Ranchi: 29 वर्षों से पर्यावरण संरक्षण के लिए पौधारोपण कर रहे हैं राखोहरि महतो, उगा चुके अपना जंगल

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अपने जंगल में खड़े राखोहरि महतो.

Ranchi: बुंडू के राखोहरि महतो ने पर्यावरण संरक्षण को अपना मिशन बना लिया है. पिछले 29 वर्षों से लगातार पौधारोपण कर उन्होंने एक बंजर क्षेत्र को हरे-भरे जंगल में बदल दिया है, जो लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गया है. पूरी रिपोर्ट नीचे पढ़ें…

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आनंद राम महतो
Ranchi (बुंडू): आज जब पूरी दुनिया जलवायु परिवर्तन, बढ़ते प्रदूषण और पर्यावरण संकट जैसी गंभीर समस्याओं से जूझ रही है, ऐसे समय में झारखंड के ग्रामीण क्षेत्र से एक प्रेरणादायक उदाहरण सामने आया है. रांची जिला के बुंडू अनुमंडल के राहे प्रखंड अंतर्गत ग्राम कदमडीह, पो लोवाहातु निवासी राखोहरि महतो पिछले लगभग 35 वर्षों से लगातार वृक्षारोपण और पर्यावरण संरक्षण का कार्य करते आ रहे हैं. उन्होंने वर्ष 1991 से अब तक अपने जीवनकाल में लगभग 10 हजार से अधिक पेड़ लगाकर एक अनूठा उदाहरण प्रस्तुत किया है.

खुद करते हैं पेड़ों की रखवाली

उन्होंने न केवल पेड़ लगाए, बल्कि वर्षों तक उनकी देखभाल, सुरक्षा और संरक्षण भी किया, जिसके कारण आज वे पौधे विशाल वृक्षों का रूप ले चुके हैं. राखोहरि महतो ने बताया कि उनके परिवार की जमीन, जिसका खाता नंबर 167, प्लॉट नंबर 443 तथा रकबा लगभग 4 एकड़ है, उसपर उनके पिताजी स्व चैता महतो खेती किया करते थे, लेकिन पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य से उन्होंने पूरी जमीन को हरित क्षेत्र में बदल दिया और वहां विभिन्न प्रकार के फलदार, छायादार एवं औषधीय वृक्ष लगाए.

कई तरह के लगे हैं पेड़

इस भूमि पर कुसुम, सालगा, नीम, बरगद, गम्हार, जामुन, आम, करम, डुमर, पाकड़, चापुत, सिमर, काऊज, पलास, सीसम, बेर, पोजो, डेला सहित अनेक प्रजातियों के हजारों वृक्ष आज प्राकृतिक वन का रूप ले चुके हैं. यह क्षेत्र अब पक्षियों, छोटे जीव-जंतुओं और जैव विविधता के लिए सुरक्षित आश्रय स्थल बन गया है. राखोहरि महतो प्रतिदिन स्वयं इन वृक्षों की देखभाल करते हैं. वे वर्षों से बिना किसी सरकारी सहायता या निजी लाभ की इच्छा के पर्यावरण संरक्षण के इस कार्य में समर्पित भाव से लगे हुए हैं.

पेड़ ही है जीवन

उनका मानना है कि पेड़ ही जीवन है और आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित भविष्य देने के लिए वृक्षारोपण सबसे बड़ा धर्म है. स्थानीय निवासी पीपीके कॉलेज बुंडू के टीआरएल विभागाध्यक्ष प्रो भूतनाथ प्रमाणिक का कहना है कि राखोहरि महतो का यह प्रयास समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत है.जहां लोग जंगलों की कटाई कर रहे हैं, वहीं उन्होंने अपनी निजी जमीन को हरियाली से भरकर पर्यावरण संरक्षण की मिसाल कायम की है. पर्यावरणविदों के अनुसार, यदि समाज का हर व्यक्ति राखोहरि महतो की तरह प्रकृति संरक्षण के प्रति जिम्मेदारी निभाए, तो जलवायु परिवर्तन और प्रदूषण जैसी समस्याओं से काफी हद तक निपटा जा सकता है.

स्थानीय ग्रामीणों ने राज्य सरकार से मांग की है कि राखोहरि महतो के इस लंबे और प्रेरणादायक पर्यावरणीय योगदान को सम्मानित किया जाए, ताकि समाज में वृक्षारोपण और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़े.

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अमलेश नंदन सिन्हा

लेखक के बारे में

By अमलेश नंदन सिन्हा

अमलेश नंदन सिन्हा प्रभात खबर डिजिटल में वरिष्ठ पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता में 20 से अधिक वर्षों का अनुभव है. रांची विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई करने के बाद से इन्होंने कई समाचार पत्रों के साथ काम किया. इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत रांची एक्सप्रेस से की, जो अपने समय में झारखंड के विश्वसनीय अखबारों में से एक था. एक दशक से ज्यादा समय से ये डिजिटल के लिए काम कर रहे हैं. झारखंड की खबरों के अलावा, समसामयिक विषयों के बारे में भी लिखने में रुचि रखते हैं. विज्ञान और आधुनिक चिकित्सा के बारे में देखना, पढ़ना और नई जानकारियां प्राप्त करना इन्हें पसंद है.

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