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एक ही पौधे में जमीन के नीचे आलू, ऊपर टमाटर, ये कैसे हुआ?

Updated at : 15 Apr 2025 9:26 AM (IST)
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ranchi news potato tomato in same plant

झारखंड के वैज्ञानिकों ने आलू के पौधे में आलू के साथ-साथ टमाटर भी उगा दिये.

Ranchi News: आलू के पौधे में टमाटर की फसल. सुनकर कोई भी चौंक जायेगा. यकीन मानिए यह सोलह आने सच है. आलू के पौधे में आलू और टमाटर दोनों उगे हैं. ये हम नहीं कह रहे. रांची के कृषि वैज्ञानिक कह रहे हैं. कृषि वैज्ञानिकों ने यह भी बताया कि आखिर यह हुआ कैसे. एक पौधे से कितना आलू निकला और कितने टमाटर निकले जानने के लिए पढ़ें ये रिपोर्ट.

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Ranchi News| रांची, मनोज सिंह : आलू के पौधे में टमाटर की फसल! कभी सुना है आपने! नहीं न. यह सच है. झारखंड की राजधानी रांची के अनगड़ा में ऐसा हुआ है. आलू के पौधे में जमीन के नीचे आलू और ऊपर टमाटर उगे हैं. सही सुना आपने. आलू के पौधे में आलू के साथ-साथ टमाटर भी उगे हैं. आखिर ये कैसे हुआ?

खेती-बारी में हो रहे हैं नये-नये प्रयोग

देश भर में खेती-बारी में नये-नये प्रयोग हो रहे हैं. इस बार एक संस्था ने किसानों के सहयोग से जमीन के नीचे से आलू की उपज ली, तो ऊपर में उसी पौधे पर टमाटर तैयार किया. दोनों एक साथ तैयार किये गये. संस्था का यह प्रयोग सफल रहा. अनगड़ा स्थित मोबाइल एग्रीकल्चरल स्कूल एंड सर्विसेस (मास) के फार्म में यह प्रयोग किया गया. यह प्रयोग दिसंबर 2024 में शुरू हुआ था. दोनों उपज लेने के बाद यह प्रयोग पूरा हो गया.

इस तरह एक ही पौधे से ली 2 फसल

संस्था के सचिव विजय भरत ने बताया कि यह प्रयोग पिछले साल दिसंबर में शुरू हुआ था. पहले आलू के बीज से पौधा तैयार किया गया. 20 दिनों तक आलू को जमीन के नीचे गाड़ने के बाद पौधा तैयार हुआ. इसी तरह टमाटर का पौधा भी अलग तैयार किया गया. आलू का पौधा निकालकर जड़ से करीब दो इंच ऊपर काट दिया गया. इसके साथ टमाटर के पौधे की ग्राफ्टिंग कर दी गयी. इसको 7 दिनों तक अंधेरे में रखा गया. बाद में इसको अलग-अलग जगह पर प्लांट कर दिया गया.

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टमाटर लगाने वाली अनुशंसित दूरी अपनायी गयी

इस पौधे को टमाटर लगाने की दूरी को लेकर जो वैज्ञानिक अनुशंसा है, वह अपनायी गयी. मेद बनाकर पौधे लगाये गये. इसके लिए जो भी खाद और कीटनाशक की जरूरत थी समय-समय पर दी गयी. समय-समय पर जरूरी ट्रीटमेंट किया गया. 40 दिनों के बाद इससे टमाटर निकलना शुरू हो गया. अप्रैल मध्य तक टमाटर निकाले गये. इसके बाद नीचे से आलू निकाला गया. एक पौधे से औसतन 250 से 300 ग्राम आलू तैयार हुआ. इसी पौधे से करीब सात से 10 किलो टमाटर मिले.

2 फसल ले सकते हैं

भरत बताते हैं कि इस बार हमलोगों ने देर से यह प्रयोग शुरू किया था. आलू लगाने का सही समय बरसात होता है. फसल जाड़े में तैयार होती है. अगर सही समय पर प्लांटिंग की जाती, तो एक पौधे में 700 से 800 ग्राम तक आलू निकल सकता है. टमाटर की भी उपज 10 किलो से अधिक तक हो सकती है. खेत में कुल 250 पौधे ग्राफ्टिंग से लगाये गये थे. सभी पौधे जीवित रहे.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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