रांची में 12 फीट से नीचे लगे होर्डिंग-पोस्टर हटेंगे, हाईकोर्ट ने दिया निर्देश
झारखंड हाईकोर्ट की फाइल फोटो.
रांची में सड़क सुरक्षा को लेकर झारखंड हाईकोर्ट सख्त हो गया है. अदालत ने निर्देश दिया है कि सड़क की सतह से 12 फीट से कम ऊंचाई पर लगे सभी विज्ञापन होर्डिंग, पोस्टर और बोर्ड तत्काल हटाए जाएं. यह आदेश वाहन चालकों और राहगीरों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए दिया गया है.
Jharkhand High Court: झारखंड हाइकोर्ट ने राजधानी रांची में सड़क सुरक्षा को लेकर डिवाइडर और स्ट्रीट लाइट पोल पर लगे विज्ञापन होर्डिंग, बोर्ड और पोस्टर पर सख्त रुख अपनाया है. जस्टिस आनंद सेन की अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि सड़क की सतह से 12 फीट से कम ऊंचाई पर लगे सभी विज्ञापन बोर्ड, होर्डिंग और पोस्टर तत्काल हटाये जायें. यदि किसी विज्ञापन बोर्ड को लगाया जाना है, तो उसकी ऊंचाई सड़क की सतह से कम से कम 12 फीट होनी चाहिए. अदालत ने यह निर्देश झारखंड स्टेट आउटडोर एडवरटाइजिंग एसोसिएशन और आरडीएस एडवरटाइजिंग एंड मार्केटिंग ग्रुप की ओर से दायर याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान दिया. अदालत ने मामले में संबंधित प्रतिवादियों को जवाब दाखिल करने का निर्देश देते हुए अगली सुनवाई अगले सप्ताह निर्धारित की है.
सड़क सुरक्षा पर कोर्ट की सख्ती
सुनवाई के दौरान अदालत ने रांची की सड़कों पर लगे विज्ञापन बोर्डों की स्थिति को गंभीरता से देखा. कोर्ट ने माना कि सड़क के बीच डिवाइडर पर लगे स्ट्रीट लाइट पोल में यदि विज्ञापन बोर्ड कम ऊंचाई पर लगाये जाते हैं, तो इससे वाहन चालकों और राहगीरों की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है. अदालत ने रांची नगर निगम को ऐसे सभी विज्ञापन होर्डिंग, बिलबोर्ड और प्लेकार्ड हटाने का निर्देश दिया, जो सड़क की सतह से 12 फीट से कम ऊंचाई पर हैं. कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि विज्ञापन एजेंसियां ऐसे बोर्ड लगाना चाहती हैं, तो उन्हें निर्धारित ऊंचाई का पालन करना होगा.
मां गायत्री ज्वेलर्स के बोर्ड का उदाहरण
सुनवाई के दौरान अदालत ने याचिका के साथ दाखिल तस्वीरों का भी अवलोकन किया. इनमें सड़क किनारे लगे एक बड़े यूनिपोल की स्थिति पर अदालत का ध्यान गया. तस्वीर में मां गायत्री ज्वेलर्स का यूनिपोल सड़क के काफी अंदर तक निकला हुआ दिखाई दे रहा था. उसका एक हिस्सा सड़क के बीच तक पहुंचा हुआ था. अदालत ने डिवाइडर पर लगे स्ट्रीट लाइट पोल पर कम ऊंचाई में विज्ञापन बोर्ड लगे होने की स्थिति को भी देखा. कोर्ट के अनुसार ऐसे बोर्ड इतने नीचे लगाये गये हैं कि सड़क से गुजरने वाले बाइक या दोपहिया वाहन चालकों के उनसे टकराने का खतरा बना रहता है.
कम ऊंचाई के बोर्ड से ब्लाइंड स्पॉट
अदालत ने कहा कि सड़क के बीच डिवाइडर पर लगे बिजली या स्ट्रीट लाइट पोल पर कम ऊंचाई में विज्ञापन बोर्ड लगाना राहगीरों और वाहन चालकों के लिए खतरा पैदा कर सकता है. ऐसे बोर्ड सड़क पर दृश्यता को भी प्रभावित कर सकते हैं और ब्लाइंड स्पॉट बना सकते हैं. विशेष रूप से दोपहिया वाहन चालकों के लिए सड़क किनारे या डिवाइडर पर कम ऊंचाई में लगे बोर्ड दुर्घटना का कारण बन सकते हैं. ऐसे में विज्ञापन लगाने की अनुमति और सड़क सुरक्षा के बीच संतुलन जरूरी है. विज्ञापन आखिर विज्ञापन है, सड़क पर अचानक सामने आ जाने वाला लोहे का झटका नहीं.
