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निजी वाहन में 12 घंटे तक पड़ा रहा संक्रमित का शव, अस्पताल के चक्कर में हो गयी मरीज की मौत

Updated at : 31 Jul 2020 3:34 AM (IST)
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निजी वाहन में 12 घंटे तक पड़ा रहा संक्रमित का शव, अस्पताल के चक्कर में हो गयी मरीज की मौत

इलाज के लिए अस्पतालों के चक्कर लगाते-लगाते एक कोरोना संक्रमित की मौत हो गयी.

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कोरोना संक्रमण के भय और लापरवाह सिस्टम की वजह से आम लोगों को परेशानी हो रही है. कोविड-19 से पीड़ित मरीज की मृत्यु हो जाने पर दाह संस्कार की अनुमति भी आसानी से नहीं मिल रही है. बुधवार को इलाज के लिए अस्पतालों के चक्कर लगाते-लगाते एक कोरोना संक्रमित की मौत हो गयी. 12 घंटों के प्रयास के बाद शव को निजी वाहन से उतार कर रिम्स के शीतगृह में रखा जा सका.

क्या है मामला

पिस्कामोड़ के समीप रहनेवाले एक व्यक्ति की तबियत बुधवार को अचानक खराब हो गयी. उसे सांस लेने में परेशानी हो रही थी. परिजन निजी वाहन से लेकर गुरुनानक अस्पताल गए. वहां मरीज की स्थिति देखने के बाद कोविड-19 टेस्ट के लिए सैंपल लिया गया. इसके बाद मरीज को लेकर परिजन घर चले गए. वहां उनकी तबियत फिर खराब होने लगी. इसी दौरान परिजनों को पता चला कि मरीज कोरोना पॉजिटिव है. इसके बाद परिजनों ने प्राइवेट से ऑक्सीजन सिलेंडर की व्यवस्था की और निजी वाहन से मरीज को लेकर दोबारा गुरुनानक अस्पताल गये. लेकिन, अस्पताल प्रबंधन ने मरीज को भर्ती करने से इनकार कर दिया.

मरीज को लेकर परिजन बुधवार रात नौ बजे पारस अस्पताल गये. परिजनों का आरोप है कि पारस अस्पताल के स्वास्थ्यकर्मियों ने मरीज को लगी ऑक्सीजन नली खोल दी. इसके बाद मरीज की हालत गंभीर हो गयी. तब पारस अस्पताल के डॉक्टरों ने मरीज को रिम्स ले जाने को कहा. रिम्स पहुंचने पर मरीज को मृत घोषित कर दिया गया. इसके बाद रिम्स प्रबंधन ने परिजनों से कहा कि मरीज की मौत कोरोना से हुई है, इसलिए दाह संस्कार सरकारी गाइडलाइन व प्रशासनिक अधिकारियों के उपस्थिति में ही होगी. तब तक रात के एक बज गये थे. परिजनों ने डेडबॉडी को रिम्स के शीतगृह में रखने को कहा. इस पर रिम्स के कर्मचारियों ने वाहन से बॉडी उतारने से इनकार कर दिया.

दिन के एक बजे तक निजी वाहन में पड़ा रहा शव: गुरुवार सुबह होने पर परिजनों ने रिम्स प्रबंधन से शव को शीतगृह में रखने का आग्रह किया. काफी मशक्कत के बाद दोपहर करीब एक बजे निजी वाहन से शव को उतारा गया. रिम्स के इंसिडेंट कमांडर सह बड़गाईं सीओ शैलेश कुमार की सहायता से शव को शीतगृह में रखा गया. हालांकि, कोविड-19 पॉजिटिव का सर्टिफिकेट गुरुनानक अस्पताल द्वारा उपलब्ध नहीं कराये जाने की वजह से प्रशासन ने अंतिम संस्कार की अनुमति नहीं दी. परिजनों ने कहा कि अब शुक्रवार को प्रशासन को सर्टिफिकेट देकर अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी कराने का आग्रह करेंगे.

क्या कहते हैं रांची के उपायुक्त

यह पूरी तरह से रिम्स प्रबंधन की जिम्मेवारी है. जब कोई शव वहां पहुंचता है, तो उसे उतार कर रखना चाहिए. इस मामले में रिम्स के पदाधिकारी ही बेहतर जानकारी दे सकते हैं.

कोरोना संक्रमित की मौत के बाद जिम्मेदारी इंसीडेंट कंमाडर की होती है. निजी अस्पताल या अन्य कहीं से भी शव आने पर इंसीडेंट कमांडर को सूचित किया जाता है. शव को रखवाने व उसे डिस्पोज कराने की जिम्मेदारी जिला प्रशासन की है. – डॉ प्रभात कुमार, नोडल अफसर, कोविड

posted by : sameer oraon

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