ePaper

28 साल बाद मिलते ही मरीज ने डॉक्टर को चूम लिया, जशपुर से जयपुर वाया रांची, ऐसी है स्नेहलता की कहानी

Updated at : 06 Sep 2025 2:35 PM (IST)
विज्ञापन
Story of Snehlata Jashpur Ranchi News

वर्षों बाद रांची आयी स्नेहलता ने आई ट्रांसप्लांट करने वाली अपनी डॉक्टर भारती कश्यप को चूमा.

Story of Snehlata: ये कहानी उस महिला की है, जिसने 28 साल पहले रांची में नेत्र प्रत्यारोपण कराया था. वह अचानक रांची आती है और अपने डॉक्टर के पास पहुंचती है. डॉक्टर से मिलते ही उसे चूम लेती है. डॉक्टर हैरान. ये कौन है? स्नेहलता ने जब अपनी कहानी बतायी, तो डॉक्टर दंपती के चेहरे पर मुस्कान तैर गयी. आप भी पढ़ें नेत्र प्रत्यारोपण ने कैसे स्नेहलता की जिंदगी में भरा रंग.

विज्ञापन

Story of Snehlata: जशपुर की रहने वाली स्नेहलता नेत्र प्रत्यारोपण करवाने के लिए रांची आयी थी. करीब 28-29 साल पहले. शनिवार को वह अचानक नेत्र प्रत्यारोपण करने वाली डॉक्टर से मिलीं और उन्हें चूम लिया. डॉक्टर हैरान रह गयी. स्नेहलता ने उन्हें याद दिलाया कि उनकी वजह से ही वह आज दुनिया को देख रही हैं. उन्होंने ही उनका (स्नेहलता का) कॉर्निया ट्रांसप्लांट किया था, तो डॉक्टर दंपती को भी वो बच्ची याद आ गयी. डॉक्टर से मुलाकात के दौरान स्नेहलता ने कहा कि वह किसकी आंखों से दुनिया देख रही हैं, किसने उनकी जिंदगी में रंग भरे हैं, वह नहीं जानतीं. लेकिन, नेत्रदान करने वाले उस इंसान को शत-शत नमन करतीं हैं.

Story of Snehlata: स्नेहलता ने सुनायी अपनी पूरी कहानी

स्नेहलता ने अपनी पूरी कहानी भी बतायी. कहा कि वह 10 साल की थीं. ट्यूबलाइट जलाकर पढ़ रहीं थीं. इसी दौान आंख में एक कीड़ा चला गया. उन्होंने हाथों से आंखों को मसल दिया. आंखें पूरी तरह से लाल हो गयीं. धीरे-धीरे आंखों की की लालिमा तो चली गयी, लेकिन आंख (कॉर्निया) सफेद हो गयीं. कई डॉक्टर को दिखाया, लेकिन आंख की पुतली की सफेदी नहीं गयी.

आंख की पुतली की वजह से नहीं हो रही थी शादी

स्नेहलता ने बताया कि जशपुर में ही किसी ने बताया कि वर्ष 1996 में रांची (तब संयुक्त बिहार का हिस्सा थी रांची) के कश्यप मेमोरियल आई हॉस्पिटल में डॉ बीपी कश्यप और डॉ भारती कश्यप ने सफल नेत्र प्रत्यारोपण (कॉर्निया ट्रांसप्लांट) किया है. इसके बाद मैं जशपुर (तब मध्यप्रदेश और अब छत्तीसगढ़) से रांची आयीं. इस उम्मीद में कि उनकी आंख की पुतली ठीक हो जायेगी. उन्होंने कहा कि आंख की पुतली की सफेदी की वजह से उनकी शादी नहीं हो पा रही थी. इसलिए इसका इलाज बेहद जरूरी हो गया था.

झारखंड की ताजा खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

कश्यप मेमोरियल आई बैंक में कराया कॉर्निया ट्रांसपलांट

रांची आकर उन्होंने कश्यप मेमोरियल आई बैंक में कॉर्निया ट्रांसप्लांट के लिए अपना पंजीकरण कराया. कुछ महीने बाद आई बैंक से फोन आया कि आंख की पुतली बदलवाने के लिए जल्द से जल्द रांची पहुंचें. जशपुर से रांची आने में साढ़े तीन घंटे से ज्यादा लगते थे. इस दूरी को हमने महज 2 घंटे में तय किया, क्योंकि उस समय 24 घंटे के अंदर कॉर्निया ट्रांसप्लांट करना होता था.

डॉ कश्यप दंपती के साथ स्नेहलता.

नेत्र प्रत्यारोपण ने जिंदगी में भर दिये रंग

उन्होंने कहा कि डॉ बीपी कश्यप और डॉ भारती कश्यप ने मेरी आंख की पुतली बदली और मेरी जिंदगी में रंग भर गये. स्नेहलता आगे बताती हैं कि अगर उनकी आंख की पुतली न बदली गयी होती, तो शायद उनकी शादी भी नहीं हो पाती. कई बार लोग देखने आते थे और आंख की वजह से शादी टल जाती थी. आंख की पुतली इतनी सफेद हो गयी थी कि फोटो में भी स्पष्ट दिखता था.

जशपुर में मायका, जयपुर में ससुराल

स्नेहलता ने कहा कि नेत्र प्रत्यारोपण के बाद मेरा फोटो अच्छा आने लगा. लड़के वाले देखने आये, तो उन्होंने पसंद भी कर लिया. शादी हुई और वह जयपुर चली गयीं. जयपुर में जब भी वह आंखों के डॉक्टर के पास जाती हैं, तो वे कहते हैं कि उनका नेत्र प्रत्यारोपण अच्छे से हुआ है. इसलिए जब वह 5 सितंबर को किसी काम से रांची आयीं, तो उन डॉक्टर्स से मिलना और उनको धन्यवाद कहना नहीं भूलीं, जिन्होंने उनकी जिंदगी किसी और की आंख से रोशन कर दी.

इसे भी पढ़ें

रांची में 7 सितंबर को 7वीं बार ब्लाइंड फोल्डेड रन फॉर विजन, जानें इसकी खूबियां और रिकॉर्ड

Ranchi News : डॉ एसपी मुखर्जी की कहानी है- ‘पांच रुपैया वाला डॉक्टर’

डॉ भारती कश्यप को बड़ी जिम्मेदारी, सर्वाइकल कैंसर उन्मूलन के लिए NHM का ऑफिशियल पार्टनर बना वीमेंस डॉक्टर्स विंग IMA झारखंड

झारखंड राज्य नेत्र सोसाइटी देश में बेस्ट, ऐसे रंग लाई डॉ भारती कश्यप की पहल

विज्ञापन
Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola