नाली नहीं रहने से सड़क पर बहता है पानी, न ही है डस्टबीन और न रोजाना आते हैं सफाई कर्मी

साहिबगंज (फाइल फोटो)
1,800 की आबादी में महज एक डीप बोरिंग
बरहरवा नगर पंचायत क्षेत्र के वार्ड 14 अंतर्गत लबदा गांव में शनिवार को आपके अपने अखबार प्रभात खबर की ओर से ‘प्रभात खबर आपके द्वार’ का आयोजन किया गया. जिसमें लबदा और जमाई टोला गांव के दो दर्जन से अधिक युवाओं, बुजुर्गों व महिलाएं शामिल हुईं. कार्यक्रम में मौजूद ग्रामीणों ने खुलकर गांव की समस्याएं साझा की. बताया कि लबदा व जमाई टोला नगर पंचायत क्षेत्र अंतर्गत आता है लेकिन आज भी यहां कई मूलभूत समस्याएं हैं, जिसका समाधान नहीं हुआ है. ग्रामीणों के अनुसार लबदा और जमाई टोला मिलाकर कुल 350 मकान हैं, जिनकी आबादी तकरीबन 1,800 है. ग्रामीणों के अनुसार गांव की सबसे बड़ी समस्या पेयजल की है. रोजमर्रा की जरूरत को पूरा करने के लिये आज भी लोगों को पानी के लिये संघर्ष करना पड़ता है. हालांकि, गांव में तीन-चार चापाकल हैं लेकिन वह आबादी के हिसाब से पर्याप्त नहीं है. पूरे गांव में नगर पंचायत के द्वारा केवल एक ही स्थान पर डीप बोरिंग करायी गयी है. जबकि, करीब दो वर्ष पूर्व 6-7 स्थानों पर सोलर संचालित पानी टंकी का निर्माण शुरू किया गया था, लेकिन संवेदक के द्वारा काम अधूरा ही छोड़ दिया गया. ग्रामीणों ने बताया कि लबदा और जमाई टोला में पांच स्थानों को चिन्हित कर डीप बोरिंग कराने की आवश्यकता है. वहीं, गांव की मुख्य सड़क अतिक्रमण का शिकार हो गयी है तथा जर्जर अवस्था में है. नाला नहीं रहने के कारण बरसात के दिनों में ग्रामीणों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. इसीलिये, गांव के मुख्य सड़क से अतिक्रमण हटाकर पीसीसी व कालीकृत सड़क तथा आरसीसी नाला का निर्माण किया जाना चाहिये. गांव में शंकर महतो के घर से बुद्धू महतो के घर तक जाने वाली गली पूरी तरह जर्जर हो चुकी है. गली में नाला नहीं रहने के कारण सालों भर घरों का गंदा पानी गली में बहता है, जिस कारण सालों भर कीचड़ रहता है और बदबू आती है. वहीं, जमाई टोला के रंजीत महतो के घर से लेकर श्याम नारायण महतो के घर तक की गली का भी यही हाल है. गांव में स्थित सबसे बड़ा तालाब असमल्ला पोखर व पंपिया पोखर में प्रत्येक वर्ष महापर्व छठ का आयोजन किया जाता है. जिसके आने-जाने का रास्ता कच्चा है. इसीलिये, तालाब के चारों ओर पीसीसी सड़क व बच्चे हुये स्थानों पर सीढ़ी घाट बनाने की जरूरत है. कुछ ग्रामीणों ने बताया कि उनका पीएम आवास स्वीकृत हुआ था, कुछ लोगों द्वारा कुर्सी तक कार्य कराने के बाद तथा कुछ का आवास पूर्ण होने के बाद भी पिछले एक वर्ष से पैसा रुका हुआ है. वहीं, कुछ महिलाओं ने बताया कि उन्हें मंईयां सम्मान योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है. इसके अलावे गांव के युवाओं ने बताया कि उन लोगों का श्मशान घाट छोटा गढ़ग्राम मौजा में स्थित भूताहा पोखर है. जहां तक जाने के लिये पक्की सड़क नहीं है. वहीं बाउंड्री का भी निर्माण नहीं कराया गया है. गांव में कूड़ा-कचरा रखने के लिये एक भी डस्टबीन नहीं है. सफाई कर्मचारी रोजाना नहीं आते हैं, जिससे गांव में गंदगी फैली रहती है. वहीं, गांव में स्ट्रीट लाइट का भी उचित प्रबंध नहीं है, जिससे रात्रि में आने-जाने में परेशानी होती है. स्कूल को हाईटेक के साथ चबूतरा बनाने की मांग गांव के युवाओं ने बताया कि गांव में स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय लबदा में आठवीं कक्षा तक की पढ़ाई होती है, जहां गांव के अलावे आसपास के सैकड़ों बच्चे पढ़ते हैं. लेकिन, स्कूल में मूलभूत सुविधाओं व शिक्षकों की कमी है. स्कूल में बच्चों को कंप्यूटर की शिक्षा प्रदान करने के लिये कंप्यूटर लैब में पर्याप्त कंप्यूटर नहीं है. जिस कारण आधुनिकरण के इस युग में बच्चे पीछे छूट रहे है. इसीलिए हमारे विद्यालय को मॉडल स्कूल की तर्ज पर हाईटेक व विकसित किया जाये तथा यहां शिक्षकों की कमी को दूर करते हुये अन्य सुविधाएं उपलब्ध करायी जाये. इसके अलावे युवाओं ने असमल्लापोखर के पास स्थित पीपल वृक्ष के नीचे चबूतरा का निर्माण कराने की मांग की है. जहां बैठकर ग्रामीण अपने रीति-रिवाज संबंधी कार्य कर सके और बैठकी भी कर सके.
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