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मशरूम की खेती कर परिवार का भरण-पोषण कर रही है वीणा

Updated at : 11 Dec 2024 7:36 PM (IST)
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मशरूम की खेती कर परिवार का भरण-पोषण कर रही है वीणा

मंडरो प्रखंड के पिंडरा गांव के आदिवासी बाहुल इलाके की निवासी घर पर ही उगा रही मशरूम

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मंडरो. अगर आत्मविश्वास और लगन हो, तो महिलाएं किसी से कम नहीं है. इसी आत्मविश्वास और लगन की बदौलत वीणा देवी ने मशरूम की खेती करके उदाहरण प्रस्तुत किया है. इसी से वे अपने परिवार का भरण-पोषण भी कर रही हैं. मंडरो प्रखंड अंतर्गत पिंडरा पंचायत के पिंडरा गांव के आदिवासी बाहुल इलाके की निवासी वीणा देवी तीन वर्ष से घर पर ही मशरूम की खेती कर अपने परिवार का भरण पोषण करते हुए आत्मनिर्भर हो रही हैं. उनकी लगन को आत्मनिर्भरता को देखकर आसपास की ग्रामीणों के लिए प्रेरणास्रोत बन गयी हैं. रेणु देवी हाउस वाइफ हैं और मंडरो जेएसएलपीएस की रोशनी आजीविका सखी मंडल से वर्ष 2016 में जुड़ी. ग्रुप से जुड़ कर योजनाओं के बारे में जानकारी प्राप्त की. इसके बाद वीणा देवी दस हजार रुपये का लोन लेकर मशरूम की खेती करना प्रारंभ की. वीणा देवी बताती हैं कि सबसे पहले मशरूम का बीज राजगीर से मंगाते हैं. इसके बाद थायमेट और भूसा से उपजाऊ मिट्टी बनाया जाता है. इसमें मशरूम का बीज डालने के बाद अंकुरित होता है. पूरी तरह से मशरूम लगभग 15 से 25 दिनों के अंदर खाने लायक तैयार हो जाता है. इसे निकाल कर मंडरो, बोरियो और बरहेट तक बिक्री के लिए भेजा जाता है. इससे अच्छी कमाई में हो जाती है, जिससे परिवार का भरण पोषण कर लेते हैं. इस कार्य में पति श्याम कुमार पंडित भी भी हाथ बटाते हैं, जिसकी वजह से कार्य सरल हो जाता है. दो प्रकार का होता है मशरूम जेएसएलपीएस की रोशनी आजीविका सखी मंडल से जुड़ी वीणा देवी बताती हैं कि खेती में दो प्रकार की मशरूम उगायी जाती है, जिसमें छाता वाला मशरूम और बटन आकार का होता है. छाता वाला मशरूम दो सौ रुपये प्रति किलो और बटन मशरूम तीन सौ से साढ़े तीन सौ रुपये किलो के हिसाब से बाजार में बेचा जाता है. इस रोजगार से जुड़ कर हम अपने परिवार का भरण पोषण आसानी से कर रहे हैं. बीएपी गुंजन व सीसी सत्यम महिलाओं को करा रहे हैं रोजगार मुहैया आजीविका सखी मंडल की बीएपी गुंजन कुमारी और सीसी सत्यम कुमार महिलाओं को रोजगार मुहैया कराने में अहम भूमिका निभा रहे हैं. इनका कहना है कि वीणा देवी, कंचन देवी और किरण देवी सखी मंडल से जुड़कर मशरूम की खेती करके अपने परिवार का भरण पोषण करने में सक्षम हो रही हैं. इससे अन्य महिलाओं को भी सीख लेने की आवश्यकता है, ताकि वे भी अपने घर परिवार को चलाने में हाथ बढ़ा सकें. जेएसएलपीएस के बीपीएम ने कहा कि मंडरो के जेएसएलपीएस बीपीएम ब्रह्मानंद महतो का कहना है कि मंडरो प्रखंड के सभी पंचायत के गांव कस्बों में आज महिलाएं जेएसएलपीएस से जुड़कर रोजगार का साधन प्राप्त कर आत्मनिर्भर हो रही हैं और लोगों को भी प्रेरणा दे रही हैं. वे अपने परिवार को चलाने में सक्षम बन गयी हैं.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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