निगम को तत्काल हटाने का निर्देश
हाइकोर्ट ने निर्देश दिया कि डिवाइडर पर लगे स्ट्रीट लाइट पोल पर सड़क की सतह से 12 फीट से कम ऊंचाई पर लगे सभी विज्ञापन होर्डिंग, बिलबोर्ड और प्लेकार्ड हटाये जायें. यदि किसी विज्ञापन को रखना है, तो उसे 12 फीट से अधिक ऊंचाई पर लगाया जाये. अदालत ने इस संबंध में रांची नगर निगम को विस्तृत शपथ पत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है. अगली सुनवाई अगले सप्ताह होगी. उस दौरान निगम की ओर से अब तक की गयी कार्रवाई और विज्ञापन बोर्डों की स्थिति को लेकर विस्तृत जानकारी अदालत के समक्ष रखी जायेगी.
विज्ञापन एजेंसियों ने उठाया सवाल
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत में कहा गया कि नगर निगम को कम से कम यह स्पष्ट करना चाहिए कि कौन-कौन से होर्डिंग वास्तव में खतरा पैदा कर रहे हैं. याचिकाकर्ताओं का कहना था कि सभी विज्ञापन होर्डिंग को एक समान तरीके से खतरनाक नहीं माना जा सकता. विज्ञापन एजेंसियों ने रांची नगर निगम की ओर से होर्डिंग, मोनोपोल और यूनिपोल हटाने के आदेश को चुनौती देते हुए हाइकोर्ट का रुख किया है. उनका तर्क है कि यदि किसी विशेष होर्डिंग से खतरा है, तो उसकी पहचान की जानी चाहिए और उसी के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए.
निगम ने बताया, ध्यान भटकाते हैं विज्ञापन
रांची नगर निगम की ओर से अदालत को बताया गया कि मोनोपोल, यूनिपोल, विज्ञापन होर्डिंग, बिलबोर्ड और प्लेकार्ड वाहन चालकों का ध्यान भटका सकते हैं. सड़क पर वाहन चलाते समय यदि चालक का ध्यान विज्ञापन की ओर जाता है, तो दुर्घटना की आशंका बढ़ सकती है. निगम ने कहा कि ऐसे विज्ञापन बोर्ड सड़क सुरक्षा के लिए चुनौती बन सकते हैं. इससे दुर्घटना होने के साथ-साथ लोगों के घायल होने और जान जाने का भी खतरा रहता है. निगम की ओर से मामले में विस्तृत जवाब दाखिल करने के लिए अदालत से समय मांगा गया.
सभी होर्डिंग हटाने के आदेश को दी गयी है चुनौती
मामले की पृष्ठभूमि में विज्ञापन एजेंसियों की ओर से दायर याचिकाएं महत्वपूर्ण हैं. प्रार्थियों ने रांची नगर निगम के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें सभी विज्ञापन एजेंसियों को होर्डिंग, मोनोपोल और यूनिपोल हटाने का निर्देश दिया गया था. याचिकाकर्ताओं का कहना है कि सभी विज्ञापन संरचनाओं को एक ही श्रेणी में रखकर कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए. वहीं नगर निगम सड़क सुरक्षा और वाहन चालकों का ध्यान भटकने से होने वाली दुर्घटनाओं को आधार बना रहा है.
इसे भी पढ़ें: बेटी ने कर लिया लव मैरिज तो पिता ने जीते जी कर दिया पिंडदान, पूरा इलाका है अचंभित
अगली सुनवाई में स्पष्ट होगी आगे की तस्वीर
फिलहाल हाइकोर्ट ने 12 फीट की ऊंचाई को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश देते हुए कम ऊंचाई पर लगे विज्ञापन बोर्ड हटाने को कहा है. अब नगर निगम को कार्रवाई की जानकारी और अपना विस्तृत शपथ पत्र अदालत में दाखिल करना होगा. अगले सप्ताह होने वाली सुनवाई में अदालत यह भी देख सकती है कि निगम ने निर्देश के अनुरूप क्या कार्रवाई की है और विज्ञापन एजेंसियों की ओर से उठाये गये सवालों पर उसका क्या जवाब है. फिलहाल रांची की सड़कों पर विज्ञापन लगाने वालों के लिए संदेश साफ है, प्रचार जरूरी हो सकता है, लेकिन सड़क सुरक्षा से ऊपर नहीं.
इसे भी पढ़ें: खनिज बिल: झारखंड कांग्रेस अध्यक्ष ने केंद्र पर साधा निशाना, बोले- कॉरपोरेट को फायदा पहुंचाने की साजिश
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए









