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कोडरमा व गिरिडीह क्षेत्र का बड़ा मुद्दा है तीन लाख ढिबरा मजदूर

Updated at : 09 Apr 2024 5:54 PM (IST)
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कोडरमा व गिरिडीह क्षेत्र का बड़ा मुद्दा है तीन लाख ढिबरा मजदूर

कोडरमा व गिरिडीह लोकसभा सीट के लिए ढिबरा मजदूर एक अहम मुद्दा बन गये हैं. करीब तीन लाख ऐसे मजदूर हैं, जो पूरी तरह ढिबरा चुनने का काम करते हैं.

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रांची. कोडरमा व गिरिडीह लोकसभा सीट के लिए ढिबरा मजदूर एक अहम मुद्दा बन गये हैं. करीब तीन लाख ऐसे मजदूर हैं, जो पूरी तरह ढिबरा चुनने का काम करते हैं. पर अभी वे बेरोजगार हो गये हैं. इन दिनों लोकसभा क्षेत्र के प्रत्याशियों से ढिबरा मजदूर व कारोबारी सवाल पूछ रहे हैं. गौरतलब है कि राज्य में ढिबरा चुनने का अवैध रूप से कारोबार वर्षों से चला आ रहा है. राज्य सरकार ने इसके वैध कारोबार की मंशा जाहिर की. इसके बाद ढिबरा के वैध कारोबार के लिए नियमावली अधिसूचित कर दी . जेएसएमडीसी के अधीन ढिबरा का कारोबार दिया गया है. इसके तहत ढिबरा डंप कर जेएसएमडीसी ही नीलामी कराना है. तत्कालीन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने 17 जनवरी 2023 को कोडरमा में ढिबरा लोड एक वाहन को हरी झंडी दिखा कर ढिबरा के वैध कारोबार की सांकेतिक शुरुआत की थी, पर यह काम शुरू नहीं हो सका. ढिबरा में लिथियम के अंश होने की बात कह कर इस कारोबार को आरंभ नहीं होने दिया गया. दूसरी ओर कल तक जो मजदूर अवैध रूप से ढिबरा चुनते थे, वे वैध काराबोर शुरू होने की आस में ही बेरोजगार रह गये. ढिबरा कारोबार को वैध बनाने को लेकर आंदोलन भी होता रहा है. ढिबरा स्क्रैप मजदूर संघ व अन्य संगठन के बैनर तले आवाज भी उठायी जा रही है. जो चुनाव में भी छायी हुई है. ढिबरा मजदूरों की जिला स्तरीय सहकारी समिति औद्योगिक स्वावलंबी को-ऑपरेटिव सोसाइटी के अध्यक्ष अशोक वर्मा ने कहा कि अभ्रक क्षेत्र कोडरमा जिले के लाखों ढिबरा मजदूरों और उद्यमियों के मन में यही प्रश्न है कि अभ्रक उद्योग को पुनर्जीवित किया जायेगा या नहीं. पिछले 50 वर्षों में राज्य सरकार को ढिबरा के रूप में अभ्रक के व्यापार से एक पैसा भी राजस्व नहीं मिला है. चूंकि उत्पादित अभ्रक का 90 प्रतिशत विदेश जाता है, इसलिए केंद्र सरकार को निर्यात शुल्क के रूप में राजस्व मिल रहा है, पर राज्य सरकार को कुछ भी नहीं मिलता. पिछले 13 महीने से ढिबरा मजदूर पूरी तरह से बेरोजगार हो गये हैं. वहीं गिरिडीह के एक माइका व्यापारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि ढिबरा के साथ लिथियम के अंश होने की बात कह कर काम को टाल दिया गया है. पर स्थिति यह है कि रोजगार के अभाव में सहकारी समिति के सैकड़ों सदस्य दूसरे राज्यों की ओर पलायन कर गये हैं. कोडरमा और गिरिडीह के दर्जनों अभ्रक उद्यमी अपने प्लांट राजस्थान ले गये हैं. हमलोग प्रत्याशियों के सामने यही पूछ रहे हैं कि ढिबरा को लेकर उनकी क्या योजना है.

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