हॉर्टिकल्चर क्षेत्र में काफी संभावनाएं

Updated at : 26 Dec 2017 5:25 AM (IST)
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हॉर्टिकल्चर क्षेत्र में काफी संभावनाएं

सरायकेला-खरसावां : जिले में हॉर्टिकल्चर क्षेत्र में काफी संभावनाएं हैं. इसमें फल, फूल व सब्जियां मुख्य रूप से आती हैं. जिले में बड़े पैमाने पर अलग-अलग किस्म के सब्जी की खेती होती है. जिले के चांडिल के कुछ हिस्सों में फूल की खेती होती है. जानकार बताते हैं कि सरायकेला-खरसावां जिला में फूल की खेती […]

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सरायकेला-खरसावां : जिले में हॉर्टिकल्चर क्षेत्र में काफी संभावनाएं हैं. इसमें फल, फूल व सब्जियां मुख्य रूप से आती हैं. जिले में बड़े पैमाने पर अलग-अलग किस्म के सब्जी की खेती होती है. जिले के चांडिल के कुछ हिस्सों में फूल की खेती होती है. जानकार बताते हैं कि सरायकेला-खरसावां जिला में फूल की खेती की बेहतर संभावनाएं हैं. इसके जरीये बड़ी संख्या में लोगों को स्वरोजगार से जोड़ा जा सकता है. भारत सरकार ने वर्ष 2005-06 से नेशनल हॉर्टिकल्चर मिशन की शुरुआत की.

क्यों अधर में लटका एग्रो टेक्निकल पार्क
एग्रो पार्क के प्रस्तावित स्थल पर पहले से कृषि विभाग डीप इरिगेशन योजना क्रियान्वित किया था. उक्त स्थल पर औषधि प्लांट स्टेविया की खेती की गयी थी. उक्त स्तल पर विभाग ने बिना जांच के एग्रो पार्क निमार्ण की स्वीकृति दे दी. बाद में उक्त स्थल पर पहले से एक योजना क्रियान्वित होने की जानकारी मिली तो एग्रो पार्क योजना अधर में लटक गया.
खरसावां के हाॅर्टिकल्चर कॉलेज का निर्माण कार्य धीमा
खरसावां के कोतुला मौजा में निर्माणाधीन हॉर्टिकल्चर कॉलेज निर्माण काफी धीमी गति से चल रहा है. कॉलेज की बाउंड्री व प्रशासनिक भवन का निर्माण चल रहा है. यहां वर्ष 2012 में तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने कॉलेज का शिलान्यास किया था. यह कोल्हान का पहला हार्टिकल्चर कॉलेज है. कॉलेज का पूरा कैंपस खरसावां अंचल के 51 व खुंटपानी अंचल के 12 एकड़ में फैला है. निर्माण स्थल पर योजना से संबंधित डिस्प्ले बोर्ड भी नहीं लगाया गया है.
पार्क के लिए खरीदी गयी 18 लाख की मशीन बेकार
पार्क निर्माण से पूर्व हॉर्टिकल्चर के लिए करीब 18 लाख रुपये से मशीन खरीदी गयी. अब मशीन व उपकरण बेकार हो रहे हैं. पार्क निर्माण में विभाग खास रुचि नहीं ले रहा है. पूर्व उपायुक्त चंद्रशेखर ने कदम उठाया था. उनके तबादले के बाद कोई पहल नहीं की गयी.
एग्रो टेक्निकल पार्क से फायदा
एग्रो टेक्निकल पार्क में जिले के प्रगतिशील किसानों को परंपरागत सब्जी की खेती से अलग नयी तरह से सब्जियों की खेती का प्रशिक्षण देना था. आधुनिक व नयी तकनीक से खेती को बढावा देना उद्देश्य था. उन्नत किस्म के बीज भी उपलब्ध कराने की योजना थी. एग्रो पार्क में आम लोगों के लिये प्रदर्शनी भी लगाने की योजना थी.
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