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नहीं मिली विकास की राशि, स्कूल संचालन में शिक्षकों परेशानी

Updated at : 25 Nov 2025 8:51 PM (IST)
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sahibganj

साहिबगंज (फाइल फोटो)

वित्तीय वर्ष 2025-26 का बीत गया पांच माह, अब तक नहीं मिली अनुदान की राशि

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बरहेट. वित्तीय वर्ष 2025-26 के पांच महीने से अधिक का समय बीत चुका है. लेकिन, सरकारी विद्यालयों को अब तक अनुदान की राशि नहीं मिली है. इससे विद्यालय संचालन में समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है. बताते चलें कि विद्यालय में छात्र-छात्राओं के नामांकन के आधार पर अनुदान की राशि दी जाती है. 10 हजार रुपये से लेकर एक लाख रुपये तक की अनुदान राशि सरकार द्वारा दी जाती है. हालांकि, यह अब तक विद्यालयों को उपलब्ध नहीं करायी गयी है, जिससे विद्यालय विकास के साथ-साथ विद्यालयों में रंग-रोगन, झाड़ू, चापाकल की मरम्मत, शौचालय की सफाई और बच्चों की पढ़ाई के लिए चॉक-डस्टर, रजिस्टर आदि आवश्यक सामग्री की खरीदारी नहीं हो पा रही है. ऐसी जानकारी सामने आ रही है कि झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद् (जेइपीसी) के बजट में इस मद की स्वीकृति नहीं दी गयी है, साथ ही केंद्र सरकार ने भी इस अनुदान को मंजूरी नहीं दी है. इसका असर विद्यालय संचालन में पड़ रहा है. इधर, विद्यालय प्रमुख भी असमंजस में हैं कि जब कोष की राशि पहले ही सरेंडर हो चुकी है तो खर्च कहां से करें. स्कूल के प्रधान समेत सभी शिक्षक विद्यालय कार्यों के लिए आने-वाले इन खर्चों का वहन निजी रूप से कर रहे हैं. वार्षिक अनुदान आवंटित होने का इंतजार कर रहे हैं. जिले में 1,285 सरकारी प्रारंभिक विद्यालय संचालित हैं. स्कूलों में नामांकित छात्र संख्या के आधार पर यह अनुदान 10 हजार रुपये से लेकर एक लाख रुपये तक दी जाती है. इसे विभिन्न श्रेणियों में बांटा गया है. इसमें एक से 30 तक विद्यार्थियों की संख्या वाले स्कूलों को 10 हजार रुपये, 31 से 100 तक की संख्या वाले को 25 हजार रुपये, 100 से 250 तक की संख्या वाले स्कूलों को 50 हजार रुपये, 251 से 1000 तक वाले स्कूलों को 75 हजार रुपये तथा 1000 से अधिक संख्या वाले बच्चों के स्कूलों में एक लाख रुपये की राशि जारी की जाती है. सालभर के लिए मिलने वाली राशि विद्यालय की सभी छोटी-मोटी समेत अन्य कार्यों में खर्च की जाती है. मिड डे मील का भी है यही हाल जिले के प्रारंभिक विद्यालयों के बच्चों को अनिवार्य रूप से मध्याह्न भोजन दिया जाता है. लेकिन, पिछले सात महीने से इसकी राशि भी आवंटित नहीं की गयी है. इससे पीएम पोषण योजना उधार में चल रही है. केंद्र की ओर से फंड आवंटित न होने की दशा में राज्य सरकार ने भी भुगतान नहीं किया है. हालांकि, विद्यालयों में चावल उपलब्ध है लेकिन अन्य सामग्रियों के लिए संचालनकर्ता परेशान हैं. क्या कहते हैं डीईओ सरकार की ओर से इस वित्तीय वर्ष के लिए अनुदान राशि नहीं मिली है. जिले का आवंटन मिलते ही अनुदान राशि सभी विद्यालयों को भेज दी जायेगी. डॉ दुर्गानंद झा, जिला शिक्षा पदाधिकारी

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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