ePaper

शेख भिखारी और टिकैत उमराव सिंह की दहशत इतनी कि बिना मुकदमा चलाए अंग्रेजों ने चुटूपालू घाटी के पेड़ पर दे दी थी फांसी

Updated at : 08 Jan 2025 5:50 AM (IST)
विज्ञापन
शेख भिखारी और टिकैत उमराव सिंह (बाएं से दाएं)

शेख भिखारी और टिकैत उमराव सिंह (बाएं से दाएं)

अमर शहीद शेख भिखारी और टिकैत उमराव सिंह का आज शहादत दिवस है. 1857 की क्रांति का बिगुल फूंकनेवाले दोनों वीरों को चुटूपालू घाटी के निकट पेड़ पर बिना मुकदमा चलाए अंग्रेजों ने आठ जनवरी 1858 को फांसी दे दी थी.

विज्ञापन

रांची: अमर शहीद शेख भिखारी और टिकैत उमराव सिंह ने अंग्रेजों के खिलाफ क्रांति का बिगुल फूंका था. 1857 में अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह में तात्या टोपे को फांसी की सजा हुई थी. रानी लक्ष्मी बाई युद्ध के मैदान में शहीद हुई थीं. निशान सिंह बंदूक का निशाना बने और कुंवर सिंह गोली खाकर घायल हो गए थे. बहादुर शाह जफर को देश से निकाला गया था और विश्वनाथ शाहदेव, मंगल पांडेय, गणपत राय, शेख भिखारी और टिकैत उमराव सिंह जैसे हजारों वीरों को फांसी दे दी गयी थी. पढ़िए, अखिल झारखंड प्राथमिक शिक्षक संघ के मुख्य प्रवक्ता नसीम अहमद का आलेख.

साधारण परिवार में हुआ था जन्म


अमर शहीद शेख भिखारी का जन्म साधारण परिवार में 1819 में ओरमांझी प्रखंड मुख्यालय से आठ किमी दूर पूर्वी इलाके की कुटे पंचायत के खुदिया लोटवा गांव में और अमर शहीद टिकैत उमराव का पश्चिमी इलाके के खटंगा गांव में जन्म हुआ था. शेख भिखारी की बहादुरी को देखते उन्हें राजा ठाकुर विश्वनाथ के बुलावे पर राजकीय फौज सहित दीवान बनाया गया था.

अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह का नारा बुलंद किया


लार्ड डलहौजी के जुल्म से बेबस होकर शेख भिखारी और राजा टिकैत उमराव ने विद्रोहियों की सहायता की और अपने सहयोगियों तथा शेख होरो अंसारी, अमानत अली और करामत अली अंसारी को विद्रोहियों के पास भेज कर विद्रोह का नारा बुलंद किया. शेख भिखारी ने 1857 में रामगढ़ स्थित अंग्रेजी सेना के हवलदार राम विजय सिंह और नादिर अली को अपने में मिला लिया और रामगढ़ छावनी पर अचानक हमला कर दिया. वहां सफलता मिलते ही चाईबासा की तरफ अपनी सेना के साथ कूच कर वहां के डिप्टी कमिश्नर की हत्या कर दी. उनके कई सहयोगी युद्ध में लड़ते हुए शहीद हो गए थे. इसके बाद वहां से शेख भिखारी संताल परगना की ओर प्रस्थान कर गए थे. तब दुमका में भी भीषण युद्ध हुआ था. फिर दुमका से शेख भिखारी रांची आ गए थे और युद्ध में जीत घोषित होने के उपलक्ष्य में राजा विश्वनाथ शाहदेव ने डोरंडा में एक से सात नवंबर 1857 तक विजय का जश्न मनाया. भारतीयों का यह प्रथम जागरण दिवस था.

चुटूपालू घाटी के पास हुआ था भीषण युद्ध

अंग्रेज निराश होकर दानापुर छावनी से काफी बड़ी संख्या में सेना और अस्त्र-शस्त्र लेकर रामगढ़ की तरफ बढ़े. यहां उनसे लोहा लेने के लिए शेख भिखारी और टिकैत उमराव सिंह ने रामगढ़ जाकर मोर्चाबंदी आरंभ कर दी. वहां अंग्रेजी सेना के पहुंचते ही जमकर जंग हुई. शेख ने अपना अड्डा चुटूपालू घाटी में बनाया था. छह जनवरी 1857 को अंग्रेजी सेना के कमांडर मैकडोनाल्ड ने शेख भिखारी तक पहुंचाने के गुप्त रास्ते का पता लगा लिया. इसके बाद शेख भिखारी को गिरफ्तार कर लिया और उनके साथ टिकैत उमराव सिंह भी पकड़े गये. चुटूपालू घाटी के निकट पेड़ पर बिना मुकदमा चलाए दोनों वीरों को आठ जनवरी 1858 को फांसी दे दी गयी थी.

ये भी पढ़ें: Jharkhand Cabinet: झारखंड में 24 फरवरी से 27 मार्च तक बजट सत्र, हेमंत सोरेन कैबिनेट ने नौ प्रस्तावों पर लगायी मुहर

विज्ञापन
Guru Swarup Mishra

लेखक के बारे में

By Guru Swarup Mishra

मैं गुरुस्वरूप मिश्रा. फिलवक्त डिजिटल मीडिया में कार्यरत. वर्ष 2008 से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से पत्रकारिता की शुरुआत. आकाशवाणी रांची में आकस्मिक समाचार वाचक रहा. प्रिंट मीडिया (हिन्दुस्तान और पंचायतनामा) में फील्ड रिपोर्टिंग की. दैनिक भास्कर के लिए फ्रीलांसिंग. पत्रकारिता में डेढ़ दशक से अधिक का अनुभव. रांची विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एमए. 2020 और 2022 में लाडली मीडिया अवार्ड.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola