुल कर रहते हैं. जो भी आरोप लगाया गया है वह बेबुनियाद है. छोटादावना पंचायत के मुखिया देवीलाल सोरेन ने कहा कि उन्हें सामाजिक बहिष्कार की जानकारी नहीं है.

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क्या कहती है पुलिस

सरायकेला महिला थाना प्रभारी तिलोत्तमा कुमारी ने कहा कि जुरगुड़िया गांव की महिला द्वारा महिला थाना में आवेदन दिया गया है. इस पर प्रक्रिया के तहत पहले दोनों पक्ष को नोटीस भेजा जाएगा इसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी.

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Kunal Kishore

लेखक के बारे में

By Kunal Kishore

कुणाल ने IIMC , नई दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा की डिग्री ली है. फिलहाल, वह प्रभात खबर में झारखंड डेस्क पर कार्यरत हैं, जहां वे बतौर कॉपी राइटर अपने पत्रकारीय कौशल को धार दे रहे हैं. उनकी रुचि विदेश मामलों, अंतरराष्ट्रीय संबंध, खेल और राष्ट्रीय राजनीति में है. कुणाल को घूमने-फिरने के साथ पढ़ना-लिखना काफी पसंद है.

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