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15 अक्टूबर को राज्यव्यापी चक्का जाम का ऐलान, मानसून सत्र में सरना कोड बिल नहीं लाने से नाराज हैं आदिवासी संगठन

Updated at : 25 Sep 2020 5:40 PM (IST)
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15 अक्टूबर को राज्यव्यापी चक्का जाम का ऐलान, मानसून सत्र में सरना कोड बिल नहीं लाने से नाराज हैं आदिवासी संगठन

Jharkhand news, Ranchi news : झारखंड विधानसभा के मानसून सत्र में सरना कोड बिल नहीं लाने से आदिवासी सगंठन के लोग खासे नाराज हैं. आदिवासी संगठन के नेता आज खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं. इसके विरोध में आगामी 15 अक्टूबर को राज्यव्यापी बंद और चक्का जाम का ऐलान किया है. वहीं, सरना कोड लागू नहीं होने से 2021 की जनगणना में आदिवासियों का अस्तित्व खत्म करने का षड़यंत्र रचने का आरोप आदिवासी संगठन के नेता लगा रहे हैं.

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Jharkhand news, Ranchi news : रांची : झारखंड विधानसभा के मानसून सत्र में सरना कोड बिल नहीं लाने से आदिवासी सगंठन के लोग खासे नाराज हैं. आदिवासी संगठन के नेता आज खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं. इसके विरोध में आगामी 15 अक्टूबर को राज्यव्यापी बंद और चक्का जाम का ऐलान किया है. वहीं, सरना कोड लागू नहीं होने से 2021 की जनगणना में आदिवासियों का अस्तित्व खत्म करने का षड़यंत्र रचने का आरोप आदिवासी संगठन के नेता लगा रहे हैं.

शुक्रवार (25 सितंबर, 2020) को केंद्रीय सरना समिति की ओर से आयोजित प्रेस वार्ता में इस बात की जानकारी दी गयी. सरना कोड बिल को लेकर आयोजित इस प्रेस वार्ता में केंद्रीय सरना समिति के केंद्रीय अध्यक्ष फूलचंद तिर्की ने कहा कि सरना कोड आदिवासियों की वर्षों पुरानी मांग है. लंबे समय से आदिवासी अपनी पहचान के लिए संघर्ष कर रहे हैं. 2021 की जनगणना में यदि सरना कोड लागू नहीं होता है, तो आदिवासियों का अस्तित्व खत्म करने का षड़यंत्र रचा जा रहा है. वहीं, आदिवासियों को हिंदू, मुस्लिम, सिख, इसाई एवं अन्य धर्मों में बांट कर उनकी संस्कृति एवं सभ्यता पर हमला किया जायेगा.

उन्होंने हेमंत सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि वर्तमान सरकार सरना कोड बिल मानसून सत्र में पारित कर केंद्र सरकार को भेजने की घोषणा की थी, लेकिन विधानसभा में कोई भी मंत्री या विधायक सरना कोड के बारे में मुंह तक नहीं खोलें. इससे स्पष्ट हो गया है कि सरना कोड राजनीतिक षड्यंत्र का शिकार हो गया. उन्होंने कहा कि आदिवासी अपने हक और अधिकार के लिए जागरूक हो चुके हैं. आदिवासी अपने अधिकार के लिए आर-पार की लड़ाई लड़ेंगे. जब तक धर्म कोड नहीं मिल जाता, तब तक संघर्ष जारी रहेगा.

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महासचिव संजय तिर्की ने कहा कि हेमंत सरकार आदिवासियों को ठगने का काम कर रही है. आदिवासी समुदाय को हेमंत सरकार से काफी उम्मीद थी कि वो मानसून सत्र में सरना कोड बिल सदन में पेश करेंगे. इस संदर्भ में मंत्री रामेश्वर उरांव का भी बयान था कि मानसून सत्र में सरकार सरना धर्म कोड बिल पारित करेगी, लेकिन सदन में किसी भी मंत्री या विधायक ने सरना कोड की बात नहीं की. उन्होंने कहा कि सरना कोड पारित नहीं होने पर आदिवासियों में भारी आक्रोश है. जिसका खामियाजा सरकार को भुगतना पड़ेगा.

प्रेस वार्ता में केंद्रीय सरना समिति के संरक्षक भुनेश्वर लोहरा, उपाध्यक्ष प्रशांत टोप्पो, अखिल भारतीय आदिवासी विकास परिषद के महासचिव सत्यनारायण लकड़ा व प्रदीप लकड़ा, आदिवासी सेना अध्यक्ष शिवा कच्छप, आदिवासी संयुक्त मोर्चा के सचिव बलकू उरांव व निर्मल पहान, रांची जिला सरना समिति के अध्यक्ष अमर तिर्की, रांची महानगर सरना समिति अध्यक्ष विनय उरांव, सचिव सुनील उरांव, केंद्रीय सरना समिति महिला शाखा की अध्यक्ष नीरा टोप्पो, लोहरदगा जिला सरना समिति के अध्यक्ष चैतु उरांव, सचिव कुमार विजय व भगत मुर्मू, सरना समिति के अध्यक्ष सधन उरांव, सूरज तिग्गा, प्रदीप खलखो, अरुण कुजूर, रोशन मुंडा, नितेश उरांव, नरेश पाहन, अमित टोप्पो, मनोज पाहन, विकास उरांव समेत अन्य शामिल थे.

Posted By : Samir Ranjan.

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