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महास्नान के बाद एकांतवास में चले जायेंगे जगन्नाथ स्वामी, 15 दिनों तक नहीं होंगे महाप्रभु के दर्शन

Updated at : 09 Jun 2025 9:56 AM (IST)
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Lord-Jagannath-Rath-Yatra-Ai

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Rath Yatra 2025: रांची स्थित जगन्नाथ मंदिर परिसर में 11 जून को महाप्रभु जगन्नाथ का महास्नान होगा. इसके बाद 15 दिनों के लिए भगवान एकांतवास में चले जायेंगे. इसे अनासार काल भी कहते हैं. इसके बाद रथ यात्रा के एक दिन पूर्व 26 जून को नेत्रोत्सव अनुष्ठान होगा. इसके बाद प्रभु जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा भक्तों को वापस दर्शन देंगे.

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Rath Yatra 2025: राजधानी रांची के धुर्वा स्थित जगन्नाथ मंदिर परिसर से 27 जून को भव्य रथ यात्रा निकलेगी. इसे लेकर तैयारियां जोरों पर है. 11 जून को मंदिर से प्रभु जगन्नाथ की स्नान यात्रा निकाली जायेगी. इस दिन स्नान यात्रा और मंगल आरती के बाद महाप्रभु 15 दिनों के लिए एकांतवास में चलेंगे. इन 15 दिनों तक भक्त जगन्नाथ स्वामी के दर्शन नहीं कर सकेंगे. फिर, 26 जून को नेत्रौत्सव का कार्यक्रम होगा. इसके बाद 27 को प्रभु जगन्नाथ की भव्य रथ यात्रा निकलेगी.

15 दिन क्यों नहीं होंगे महाप्रभु के दर्शन?

Jagannath rath yatra 2025
Jagannath rath yatra 2025

बता दें कि 11 जून को स्नान यात्रा के बाद 15 दिन तक श्रद्धालु महाप्रभु जगन्नाथ के दर्शन नहीं कर पायेंगे. जानकारी के अनुसार, रथयात्रा के पहले प्रभु को महास्नान कराया जाता है, जिसे एक धार्मिक अनुष्ठान माना जाता है. इस दिन जगन्नाथ स्वामी, बलभद्र और देवी सुभद्रा को स्नान मंडप पर लाकर 108 घड़ों से स्नान कराया जाता है. इस दौरान, मूर्तियों को सार्वजनिक दृश्य से दूर रखा जाता है.

ऐसी मान्यता है कि महास्नान के बाद महाप्रभु बीमार हो जाते हैं. इस कारण अगले 15 दिनों तक भक्तों को दर्शन नहीं देते हैं. इस दौरान मंदिर के अणसर गृह में प्रभु जगन्नाथ, बलभद्र व देवी सुभद्रा का जड़ी-बूटियों से इलाज किया जाता है. इस 15 दिनों के समय को ‘अनासारा काल’ भी कहा जाता है

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नेत्रोत्सव का क्या है महत्व?

Rath Yatra
Rath yatra

सूत्रों के मुताबिक, धुर्वा जगन्नाथ मंदिर परिसर में इस साल 26 जून को नेत्रोत्सव कार्यक्रम का आयोजन किया जायेगा. यह कार्यक्रम रथ यात्रा के एक दिन पूर्व होने वाला महत्वपूर्ण धार्मिक अनुष्ठान है. नेत्रोत्सव को “नव यौवन दर्शन” के रूप में भी जाना जाता है. यह अनासरा अवधि के अंत और देवताओं के स्वस्थ होने का प्रतीक माना जाता है.

“नेत्रोत्सव” शब्द का अर्थ है “आंखों का त्योहार”, जो देवताओं के एकांतवास की अवधि के बाद उनकी पहली झलक को दर्शाता है. के दौरान विग्रहों का विशेष रूप से श्रृंगार किया जाता है. विग्रहों को नए कपड़े और आभूषण से सजाया जाता है, जो उनके नए यौवन और जोश का प्रतीक हैं.

क्या दर्शाता है नवयौवन दर्शन?

Jagannath Rath Yatra
Jagannath rath yatra

मालूम हो कि अनासार काल के बाद भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा का पहला सार्वजनिक दर्शन है, ‘नवयौवन दर्शन’. इस शब्द का अर्थ होता है “नया यौवन” यानी जो देवताओं के कायाकल्प और युवा स्वरूप को दर्शाता है. यह अनुष्ठान रथ यात्रा में गहन आध्यात्मिक महत्व रखता है, जो जीवन, मृत्यु और पुनर्जन्म के शाश्वत चक्र का प्रतीक है.

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रथ यात्रा में क्या है महत्व?

Rath Yatra Ranchi
Rath yatra ranchi

नेत्रोत्सव और एकांत वास ‘अनासार काल’ का आध्यात्मिक महत्व है. रथ यात्रा से पूर्व यह अनुष्ठान आयोजन की महत्वपूर्ण प्रस्तावना हैं. यह महाप्रभु जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा को उनकी यात्रा के लिए तैयार करते हैं. इस साल 26 जून को नेत्रोत्सव का कार्यक्रम धुर्वा स्थित जगन्नाथ मंदिर परिसर में मनाया जायेगा. इस दौरान काफी संख्या में भक्त एकांत वास के बाद प्रभु की पहली झलक देखने मंदिर पहुंचेंगे.

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Rupali Das

लेखक के बारे में

By Rupali Das

नमस्कार! मैं रुपाली दास, एक समर्पित पत्रकार हूं. एक साल से अधिक समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं. वर्तमान में प्रभात खबर में कार्यरत हूं. यहां झारखंड राज्य से जुड़े महत्वपूर्ण सामाजिक, राजनीतिक और जन सरोकार के मुद्दों पर आधारित खबरें लिखती हूं. इससे पहले दूरदर्शन, हिंदुस्तान, द फॉलोअप सहित अन्य प्रतिष्ठित समाचार माध्यमों के साथ भी काम करने का अनुभव है.

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