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घूस लेकर नरसिम्हा राव सरकार को बचाने के कारण पूर्व केंद्रीय मंत्री पर चलेगा केस : डॉ निशिकांत दुबे

Updated at : 05 Mar 2024 7:36 AM (IST)
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घूस लेकर नरसिम्हा राव सरकार को बचाने के कारण पूर्व केंद्रीय मंत्री पर चलेगा केस : डॉ निशिकांत दुबे

घूस लेकर नरसिम्हा राव सरकार को बचाने के कारण शिबू सोरेन पर केस चलेगा. सुप्रीम कोर्ट ने आज यह आदेश दिया.

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रिश्वत लेकर संसद में सवाल पूछने या रिश्वत लेकर वोट करने के मामले में सुप्रीम कोर्ट की सात जजों की बेंच के ऐतिहासिक फैसले पर गोड्डा के सांसद डॉ निशिकांत दुबे ने कई ट्वीट किए हैं. उन्होंने कहा है कि घूस लेकर नरसिम्हा राव सरकार को बचाने के कारण शिबू सोरेन पर केस चलेगा. सुप्रीम कोर्ट ने आज यह आदेश दिया. उन्होंने कहा कि तृणमूल कांग्रेस की पूर्व सांसद महुआ मोइत्रा भी जेल जाएंगी.

सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर डॉ निशिकांत ने किया ये ट्वीट

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता और गोड्डा से सांसद डॉ निशिकांत दुबे ने सोशल मीडिया ‘एक्स’ पर यह टिप्पणी तब की, जब सुप्रीम कोर्ट की सात जजों की बेंच ने कहा कि पैसे लेकर सवाल करना तो जहर जैसा है. यह कैंसर की बीमारी के समान है. अगर कोई सांसद या विधायक ऐसा करता है, तो उसे भ्रष्टाचार के मामले से किसी प्रकार की रियायत नहीं मिलेगी. एक सामान्य अपराधी की तरह उनके खिलाफ मुकदमा चलेगा.

महुआ मोइत्रा पर भी साधा निशाना

डॉ निशिकांत दुबे ने पश्चिम बंगाल की सांसद महुआ मोइत्रा पर भी निशाना साधा. उन्होंने कहा कि वोट फॉर नोट केस में फैसले के वक्त सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पैसे लेकर सवाल करना तो जहर जैसा है. यह कैंसर की बीमारी के समान है. काश! तृणमूल कांग्रेस की पूर्व सांसद यह समझतीं. बॉबी ब्राउन, गुस्सी (GUCCI), लुई विटन (Louis Vuitton), हर्म्स ब्रांड (Hermès Brand) आदमी से कुछ भी करवा सकता है.

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तृणमूल की पूर्व सांसद महुआ मोइत्रा भी जाएंगी जेल : निशिकांत दुबे

डॉ दुबे ने सोशल मीडिया साइट पर लिखा कि चंद पैसों के लिए देश की सुरक्षा व संसदीय गरिमा के खिलाफ हीरानंदानी व नवानी की दलाली करने वाली तृणमूल कांग्रेस की पूर्व सांसद भी सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के कारण जेल जाएंगी? ज्ञात को कि सुप्रीम कोर्ट ने सांसदों-विधायकों की रिश्वतखोरी से जुड़े अब तक के अपने तमाम फैसलों को पलट दिया है.

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सामान्य अपराधी की तरह चलेगा सांसदों-विधायकों पर केस

सात जजों की बेंच ने सोमवार (4 मार्च 2024) को कहा कि नरसिम्हा राव केस में आए फैसले को भी रद्द कर दिया, जिसमें सांसदों-विधायकों को ऐसे मामलों में जांच से छूट मिली थी. शीर्ष अदालत ने आज स्पष्ट कर दिया कि अगर कोई विधायक या सांसद पैसा लेकर सवाल पूछता है या वोट डालता है, तो उसके खिलाफ भ्रष्टाचार का मुकदमा चलेगा. पैसे लेकर वोट करना या पैसे लेकर सवाल पूछना लोकतंत्र के लिए जहर के समान है. पैसे लेकर सांसद अगर संसद में कोई काम करते हैं, तो आपके खिलाफ एक सामान्य अपराधी, भ्रष्टाचारी की तरह केस चलेगा.

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद डॉ निशिकांत दुबे ने किया ट्वीट. स्क्रीन शॉट

1998 में नरसिम्हा राव केस के फैसले को भी पलट दिया

सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा कि भ्रष्टाचार के मामले में सांसद या विधायक किसी प्रकार की रियायत नहीं मांग सकते. बेंच ने पीवी नरिसम्हा राव के मामले में वर्ष 1998 में दिए गए अपने उस फैसले को भी बदल दिया, जिसमें वोटिंग के लिए रिश्वत लेने वाले सांसदों को जांच से छूट दे दी गई थी. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इससे संसदीय लोकतंत्र खत्म हो जाएगा.

संसदीय लोकतंत्र के लिए खतरा है सवाल या वोट के बदले पैसे लेना

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले पर पूर्व केंद्रीय मंत्री और सीनियर एडवोकेट अश्विनी उपाध्याय ने कहा कि सात जजों की सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने ऐतिहासिक फैसला दिया है. बेंच ने कहा कि अगर संसद में सवाल पूछने या राज्यसभा चुनावों में मतदान करने के बदले में आप पैसे लेते हैं, तो आप किसी प्रकार की जांच से रियायत के हकदार नहीं हैं. वोट देने या सवाल पूछने के लिए पैसे लेने की परंपरा लोकतंत्र की कार्यप्रणाली को बर्बाद कर देगी.

यहां बताना प्रासंगिक होगा कि झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने एक करोड़ रुपए रिश्वत लेकर नरसिम्हा राव की सरकार बचाई थी. रिश्वतखोरी मामले में शिबू सोरेन के अलावा शैलेंद्र महतो, सूरज मंडल, कृष्णा मार्डी, साइमन मरांडी पर भी आरोप लगे थे. शैलेंद्र महतो बाद में सरकारी गवाह बन गए थे.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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