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कबाड़ में बिक रहा आयुष्मान कार्ड, पुलिस को देखकर अस्पताल से पूर्व लिपिक फरार

Updated at : 20 Sep 2025 8:37 PM (IST)
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कबाड़ में बिक रहा आयुष्मान कार्ड, पुलिस को देखकर अस्पताल से पूर्व लिपिक फरार

कुसमा, चुकली बेड़ो, चुकली माको, पकड़ीगोडा, बास्को पहाड़ व मैटर के अलावे अन्य पहाड़िया गांवों के लाभुकों के कार्ड सहित अन्य दस्तावेज बरामद

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बरहेट. जिले के कोटालपोखर थाना क्षेत्र के सोनाकर गांव स्थित पुराने मदरसे के समीप कबाड़ी वाले के पास सरकारी विद्यालय की मिली किताबों के मिलने के बाद अब बरहेट अस्पताल के दर्जनभर अलग-अलग गांवों के लाभुकों में आयुष्मान कार्ड वितरण के बजाय कबाड़ी वाले के पास बेचने का मामला प्रकाश में आया है. जहां एक तरफ केंद्र सरकार और राज्य सरकार असहाय, गरीब परिवारों को इलाज के लिये नि:शुल्क कार्ड बनाकर लोगों को सुविधा उपलब्ध कराती है, तो वहीं दूसरी ओर अस्पताल की पूर्व लिपिक अणु कुमारी द्वारा इसे कबाड़ी वाले के पास बेचने को लेकर माहौल गरमा गया है. बताते चलें कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बरहेट में पदस्थापित लिपिक अणु कुमारी का स्थानांतरण सिविल सर्जन कार्यालय जमशेदपुर तके किया गया है. शनिवार को वह चार पहिया वाहन से अस्पताल परिसर पहुंची. जहां अपने सरकारी क्वार्टर से उन्होंने कई गांवों के लाभुकों के आयुष्मान कार्ड, कोविड-19 रजिस्टर के अलावा अस्पताल से संबंधित अन्य दस्तावेज बरहेट संथाली निवासी इम्तियाज अंसारी के पास किलो के भाव में बेच दिया. कबाड़ी वाले ने अपनी साइकिल अस्पताल के अंदर ही रखी थी. इस बीच किसी की नजर आयुष्मान कार्ड पर पड़ी और मामले की जानकारी अस्पताल के प्रभारी डॉ चौधरी चंद्रशेखर प्रसाद चंद एवं थाना प्रभारी पवन कुमार यादव को दे दी गयी. जिसके बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने कुसमा, चुकली बेड़ो, चुकली माको, पकड़ीगोडा, बास्को पहाड़, मैटर के अलावे अन्य पहाड़िया गांवों के लाभुकों के आयुष्मान कार्ड सहित अन्य दस्तावेज बरामद किया. इसमें कई महत्वपूर्ण सरकारी लेखा-जोखा भी है. कबाड़ी वाले ने पूछताछ में बताया कि पूर्व लिपिक अणु कुमारी इससे पूर्व तीन बार सरकारी दस्तावेज बेच चुकी है. उधर, पुलिस के आने की सूचना मिलते ही पूर्व लिपिक अणु कुमारी अस्पताल परिसर से भाग गयी. आखिर लाभुकों में क्यों वितरित नहीं किये गये आयुष्मान कार्ड . केंद्र सरकार द्वारा संचालित आयुष्मान कार्ड योजना को लेकर समय-समय पर गांव गांव में कैंप लगाया जाता है, ताकि लोगों को 5 लाख रुपये तक की नि:शुल्क इलाज मुहैया हो सके. लेकिन, इतनी संख्या में कबाड़ी वाले के पास आयुष्मान कार्ड मिलने के बाद अस्पताल की व्यवस्था पर कई प्रश्न खड़े हो रहे हैं. जिनमें सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर ये कार्ड लाभुकों में वितरित क्यों नहीं हुये. वहीं, दूसरा सवाल है कि जब लिपिक का स्थानांतरण हुआ तो उनसे सभी प्रकार के दस्तावेज जमा क्यों नहीं लिये गये. अब जब यह मामला सामने आया है तो अस्पताल के जिम्मेदार कर्मी एक-दूसरे पर दोषारोपण कर रहे हैं. इससे लोगों में काफी नाराजगी है. अब जांच के बाद ही मामला पूर्ण रूप से स्पष्ट हो जायेगा. हालांकि, अस्पताल कर्मियों में हड़कंप मचा हुआ है. क्या कहते हैं पदाधिकारी साहिबगंज सिविल सर्जन डॉ रामदेव पासवान ने कहा कि मामले की जानकारी नहीं है. किसी भी स्वास्थ्य योजना में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जायेगी. मामले की जानकारी लेकर जो भी दोषी होंगे, उनके विरूद्ध सुसंगत कार्रवाई की जायेगी.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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