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आदिवासी-मूलवासी हैं यहां की जड़, कुर्मी हैं परजीवी

Updated at : 27 Nov 2025 8:56 PM (IST)
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आदिवासी-मूलवासी हैं यहां की जड़, कुर्मी हैं परजीवी

कुर्मी समाज को आदिवासी एसटी सूची में शामिल करने के विरोध में गुरुवार को साहिबगंज में आदिवासी अधिकार रक्षा मंच ने हुंकार महारैली निकाली गयी.

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साहिबगंज. कुर्मी समाज को आदिवासी एसटी सूची में शामिल करने के विरोध में गुरुवार को साहिबगंज में आदिवासी अधिकार रक्षा मंच ने हुंकार महारैली निकाली गयी. आदिवासी महारैली रेलवे जनरल इंस्टीट्यूट से निकलकर स्टेशन चौक, पटेल चौक, गांधी चौक, एलसी रोड, कॉलेज रोड, चैती दुर्गा, पूर्वी फाटक होते हुए उपायुक्त कार्यालय पहुंची. डीसी हेमंत सती को ज्ञापन सौंपा. उन्होंने झारखंड में कुर्मी समाज को एसटी सूची में शामिल करने का जमकर विरोध किया. सैकड़ों की संख्या में आदिवासी समाज के छात्र-छात्राओं ने हाथ में तख्ती, ढोल नगाड़ा लेकर विरोध किया. हुंकार महारैली में शामिल आदिवासी समाज के युवा ने कहा कि आदिवासी मूलनिवासी यहां की जड़ हैं, कुर्मी परजीवी हैं. दूसरे के घर का हिस्सा लेना चाहते हैं. आदिवासी सूची में कदापि शामिल होने नहीं देंगे. वह यहां खेतीबाड़ी करने आये थे. वह कभी आदिवासी नहीं हो सकते. हमारी संस्कृति, रीति-रिवाज, पहनावा-ओढ़ावा सब अलग है. वे दूसरे की पीठ पर चढ़कर अपनी जीविका चलाना चाहते हैं. केंद्र सरकार व राज्य सरकार से मांग करते हैं कि कुर्मी को कभी भी आदिवासी सूची में शामिल नहीं करें. कुर्मी आदिवासी नहीं है. अंग्रेजों के जमाने में आदिवासी सूची से अलग होकर राजा बनना चाहते थे. आदिवासी जहां है, वहां रहने दीजिए. आदिवासी का हक मारने नहीं दिया जायेगा. आदिवासी सदियों से जल, जंगल, जमीन की रक्षा करते आए हैं. मरते दम तक रक्षा करते रहेंगे. कहा कि हम आदिवासी हैं, हमारी अलग पहचान है. कुर्मी जाति जबरदस्ती करने का प्रयास कर रही है. जिस दिन आदिवासी की हुंकार बजेगी, पूरा झारखंड में डंका बजेगा. वहीं इस महारैली में साहिबगंज कॉलेज आदिवासी कल्याण छात्रावास के छात्र नायक श्रीलाल मुर्मू, पूर्व छात्र नायक विनोद मुर्मू, मनोहर टुडू, सुनील सोरेन, छात्र सचिव लक्ष्मण टुडू, सरकार सोरेन, चंदन मुर्मू, मोहन हेंब्रम, अजय टुडू, जोसेफ सोरेन, बबलू मुर्मू सहित आदिवासी बालिका कल्याण छात्रावास की छात्राओं के अलावा विभिन्न आदिवासी संगठन व आदिवासी छात्रावास के छात्र-छात्राएं मौजूद थे. क्या हैं आदिवासी समाज की मांगें – कुड़मी जाति को आदिवासी का दर्जा न दिया जाये. – आदिवासी समुदायों के मौलिक अधिकार और आरक्षण लाभ सुरक्षित रखे जाये. – प्रदर्शन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ, लेकिन समुदाय ने स्पष्ट कर दिया कि जरूरत पड़ने पर आंदोलन को आगे और तेज किया जायेगा.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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