Ranchi News : उच्च शिक्षा में हिंदी को जगह नहीं

Published by : MUNNA KUMAR SINGH Updated At : 13 Sep 2025 6:11 PM

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शहर के निजी स्कूलों में 10वीं के बाद हिंदी विषय लेकर पढ़ने वाले विद्यार्थियों की संख्या में लगातार कमी आ रही है.

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:::: आज हिंदी दिवस. निजी विद्यालयों में 11वीं में पांच से दस प्रतिशत विद्यार्थी ही चुनते हैं हिंदी विषय

:::: रांची के कई प्रमुख स्कूलों में 11वीं-12वीं में हिंदी विषय लेकर पढ़ने वाले एक भी स्टूडेंट नहीं

:::: हिंदी लेने वालों की संख्या कम, इसलिए कुछ स्कूलों में हिंदी विषय का विकल्प भी नहीं

रांची. शहर के निजी स्कूलों में 10वीं के बाद हिंदी विषय लेकर पढ़ने वाले विद्यार्थियों की संख्या में लगातार कमी आ रही है. 11वीं व 12वीं में हिंदी विषय लेकर पढ़ने वालों की संख्या पांच से दस प्रतिशत रह जाती है. 90 प्रतिशत से ज्यादा विद्यार्थी 11वीं में हिंदी विषय लेते ही नहीं हैं. जबकि रांची में कई स्कूल ऐसे भी हैं, जिनमें 50 से 90 प्रतिशत विद्यार्थी हिंदी विषय काे चुन कर पढ़ाई कर रहे हैं. शिक्षाविदों के अनुसार विद्यार्थी दसवीं तक हिंदी पढ़ते हैं. लेकिन, 11वीं में प्रतियोगी परीक्षाओं को ध्यान में रखते हुए विषयों का चुनाव करते हैं. हिंदी की जगह छात्र अन्य वैकल्पिक विषयों को चुन रहे हैं.

11वीं-12वीं में हिंदी विषय में रुझान कम होने के कारण

– उच्च शिक्षा और नौकरी के लिए अंग्रेजी को अहम माना जाता है, इसलिए विद्यार्थी अन्य विषयों पर ध्यान देते हैं.

– अभिभावक भी बच्चों को अंग्रेजी माध्यम से आगे बढ़ने की सलाह देते हैं.

– एक घारणा है कि हिंदी में नंबर लाना कठिन है.

– धारणा है कि हिंदी लेने से करियर के विकल्प सीमित हो जाते हैं.

– ऐसे विषयों की पढ़ाई कराना चाहते हैं, जिनसे रोजगार आसानी से मिल सके.

हिंदी विषय का विकल्प ही नहीं

स्कूलों में हिंदी शिक्षकों के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो रही है. कई बार छात्रों की कम संख्या के कारण स्कूलों में हिंदी विषय का विकल्प ही नहीं दिया जाता है. इसका असर सीधे-सीधे हिंदी अध्यापकों की भूमिका और उनके भविष्य पर पड़ता है. शिक्षकों का कहना है कि हिंदी को लेकर छात्रों में रुचि पैदा करने के लिए न केवल पाठ्यक्रम बल्कि पढ़ाने के तरीकों में भी बदलाव लाने की जरूरत है.

सांस्कृतिक दृष्टि से चिंताजनक स्थिति

शिक्षकों के अनुसार हिंदी विषय से दूरी बनाना केवल शैक्षणिक ही नहीं बल्कि सांस्कृतिक दृष्टि से चिंताजनक है. मातृभाषा से युवा पीढ़ी कटती चली जायेगी, तो भाषा और साहित्य की समृद्ध परंपरा कमजोर हो जायेगी.

हिंदी में करियर के अवसर

– स्कूल, कॉलेज और यूनिवर्सिटी में हिंदी शिक्षक, प्रोफेसर बन सकते हैं.

– रिसर्च करके साहित्य और भाषा अध्ययन में करियर के अवसर.

– हिंदी अखबार, टीवी चैनल, रेडियो, वेब पोर्टल में रिपोर्टर, एंकर, कंटेंट मैनेजर बन सकते हैं.

– कवि, लेखक, नाटककार, उपन्यासकार या साहित्यकार के रूप में पहचान बनायी जा सकती है.

– हिंदी से अंग्रेजी या अन्य भाषाओं में अनुवादक में अवसर.

– सरकारी दफ्तर, प्रकाशन संस्थान जैसी जगहों पर ट्रांसलेटर में अवसर.

– सरकारी नौकरी में राजभाषा अधिकारी, अनुवादक में अवसर.

– विज्ञापन एजेंसी, टीवी फिल्म इंडस्ट्री, ओटीटी प्लेटफॉर्म पर हिंदी कंटेंट क्रिएटर, स्क्रिप्ट राइटर और डायलॉग राइटर में अवसर.

हिंदी में भी करियर विकल्प

विद्यार्थी 10वीं तक हिंदी लेकर पढ़ाई करते हैं. 11वीं में गिरावट देखी जाती है. स्किल विषयों जैसे एआइ, एंटरप्रेन्योरशिप, कंप्यूटर साइंस इंफोर्मेटरव प्रैक्टिस, फाइन आर्ट्स आदि को चुनते हैं. हिंदी को भी चुन सकते हैं. इसमें भी बहुत करियर विकल्प होते हैं.

राजेश पिल्लई, प्रिंसिपल, केरली स्कूल

हिंदी के महत्व बताना होगा

11वीं-12वी में लगभग 50 प्रतिशत विद्यार्थी हिंदी लेकर पढ़ाई कर रहे हैं. छात्रों को इसके मूल्यों को बताना होगा. स्कूल स्तर पर हिंदी प्रतियोगिताओं को बढ़ाना होगा. छात्रों का हिंदी के प्रति रुझान बढ़े.

डॉ रवि प्रकाश तिवारी, प्रिंसिपल, डीएवी नंदराज

ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थी देते हैं तवज्जो

11वीं-12वीं में 95% से ज्यादा विद्यार्थी हिंदी लेकर पढ़ाई कर रहे हैं. ग्रामीण क्षेत्र के बच्चे आते हैं जो हिंदी विषय को तवज्जो देते हैं. हिंदी विषय लेने के लिए प्रेरित किया जाता है. उन्हें आगे करियर विकल्पों के बारे में भी बताया जाता है.

ललन कुमार, प्रिंसिपल, सरस्वती शिशु विद्या मंदिर, धुर्वा

हिंदी में भी करियर का विकल्प

11वीं-12वीं में हिंदी लेने वालों की संख्या में कमी देखी जाती है. विद्यार्थियों को लगता है कि यह विषय लो स्कोरिंग है, लेकिन ऐसा नहीं है. हिंदी में भी अच्छे अंक मिलते हैं. हिंदी में भी ऑब्जेक्टिव सवाल जोड़े गये हैं. इसमें भी करियर बना सकते हैं.

तापस घोष, प्रिंसिपल, एसआर डीएवी पब्लिक स्कूल

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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