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साहिबगंज में आरपीएफ ने रेलवे ट्रैक पार करने के आरोप में एक को पकड़ा, नवजात ने मां की गोद में तोड़ा दम

Updated at : 24 Aug 2024 8:48 PM (IST)
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sahibganj railway station news

आरपीएफ कार्यालय में नवजात के शव के साथ रोते-बिलखते परिजन. फोटो : प्रभात खबर

Jharkhand News: साहिबगंज में आरपीएफ की एक छोटी सी गलती ने नवजात बच्ची की जान ले ली. इसके बाद साहिबगंज स्टेशन पर जमकर हंगामा हुआ. जानें पूरा मामला.

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Jharkhand News: बीमार नवजात को लेकर माता-पिता इलाज कराने के लिए साहिबगंज गये थे. मां के पास टिकट था, लेकिन नवजात के साथ मां पीछे रह गयी और पिता को आरपीएफ ने बिना टिकट पकड़ लिया. नवजात का इलाज समय पर नहीं हो पाया और उसकी मौत हो गयी. यह मामला साहिबगंज रेलवे स्टेशन का है.

शनिवार को सुबह 9:38 बजे बरौनी पैसेंजर ट्रेन आने के बाद रसूलपुर दहला निवासी सोनेलाल शाह और उनकी पत्नी नीलम देवी अपने 2 दिन की मासूम बच्ची को लेकर इलाज कराने के लिए साहिबगंज पहुंचे. दोनों प्लेटफॉर्म नंबर एक पर उतरे. नवजात के साथ नीलम थोड़ा पीछे रह गयी और सोनेलाल शाह आगे बढ़ गया.

सोनेलाल जैसे ही साहिबगंज स्टेशन के प्लेटफॉर्म से बाहर निकला, आरपीएफ के जवानों ने उसे यह कहकर पकड़ लिया कि आप रेलवे ट्रैक पार करके बाहर निकले हैं. उसे जुर्माना के लिए मजिस्ट्रेट कार्यालय के बाहर खड़ा कर दिया. पीछे से नीलम भी पहुंच गयी. मजिस्ट्रेट के पास करीब 2 घंटे तक फैसला नहीं हुआ. नीलम नवजात को गोद में लेकर पति के छूटने का इंतजार करती रही.

इसी बीच नवजात बच्ची ने मां की गोद में ही दम तोड़ दिया. जैसे ही बच्ची की मौत की खबर स्टेशन परिसर में फैली, आसपास के लोग जमा हो गये. हंगामा शुरू कर दिया. इसी बीच घटना की जानकारी मिलने पर सोनेलाल को बिना जुर्माना लिये ही छोड़ दिया गया. घटना की सूचना दंपती के साहिबगंज स्थित रसूलपुर दहला के रहने वाले परिजनों को भी मिल गए. वे भी वहां पहुंच गए.

इधर, हंगामा की खबर सुनकर नगर थानेदार अमित कुमार पुलिस अधिकारियों के साथ रेलवे स्टेशन पहुंचे और वहां पर शांति व्यवस्था बहाल करने में लग गये. दंपती के परिजनों को अपने साथ आरपीएफ कार्यालय ले गये, जहां परिजनों से पूरी जानकारी ली. देर शाम परिजनों ने एक लिखित शिकायत दर्ज करायी, जिसमें आरपीएफ जवानों पर लापरवाही का आरोप लगाया और न्याय की मांग की. सभी लोग आरपीएफ जवान की गिरफ्तारी व मुआवजा की मांग कर रहे थे.

मां नीलम देवी बोली – मेरी बेटी की मौत का जिम्मेवार कौन

मां नीलम देवी ने कहा कि बच्ची के इलाज के लिए टिकट कटाकर पीरपैंती से साहिबगंज आये थे. हम दोनों पति-पत्नी का टिकट रहने के बावजूद आरपीएफ द्वारा पति को गिरफ्तार कर तीन घंटे से अधिक बैठाकर रखा गया. इस कारण नवजात का इलाज नहीं करा पाये और इलाज के अभाव में हमारी गोद में ही उसने दम तोड़ दिया. आखिर नवजात की मौत का जिम्मेवार कौन होगा, क्या हमें इंसाफ मिल भी पायेगा?

पिता सोनेलाल बोले – दोषी के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो

पिता सोनेलाल साह ने कहा कि आखिर हमारा कुसूर क्या था. हमने तो यात्रा टिकट के साथ ही सफर किया था. फिर क्यों हमें बेवजह गिरफ्तार किया गया, जिसके कारण हम अपनी बच्ची का इलाज नहीं करा पाये. हम केवल इतना चाहते हैं कि जिस आरपीएफ जवान ने बिना कुसूर मुझे गिरफ्तार किया, उस पर सख्त कार्रवाई हो.

ट्रैक पार करने पर लगा था जुर्माना – आरपीएफ इंस्पेक्टर

अभियान के तहत स्टेशन परिसर में रेल ट्रैक पार करने वालों पर जुर्माना लगाया जा रहा था. हमारे जवानों ने रेलवे एक्ट के तहत 4 लोगों को गिरफ्तार किया था. इस दौरान पीड़ित परिवार ने नवजात के बीमार होने की बात नहीं बतायी. अगर पूरी जानकारी पीड़ित व्यक्ति के द्वारा पहले दी जाती, तो इतनी बड़ी घटना नहीं होती. इस मामले की छानबीन की जा रही है.

क्रिस्टोफर किस्कू, आरपीएफ निरीक्षक, साहिबगंज पोस्ट

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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