संसाधन में झारखंड के स्कूल टॉप पर, लेकिन शिक्षकों की कमी

Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 30 Dec 2024 12:35 AM

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Birsa Munda

छात्र-शिक्षक अनुपात के मामले में झारखंड राष्ट्रीय औसत से पीछे

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छात्र-शिक्षक अनुपात के मामले में झारखंड राष्ट्रीय औसत से पीछे

देश में औसतन 25 और झारखंड में 35 विद्यार्थियों को पढ़ाने के लिए एक शिक्षक

झारखंड के एक स्कूल में औसतन पांच शिक्षक व 161 विद्यार्थी है नामांकित

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::::::::: महत्वपूर्ण तथ्य :::::::::

राज्य के 199 स्कूलों में एक भी विद्यार्थी नहीं, पर 398 शिक्षक हैं कार्यरत

राज्य के 8353 स्कूलों में सिर्फ एक-एक शिक्षक, जबकि यहां 4,10199 विद्यार्थी

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सुनील कुमार झा, रांची

राज्य गठन के बाद झारखंड के स्कूलों को संसाधन युक्त कर दिया गया है. स्कूलों में भवन से लेकर पानी, बिजली, शौचालय समेत तमाम आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध है, पर शिक्षकों की कमी आज तक दूर नहीं हो सकी. केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय द्वारा यू डायस प्लस 2022-23 व वर्ष 2023-24 की रिपोर्ट एक साथ जारी कर दी गयी है. रिपोर्ट में देश भर के स्कूलों में उपलब्ध संसाधनों से लेकर शिक्षकों व विद्यार्थियों की संख्या की विस्तृत जानकारी दी गयी है. रिपोर्ट के अनुसार, झारखंड के स्कूल संसाधनों के मामले में देश के टॉप राज्यों में शामिल है, पर शिक्षकों की संख्या में झारखंड की स्थिति देश में सबसे खराब है.

केंद्र सरकार द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार, झारखंड में 35 विद्यार्थियों पर एक शिक्षक हैं, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर 25 विद्यार्थियों पर एक शिक्षक हैं. झारखंड के बाद बिहार में सबसे अधिक 32 विद्यार्थियों पर एक शिक्षक हैं. रिपोर्ट के अनुसार, झारखंड में एक विद्यालय में औसतन पांच शिक्षक कार्यरत हैे. वहीं विद्यालयों में औसत नामांकन 161 है. राज्य में एक शिक्षकवाले स्कूलों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है. . वर्ष 2022-23 की तुलना में वर्ष 2023-24 में ऐसे विद्यालयों की संख्या बढ़ गयी है. वर्ष 2022-23 में 7642 थी जो वर्ष 2023-24 में ऐसे स्कूलों की संख्या बढ़कर 8353 हो गयी.

बिना विद्यार्थी वाले स्कूल में 398 शिक्षक : रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में 199 स्कूल ऐसे हैं जिसमें एक भी विद्यार्थी नहीं है. इन स्कूलों में 398 शिक्षक कार्यरत हैं. राज्य में ऐसे स्कूलों की संख्या में कमी हुई है. वर्ष 2022-23 में ऐसे स्कूलों की संख्या 370 थी. इन विद्यालयों में 1368 शिक्षक कार्यरत थे.

जहां एक शिक्षक उन स्कूलों में चार लाख से अधिक विद्यार्थी : राज्य में कुल 8353 स्कूल ऐसे है जिनमें एक शिक्षक है. इन विद्यालयों में 410199 बच्चे नामांकित है. ऐसे विद्यालयों की संख्या के साथ-साथ इनमें नामांकित विद्यार्थियों की संख्या में भी बढ़ोतरी हुई है. झारखंड के एक स्कूल में औसतन 161 विद्यार्थी नामांकित है, जबकि पिछले वर्ष औसत नामांकन 162 था.

शिक्षा का अधिकार अधिनियम का प्रावधान : शिक्षा का अधिकार अधिनियम के प्रावधान के अनुरूप कक्षा एक से पांच में 60 विद्यार्थियों पर दो शिक्षक रखने का प्रावधान है. वहीं 61 से 90 विद्यार्थी पर तीन, 91 से 120 विद्या पर चार व 121 से 200 विद्यार्थी के होने पर पांच शिक्षक रखने का प्रावधान है. इसके साथ ही प्रत्येक मध्य विद्यालय में तीन स्नातक प्रशिक्षित शिक्षक जिसमें भाषा, विज्ञान व सामाजिक विज्ञान विषय का एक -एक शिक्षक शामिल है.

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प्राथमिक व हाई स्कूलों में नौ वर्ष से नियुक्तियां नहीं

राज्य के प्राथमिक विद्यालय, मध्य विद्यालय व हाइस्कूल में वर्ष 2016 के बाद नयी नियुक्ति नहीं हुई है. इन विद्यालयों में नियुक्ति के लिए अंतिम विज्ञापन वर्ष 2015-16 में जारी किया गया था, इसी के आधार पर वर्ष 2022-23 तक शिक्षकों की नियुक्ति हुई है. हालांकि राज्य के प्राथमिक व मध्य विद्यालय में 26 हजार शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया चल रही है. झारखंड कर्मचारी चयन आयोग द्वारा परीक्षा ली गयी है. नियुक्ति को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका विचाराधीन है , सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया पूरी हो जायेगी.

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केंद्र सरकार द्वारा जारी रिपाेर्ट

राज्य@छात्र शिक्षक अनुपात@औसत शिक्षक@ औसत नामांकन

झारखंड@35@05@161

बिहार@32@07@ 225

प.बंगाल@31@06@192

महाराष्ट्र@29@07@197

गुजरात@29@07@214

दिल्ली@28@29@820

उत्तर प्रदेश@27@06@163

कर्नाटक—@27@06@157

उत्तराखंड@27@06@105

मध्य प्रदेश@24@05@124

उड़ीसा@23@05@126

छत्तीसगढ़@21@05@102

असम@20@06@122

नोट इसमें राज्य में संचालित सभी सरकारी, गैर सरकारी मान्यता प्राप्त, निजी स्कूल शामिल है.

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झारखंड के स्कूलों में उपलब्ध संसाधन

शौचालय@ 97.6फीसदी

बिजली@92.4फीसदी

पानी@99 फीसदी

पुस्तकालय@94 फीसदी

पाठ्य सहगामी संसाधन@ 76 फीसदी

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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