गंगा नदी के मिट्टी से राजमहल एवं उधवा में अवैध तरीके से संचालित हो रहे हैं ईंट भट्टे

Updated at : 23 Apr 2025 8:47 PM (IST)
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गंगा नदी के मिट्टी से राजमहल एवं उधवा में अवैध तरीके से संचालित हो रहे हैं ईंट भट्टे

पर्यावरण संरक्षण का भी मानक नहीं

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राजमहल/ उधवा. राजमहल अनुमंडल क्षेत्र के राजमहल अंचल एवं उधवा अंचल क्षेत्र में गंगा नदी से अवैध तरीके से काटी गयी मिट्टी को ट्रांसपोर्ट कर बंगला ईंट भट्ठा एवं चिमनी भट्ठा तक पहुंचाया जा रहा है, जहां इसका उपयोग ईंट निर्माण में किया जाता है. सूत्रों के अनुसार, कई बंगला ईंट भट्ठा और चिमनी भट्ठा बिना वैध कागजातों के संचालित हो रहे हैं. जानकारों का कहना है कि पर्यावरण संरक्षण और साइबेरियन पक्षियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए, उधवा अंचल के पतौड़ा झील क्षेत्र जो वर्तमान में रामसर साइट के रूप में घोषित है, उसके कुछ किलोमीटर के दायरे में किसी भी प्रकार के भट्ठे का संचालन नहीं होना चाहिए. इसके बावजूद, इन भट्ठों का संचालन बेरोकटोक जारी है. गंगा नदी से काटी गई मिट्टी को प्रशासनिक कार्यालयों के सामने से गुजरते हुए ट्रैक्टरों के माध्यम से भट्ठों तक पहुंचाया जाता है. इन ईंट भट्ठों से उत्पन्न प्रदूषण स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डाल रहा है. विभिन्न क्षेत्रों में संचालित चिमनी भट्ठा और बंगला भट्ठा से पर्यावरण एवं मानव स्वास्थ्य पर प्रत्यक्ष रूप से विपरीत असर हो रहा है. उधवा प्रखंड के अंतर्गत चार चिमनी भट्ठे संचालित हो रहे हैं. इन भट्ठों में सरकार द्वारा निर्धारित गाइडलाइनों की अनदेखी की जा रही है. यदि इनकी जांच की जाए तो कई अनियमितताएं उजागर हो सकती हैं. उधवा प्रखंड के सूतियारपाड़ा, केलाबाड़ी, फुदकीपुर के बहियार में तथा नाशघाट के छोटा अकुबन्ना में चिमनी भट्ठे संचालित हैं. इसके अतिरिक्त, प्रखंड के विभिन्न क्षेत्रों में सैकड़ों पारंपरिक बंगला भट्ठे भी चल रहे हैं, जो सरकार की गाइडलाइन को नजरअंदाज कर रहे हैं. यह स्थिति पर्यावरण और लोगों के स्वास्थ्य के लिए खतरनाक बन गई है. देश में निर्माण कार्यों की रीढ़ माने जाने वाले ईंट भट्ठे आज पर्यावरण और मानव जीवन के लिए गंभीर खतरा बन चुके हैं. उधवा प्रखंड क्षेत्र में सैकड़ों पारंपरिक बंगला भट्ठों और चिमनी भट्ठों से निकलने वाली राख और धुआं हवा और मिट्टी को प्रदूषित कर रहे हैं. चिमनी भट्ठों से निकलने वाला धुआं वायु प्रदूषण का प्रमुख स्रोत माना जाता है. यह धुआं और धूल विशेष रूप से बच्चों और बुजुर्गों के लिए अत्यंत घातक है. ग्रामीण क्षेत्रों में अधिकतर बंगला भट्ठा और चिमनी ईंट भट्ठा का संचालन होता है. सूत्रों के अनुसार, इनमें से अधिकांश भट्ठों के पास पर्यावरण सुरक्षा, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से एनओसी सहित अन्य आवश्यक वैधानिक कागजात नहीं हैं. क्या कहते हैं एसडीओ सीओ को आदेश दिया गया है कि क्षेत्र में जितने भी बांग्ला भट्ठे व चिमनी भट्ठे अवैध रूप से चल रहा है. सभी की जांच कर जांच प्रति मेरे कार्यालय में जमा करें. जांचोपरांत विधिसम्मत कार्रवाई की जायेगी. सदानंद महतो, एसडीओ राजमहल

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