कबीर प्रकटोत्सव पर एक दिवसीय सत्संग एवं भंडारे का आयोजन

Published by : ABDHESH SINGH Updated At : 14 Jun 2026 10:52 PM

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साहिबगंज (फाइल फोटो)

झारखंड, बिहार और बंगाल से पहुंचे संत-महात्मा एवं श्रद्धालु, गुरु महिमा और सत्संग के महत्व पर हुआ प्रवचन

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साहिबगंज शहर के चौक बाजार स्थित समिति समलपुरी में रविवार को संत सम्राट सद्गुरु कबीर साहेब के प्रकटोत्सव के अवसर पर एक दिवसीय सत्संग एवं भंडारे का आयोजन किया गया. प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी आयोजित कार्यक्रम में झारखंड, बिहार एवं पश्चिम बंगाल से बड़ी संख्या में संत-महात्माओं, साध्वियों एवं श्रद्धालुओं ने भाग लिया. कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कहा कि संत कबीर साहेब का प्राकट्य ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन काशी के लहरतारा तालाब में हुआ था. उन्होंने मानव कल्याण, आध्यात्मिक जागरण तथा जीवों के उद्धार का संदेश दिया. इसी उद्देश्य को जन-जन तक पहुंचाने के लिए सत्संग एवं भंडारे का आयोजन किया गया. सत्संग का आयोजन संत देवंती साध्वी एवं उनके परिवार के सहयोग से किया गया. कार्यक्रम के मुख्य वक्ता गोड्डा से पधारे महंत अरुण साहेब ने अपने प्रवचन में सत्संग एवं गुरु महिमा पर प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि जीवन की अनेक जिज्ञासाओं और समस्याओं का समाधान सत्संग के माध्यम से प्राप्त होता है. गुरु ही मनुष्य को जीवन, मृत्यु और मुक्ति का वास्तविक मार्ग बताते हैं तथा सत्य के पथ पर चलने की प्रेरणा देते हैं. उन्होंने कहा कि मनुष्य को अपने कर्मों का पालन करते हुए गुरु भक्ति, सेवा, परोपकार एवं मानवता के मार्ग पर चलना चाहिए. जरूरतमंदों की सहायता करना और समाज में सद्भाव बनाये रखना ही सच्ची साधना है. गुरु के मार्गदर्शन से ही व्यक्ति आध्यात्मिक उन्नति एवं मोक्ष की दिशा में अग्रसर हो सकता है. कार्यक्रम में महंत रामानंद साहेब, महंत गोपाल साहेब, महंत मसूदन साहेब, संत वेदानंद साहेब, संत किशोर साहेब, संत जगदीश साहेब, संत गीता साध्वी, महंत जोगमाया साध्वी, संत चंद्र साहेब, संत गणेश साहेब, संत रमेश साहेब, संत भवन साहेब, संत उषा साध्वी, संत तारिणी साध्वी, संत द्रौपदी साध्वी, संत फूलवती साध्वी, संत आरती साध्वी, संत कृष्णा साहेब, संत सुरेश साहेब, संत विश्व साहेब, संत जोगिंदर साहेब, संत मति साहेब सहित अनेक संत-महात्मा एवं साध्वियां उपस्थित रहीं. महंत शंकर दास ने भी अपने प्रवचन में श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक जीवन के महत्व एवं गुरु के प्रति समर्पण का संदेश दिया. सत्संग के उपरांत भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया. कार्यक्रम के समापन पर संत-महात्माओं एवं साध्वियों को अंगवस्त्र एवं सम्मान भेंट कर विदाई दी गयी.

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