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Seraikela Kharsawan News :पहली बार महिलाओं को मिलेगा रथ खींचने का अवसर

Updated at : 25 Jun 2025 11:07 PM (IST)
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Seraikela Kharsawan News :पहली बार महिलाओं को मिलेगा रथ खींचने का अवसर

नये रथ पर सवार होंगे प्रभु जगन्नाथ, मौसीबाड़ी तक दो दिन चलेगी भव्य यात्रा

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सरायकेला. सरायकेला की ऐतिहासिक रथयात्रा की तैयारियां जोरों पर हैं. इस वर्ष जगन्नाथ सेवा समिति रथयात्रा को और भी भव्य बनाने में लगी है. इस वर्ष महिलाओं को भगवान के रथ को खींचने का सौभाग्य मिलेगा. साथ ही ओडिशा से आये ओडिशी कलाकारों द्वारा नृत्य प्रस्तुत किया जायेगा. इस वर्ष नये रथ का निर्माण भी पूरा हो चुका है. फिलहाल उसकी सजावट का कार्य चल रहा है. समिति के अध्यक्ष राजा सिंहदेव ने बताया कि 26 जून को नेत्रोत्सव होगा और 27 जून से प्रभु जगन्नाथ, अपने भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ नये रथ पर सवार होकर भक्तों को दर्शन देंगे. पुरी की तर्ज पर प्रभु दो दिनों में मौसीबाड़ी पहुंचेंगे.

रथ के आगे ओडिशी नृत्य से होगा प्रभु का स्वागत

समिति अध्यक्ष राजा सिंहदेव ने बताया कि इस वर्ष रथयात्रा के दौरान ओडिशा से 10 कलाकारों को आमंत्रित किया गया है, जिनमें आठ महिला और दो पुरुष कलाकार शामिल हैं. ये कलाकार रथ के आगे-आगे ओडिशी नृत्य प्रस्तुत करेंगे. इसके साथ ही सरायकेला की स्थानीय कीर्तन मंडलियां भी रथ के आगे-आगे कीर्तन करती चलेंगी. उन्होंने बताया कि रथयात्रा में प्रभु को मौसीबाड़ी पहुंचने में दो दिन लगते हैं और इस दौरान दोनों दिनों में ओडिशी नृत्य व कीर्तन किया जायेगा.

भुवनेश्वर से मंगायी गयी रस्सी

राजा सिंहदेव ने बताया कि रथयात्रा में रथ को खींचने की परंपरा है. इस बार नये रथ को श्रद्धालु खींचकर मौसीबाड़ी तक ले जायेंगे. इसके लिए ओडिशा के भुवनेश्वर से रस्सी मंगवायी गयी है, जिसके सहारे आठ पहियों वाले इस भव्य रथ को खींचा जायेगा.

पहले दिन महिलाओं को मिलेगा रथ खींचने का अवसर

उन्होंने बताया कि रथयात्रा के पहले दिन केवल महिलाएं भगवान का रथ खींचेंगी. महिलाएं बड़दांड चौक से रथ को खींचकर गोपबंधु चौक तक लेकर जायेंगी, जहां भगवान का रात्रि विश्राम होगा. दूसरे दिन मौसीबाड़ी के लिए भगवान रथ पर सवार होकर प्रस्थान करेंगे. दूसरे दिन सभी श्रद्धालुओं को रथ खींचने का अवसर मिलेगा.

रथ की सजावट के लिए बुलाये गये कारीगर

राजा सिंहदेव ने बताया कि रथ का निर्माण ओडिशा के कारीगरों द्वारा किया गया है और अब सजावट का कार्य चल रहा है. सजावट के लिए ओडिशा के पीपली से वस्त्र और छतरियां मंगायी गयी हैं, जिन्हें कारीगर लगा रहे हैं.

350 वर्ष से अधिक पुरानी है सरायकेला की रथयात्रा

सरायकेला की रथयात्रा 350 वर्ष से भी अधिक पुरानी है. सरायकेला के प्रतिष्ठित महापात्र परिवार ने ढेंकानाल से भगवान के विग्रह को सरायकेला लाकर रथयात्रा की शुरुआत की थी. तब से लेकर आज तक हर वर्ष यह रथयात्रा आयोजित होती आ रही है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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ATUL PATHAK

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By ATUL PATHAK

ATUL PATHAK is a contributor at Prabhat Khabar.

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