प बंगाल के फर्जी परमिट पर झारखंड में पत्थरों की अवैध ढुलाई

Updated at : 02 Jul 2024 1:17 AM (IST)
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दुमका और साहिबगंज सहित राज्य के अन्य जिलों में अवैध खनन से निकाले गये पत्थर और स्टोन चिप्स पश्चिम बंगाल के फर्जी परमिट के सहारे ढोये जा रहे हैं.

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शकील अख्तर (रांची).

दुमका और साहिबगंज सहित राज्य के अन्य जिलों में अवैध खनन से निकाले गये पत्थर और स्टोन चिप्स पश्चिम बंगाल के फर्जी परमिट के सहारे ढोये जा रहे हैं. दुमका के तत्कालीन उपायुक्त रविशंकर शुक्ला ने अवैध खनिजों की ढुलाई में पकड़े ट्रकों को ‘झारखंड मिनरल रूल-2017’ में निहित प्रावधानों के तहत कुर्क किया है. पत्थर के कारोबार और ढुलाई से जुड़े लोगों ने उपायुक्त के इस अधिकार को चुनौती देते हुए दो दर्जन से अधिक रिट याचिकाएं हाइकोर्ट में दायर कर रखी हैं. याचिकाओं की सुनवाई करते हुए न्यायालय ने अंतरिम आदेश पारित कर उपायुक्तों के अधिकार पर अगले आदेश तक के लिए रोक लगा दी है. साल भर से इन याचिकाओं की सुनवाई के दौरान सभी पक्षों द्वारा सिर्फ समय मांगा जा रहा है. इससे वैध दस्तावेज के बिना खनिजों की ढुलाई करनेवाले ट्रकों को कुर्क करने संबंधी मामले उपायुक्तों की अदालत में लंबित पड़े हैं. झारखंड मिनरल्स (प्रिवेंशन ऑफ इलीगल माइनिंग, ट्रांस्पोर्टेशन, स्टोरेज)-2017 में खनिजों का अवैध खनन, वैध दस्तावेज के बगैर इनकी ढुलाई और भंडारण करनेवालों को दंडित करने का प्रावधान है. इसके अलावा वैध दस्तावेज के बिना खनिजों ढोनेवाले ट्रकों को कुर्क करने का अधिकार उपायुक्तों के दिया गया है. दुमका के जिला खनन पदाधिकारी ने बगैर दस्तावेज के पड़े गये ट्रकों तीन के खिलाफ विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर उपायुक्त को सौंपा और इनके खिलाफ ‘झारखंड मिनरल रूल-2017’ के तहत कार्रवाई का अनुरोध किया. इन ट्रकों के खिलाफ आइपीसी की धारा-379, 411 और 34 के तहत प्राथमिकी दर्ज कर न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत में कार्रवाई शुरू की गयी. उपायुक्त ने नोटिस जारी कर ट्रक मालिकों को अपना पक्ष रखने और वैध दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा. कई बार नोटिस जारी करने के बाद एक ट्रक मालिक ने उपायुक्त की अदालत में तीन चालान की फोटो कॉपी और एक ट्रक मालिक ने दो चालान की फोटो कॉपी जमा की. साथ ही अपना पक्ष रखते हुए कहा कि न्यायिक दंडाधिकारी ने जांच में संबंधित चालान का सत्यापन सही पाया है, इसलिए पत्थर लदे ट्रकों को जब्त करना सही नहीं था.

उपायुक्त की जांच में पता चला कि चालान प बंगाल के हैं :

ट्रक मालिकों द्वारा जमा कराये गये चालान की उपायुक्त ने अपने स्तर से जांच करायी. इसमें पाया गया कि प बंगाल के बीरभूम जिले के राजस्व पदाधिकारी ने ये चालान बंगाल की सीमा के अंदर खनिजों की ढुलाई के लिए जारी किया था. इन चालानों के सहारे न तो प बंगाल के खनिजों को राज्य के बाहर नहीं ले जाया जा सकता है, न ही राज्य की सीमा से बाहर खनिजों की ढुलाई नहीं की जा सकती है. यानी ट्रक मालिकों द्वारा अपने बचाव में दिये गये चालान झारखंड के लिए वैध नहीं थे. जांच के बाद उपायुक्त ने ‘झारखंड मिनरल रूल-2017’ में दी गयी शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए सभी ट्रकों को कुर्क करने का आदेश जारी किया.

उपायुक्त के अधिकारों को हाइकोर्ट में दी गयी चुनौती :

उपायुक्त के आदेश के बाद उनके अधिकारों को चुनौती देते हुए पत्थर कारोबार और खनिजों की ढुलाई से जुड़े लोगों ने हाइकोर्ट में रिट याचिकाएं दायर कीं. याचिकाओं में कहा गया कि एमएमडीआर एक्ट में वैध दस्तावेज के बिना खनिजों की ढुलाई में लगे ट्रकों को कुर्क करने का अधिकार न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत को दिया गया है. झारखंड सरकार ने एमएमडीआर एक्ट के विपरीत यह अधिकार उपायुक्तों को दे दिया है. न्यायालय ने मामले की सुनवाई के दौरान जुलाई 2023 में अंतरिम आदेश पारित कर उपायुक्तों के इस अधिकार पर रोक लगा दी. साथ ही सरकार को इस मामले में अपना पक्ष पेश करने का आदेश दिया.

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