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जमीन के अभाव में लटकी हैं राजधानी की तीन परियोजनाएं, लोगों को नहीं मिल रहा लाभ

Updated at : 21 May 2023 9:28 AM (IST)
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जमीन के अभाव में लटकी हैं राजधानी की तीन परियोजनाएं, लोगों को नहीं मिल रहा लाभ

मेकन के पास रेलवे ने अंडरपास का निर्माण किया है. लेकिन, एप्रोच रोड बनाने का कार्य पिछले चार वर्षों से रुका हुआ है. इस कारण लोगों को अंडरपास का लाभ नहीं मिल रहा है. डीपीएस स्कूल के सामने से अंडरपास तक एप्रोच रोड और ब्रिज का निर्माण हो चुका है.

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रांची. मेकन के पास रेलवे ने अंडरपास का निर्माण किया है. लेकिन, एप्रोच रोड बनाने का कार्य पिछले चार वर्षों से रुका हुआ है. इस कारण लोगों को अंडरपास का लाभ नहीं मिल रहा है. डीपीएस स्कूल के सामने से अंडरपास तक एप्रोच रोड और ब्रिज का निर्माण हो चुका है. लेकिन, विपरीत दिशा में अंडरपास से डिबडीह क्रॉसिंग लाइन तक समानांतर एप्रोच रोड बनना है. इसका काम रुका हुआ है. इसके लिए मेकन से 425 मीटर लंबी जमीन एप्रोच रोड के लिए मांगी गयी है. जबकि, रेलवे की 465 मीटर लंबी जमीन सड़क निर्माण के लिए ली जायेगी. कुल 890 मीटर लंबी सड़क का निर्माण होना है.

मेकन : रेलवे अंडरपास तो बना, पर एप्रोच रोड नहीं

इधर, डीआरएम प्रदीप गुप्ता ने बताया कि अंडरपास बनकर तैयार है. रेलवे द्वारा अतिक्रमण भी हटाया गया. करीब 25 घरों को तोड़ा गया. उन्होंने कहा कि रेलवे की ओर से अपना कार्य पूरा कर लिया गया है. लेकिन, अंडरपास तक जानेवाले एप्रोच रोड के लिए मेकन द्वारा जमीन नहीं दी जा रही है. इस कारण लोगों को इसका लाभ नहीं मिल रहा है. वहीं, मेकन का कहना है कि इस मामले में इस्पात मंत्रालय को फाइल भेजी गयी है. वहां से स्वीकृति मिलते ही समुचित कार्रवाई की जायेगी. मालूम हो कि एप्रोच रोड का निर्माण होने से वाहनों को डिबडीह से डोरंडा जाने के लिए रेलवे क्रॉसिंग से जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी.

13 वर्षों में नहीं बनी सीयूजे जानेवाली सड़क

केंद्रीय विश्वविद्यालय मनातू जाना जोखिम भरा हो गया है. चार दिन पहले इस सड़क पर कार दुर्घटनाग्रस्त होने से एक महिला इंजीनियर की मौत हो गयी थी. दो किमी लंबी इस सड़क का निर्माण 13 वर्षों में भी नहीं हो सका है. पांच साल पहले सड़क निर्माण के लिए टेंडर जारी हुआ था, पर भू-अर्जन की राशि अधिक होने के कारण इसका निर्माण नहीं हो सका. तब निर्माण की लागत करीब पांच करोड़ आ रही थी और भू-अर्जन पर निर्माण से 15 गुना से अधिक राशि लग रही थी. बाद में सरकार फिर निर्माण की दिशा में आगे बढ़ी. अभी निर्माण से करीब आठ गुना अधिक भू-अर्जन के लिए राशि लगने का अनुमान है. जमीन के कारण यह योजना लटकी हुई है.

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पिस्का आरओबी का काम ठप

एनएच-23 फोरलेन का हो गया है, पर पिस्का रेलवे क्रॉसिंग के पास आज भी स्थिति खराब है. यहां आरओबी (रेल ओवरब्रिज) बनाने के लिए एक साल पहले ही एनएचएआइ ने टेंडर फाइनल कर ठेकेदार को काम दे दिया है, लेकिन जमीन नहीं मिलने के कारण काम फंसा हुआ है. इस कारण यहां रेलवे क्रॉसिंग में रोज वाहन फंसते रहते हैं. जिला भू-अर्जन कार्यालय की ओर से जमीन उपलब्ध करायी जानी है, पर जमीन पूरी तरह उपलब्ध नहीं हो सकी है. यहां वर्षों से आरओबी बनाने की परियोजना है, पर वह पूरी नहीं हो पा रही है.

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