श्रीजी रथ पर विराजे, भक्तों ने भजनों की गंगा बहायी

Author Praveen
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श्रीजी रथ पर विराजे, भक्तों ने भजनों की गंगा बहायी

पर्वराज पर्युषण के दसवें दिन शनिवार को अनंत चतुर्दशी के अवसर पर गाजे-बाजे के साथ शोभायात्रा निकली.

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रांची. पर्वराज पर्युषण के दसवें दिन शनिवार को अनंत चतुर्दशी के अवसर पर गाजे-बाजे के साथ शोभायात्रा निकली. भगवान भक्तों को दर्शन देने के लिए मंदिर से बाहर आये और रथारूढ़ होकर आशीर्वाद प्रदान किया. वहीं भक्त जयकारा लगाते हुए रथ के साथ चल रहे थे. यह शोभायात्रा जैन मंदिर से शुरू होकर लेक रोड, राधेश्याम गली, मेन रोड, श्रद्धानंद रोड, मैकी रोड, रातू रोड, वासुपूज्य जिनालय, किशोरी सिंह यादव चौक, हरमू रोड, कार्ट सराय रोड, जेजे रोड से होकर जैन मंदिर पहुंचकर समाप्त हुई. शोभायात्रा के पहले श्रीजी को रथ में विराजमान करने का सौभाग्य विद्या देवी, नितेश कुमार, विकास पाटनी परिवार को मिला. रथ के खजांची बनने का सौभाग्य राजेंद्र कुमार, संजय बड़जात्या परिवार को मिला. सारथी नीरज कुमार विनायक्या परिवार बने. रास्ते भर भक्तों द्वारा भजनों की गंगा बहायी गयी. जगह-जगह पर आरती उतारी गयी. शोभायात्रा का शुभारंभ अनुमंडल अधिकारी उत्कर्ष कुमार, अतिरिक्त जिला न्यायाधीश राजेश्वर आलोक, नगर आरक्षी अधीक्षक अजीत कुमार ने भगवान की आरती उतारकर और नवकार महामंत्र के साथ किया. इसके बाद “आओ जी आओ बाबा आज म्हारे आंगना रांची नगर में चंदा प्रभु का डंका बजा…”, “सारे नगर में एक ही नाम…” सहित अन्य भजन गाये गये, जिस पर भक्त थिरकते रहे. उदित सेठी, हेमंत सेठी, आकाश सेठी, विशाल चूड़ीवाल, आशीष जैन, प्रतीक रारा ने भजनों की प्रस्तुति दी. श्रद्धालु पीले परिधान, धोती और दुपट्टे में थे. महिलाएं पीले रंग की साड़ी में शामिल हुईं. 120 स्थानों पर रंगोली बनायी गयी थी. 12वें तीर्थंकर भगवान वासुपूज्य का मोक्ष कल्याणक निर्वाण लाड़ू अर्पित किया गया. धर्मचंद, पारसमल, अशोक कुमार, नवनीत कुमार, शरद कुमार, नवीन कुमार, अंकित कुमार पाटोदी परिवार ने अपर बाजार जैन मंदिर में तथा धर्मचंद विवेक कुमार पाटनी परिवार, धर्मचंद सुनील कुमार गिरीशजी, प्रतीक रारा परिवार द्वारा वासुपूज्य जिनालय में शांतिधारा की गयी. मौके पर पंडित अंकित जी शास्त्री ने उत्तम ब्रह्मचर्य पर प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि उत्तम ब्रह्मचर्य एक ऐसा व्रत है, जो व्यक्ति के शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक उत्थान का आधार बनता है. यह केवल इंद्रिय संयम ही नहीं, बल्कि विचारों, वाणी और कर्मों की पवित्रता का प्रतीक है. ब्रह्मचर्य के पालन से मन में स्थिरता आती है और बुद्धि तेज होती है. आज की भाग-दौड़ और भौतिकतावादी जीवनशैली में ब्रह्मचर्य की महत्ता और भी बढ़ जाती है, क्योंकि यह आत्मनियंत्रण और संतुलित जीवन जीने की प्रेरणा देता है. हम सभी दशलक्षण धर्म के मार्ग को अपनाकर अपने जीवन को सार्थक बना सकते हैं.

सम्मान समारोह आज

दशलक्षण व्रत धारियों को रविवार को दिगंबर जैन मंदिर में सम्मानित किया जायेगा. उनके सम्मान में सुबह सवा आठ बजे से कार्यक्रम शुरू होगा. इसके समापन के बाद शोभायात्रा के रूप में इन्हें रथ पर विराजमान कर जैन भवन, हरमू रोड ले जाया जायेगा, जहां उनका पारणा होगा.

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