झारखंडियों ने अमेरिका में बनायी अलग पहचान, न्यू जर्सी में बिजाना के स्वर्ण जयंती समारोह में बोले सुदेश महतो

न्यू जर्सी में बिजाना के स्वर्ण जयंती समारोह में सुदेश महतो के साथ सुपर 30 के आनंद कुमार समेत अन्य
Sudesh Mahto News: आजसू पार्टी प्रमुख सुदेश महतो न्यू जर्सी में बिजाना (बिहार-झारखंड एसोसिएशन ऑफ नार्थ अमेरिका) के स्वर्ण जयंती समारोह में शामिल हुए. उन्होंने कहा कि अमेरिका में भारतीय संस्कृति अक्षुण्ण रखने में प्रवासियों की भूमिका अहम है. प्रवासी झारखंडियों ने अमेरिका में अलग पहचान बनायी है.
Sudesh Mahto News: रांची-झारखंड के पूर्व उपमुख्यमंत्री और आजसू पार्टी प्रमुख सुदेश महतो अमेरिका के न्यू जर्सी में बिहार-झारखंड एसोसिएशन ऑफ नार्थ अमेरिका (बिजाना) के स्वर्ण जयंती समारोह एवं ग्लोबल कॉनक्लेव 2025 में विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए. उन्होंने कहा कि अमेरिका में भारत की सांस्कृतिक विरासत अक्षुण्ण रखने एवं उसकी खुशबू बिखेरने में प्रवासी बिहारी-झारखंडी भाई महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं. यह देखकर खुशी होती है कि झारखंड के लोगों ने अमेरिका में अपनी विशेष पहचान बनाई है.
भारत-अमेरिकी संबंध मजबूत बनाने में प्रवासियों की अहम भूमिका
सुदेश महतो ने कहा कि भारत-अमेरिका संबंध को मजबूत बनाने में प्रवासियों की अहम भूमिका है. दोनों देशों के बीच व्यापार रिकॉर्ड 191 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया, जिससे अमेरिका भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बन गया है. अमेरिकी कंपनियों ने अब भारत में 54 बिलियन डॉलर से ज्यादा का निवेश किया है. उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर की सफलता ने भारत की राजनीतिक और सैन्य प्रतिष्ठा को विश्व पटल पर स्थापित किया है. पाकिस्तान पोषित आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक लड़ाई के लिए भारत कमर कस चुका है.
यूरोप से भी पहुंचे थे प्रवासी भारतीय
प्रवासी भारतीयों की संस्था ’बिजाना’ के दो दिवसीय स्वर्ण जयंती समारोह में भारत और विश्वभर से अनेक नामी-गिरामी हस्तियों ने भाग लिया. बॉलीवड गायक पद्मश्री कैलाश खैर ने अपने सुरों से समां बांधा. विश्व बैंक के ग्लोबल निदेशक सरोज झा, सुपर-30 के संस्थापक आनंद कुमार, आज तक की वरीय संपादक श्वेता सिंह, भोजपुरी फिल्म स्टार अक्षरा सिंह, संगीत निर्देशक विशाख ज्योति, प्रिंसटन विश्वविद्यालय के प्रोफेसर नीरज झा समेत कई हस्तियों ने समारोह को यादगार बनाया. समारोह में अमेरिका के अलावा यूरोप से भी बिहार-झारखंड के प्रवासी भारतीय पहुंचे थे.
1975 में हुई थी बिजाना की स्थापना
बिजाना के अध्यक्ष संजीव सिंह ने कहा कि बिजाना की स्थापना 1975 में की गयी थी. यह बिहार एवं झारखंड की सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित करने, युवा नेतृत्व एवं शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है. बिजाना ने विश्व के साथ भारत के संबंधों एवं छवि को सुधारने की दिशा में एक सफल मंच साबित हुआ है.
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लेखक के बारे में
By Guru Swarup Mishra
मैं गुरुस्वरूप मिश्रा. फिलवक्त डिजिटल मीडिया में कार्यरत. वर्ष 2008 से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से पत्रकारिता की शुरुआत. आकाशवाणी रांची में आकस्मिक समाचार वाचक रहा. प्रिंट मीडिया (हिन्दुस्तान और पंचायतनामा) में फील्ड रिपोर्टिंग की. दैनिक भास्कर के लिए फ्रीलांसिंग. पत्रकारिता में डेढ़ दशक से अधिक का अनुभव. रांची विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एमए. 2020 और 2022 में लाडली मीडिया अवार्ड.
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