झारखंड विधानसभा के नवनियुक्त सभापतियों को स्पीकर का 'गुरुमंत्र', समस्याओं के तुरंत निष्पादन का लक्ष्य

नवनियुक्त सभापतियों के साथ बैठक करते स्पीकर रबींद्र नाथ महतो
Rabindra Nath Mahto: झारखंड विधानसभा के स्पीकर रबींद्र नाथ महतो ने नवनियुक्त सभापतियों को संबोधित करते हुए लोकतांत्रिक व्यवस्था में समितियों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया है. उन्होंने निर्देश दिया कि समितियां जिलों में जाकर जनसरोकार के मुद्दों की समीक्षा करें और सरकार इन रिपोर्टों के आधार पर अहम निर्णय लें.
Rabindra Nath Mahto, रांची (आनंद मोहन की रिपोर्ट): झारखंड विधानसभा के अध्यक्ष रबींद्र नाथ महतो ने स्पष्ट किया है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने में विधानसभा समितियों की भूमिका अत्यंत निर्णायक होती है. विधानसभा के सेंट्रल हॉल में आयोजित नवनियुक्त सभापतियों के संबोधन कार्यक्रम में स्पीकर ने कहा कि इन समितियों में सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों के सदस्य दलगत राजनीति से ऊपर उठकर जनहित के मुद्दों पर कार्य करते हैं. उन्होंने रेखांकित किया कि समितियों द्वारा प्रस्तुत की जाने वाली रिपोर्ट के आधार पर ही सरकार राज्य के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण निर्णय लेती है. इसलिए, समितियों की कार्यक्षमता और उनकी सक्रियता को और अधिक मजबूत किया जाना समय की मांग है.
नियमित बैठकें और जिला स्तर पर समीक्षा का निर्देश
स्पीकर रबींद्र नाथ महतो ने सभापतियों से सीधा संवाद करते हुए निर्देश दिया कि समितियों की बैठकें मात्र औपचारिकता न रहकर नियमित रूप से आयोजित की जानी चाहिए. उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि समितियों को केवल मुख्यालय तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि जिलों का दौरा कर जनसरोकार से जुड़े जमीनी मुद्दों की वास्तविक समीक्षा करनी चाहिए. स्पीकर के अनुसार, जब समितियां धरातल पर जाकर समस्याओं का आकलन करेंगी, तभी समस्याओं के त्वरित और स्थायी समाधान के मार्ग प्रशस्त होंगे. उन्होंने सभापतियों को जनकल्याण के मुद्दों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का आह्वान किया.
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अधिकारियों की जवाबदेही और अनुपालन की अनिवार्यता
बैठक के दौरान स्पीकर ने शासन और प्रशासन के बीच समन्वय पर भी कड़ा रुख अपनाया. उन्होंने मुख्य सचिव सहित विभिन्न विभागों के अपर मुख्य सचिवों और अन्य वरीय अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे विभागवार समितियों की बैठकों में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहें. उन्होंने सख्त लहजे में कहा कि समितियों द्वारा दिए गए निर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित करना अधिकारियों की जिम्मेदारी है. समस्याओं के निष्पादन में किसी भी प्रकार की शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी. विधानसभा की गरिमा और समितियों के प्रभाव को बनाए रखने के लिए प्रशासनिक सहयोग अनिवार्य है.
समन्वय और निष्पादन की नई कार्यसंस्कृति
इस महत्वपूर्ण बैठक में विधानसभा समितियों के नवनियुक्त सभापतियों के अतिरिक्त मुख्य सचिव, विभिन्न विभागों के सचिव, महालेखाकार और विधानसभा के वरिष्ठ अधिकारी सम्मिलित हुए. बैठक का मुख्य उद्देश्य विधायी कार्यप्रणाली को और अधिक पारदर्शी और परिणामोन्मुखी बनाना था. स्पीकर ने विश्वास जताया कि नवनियुक्त सभापति अपनी ऊर्जा और अनुभव का उपयोग कर राज्य के विकास में मील का पत्थर साबित होंगे. समितियों और कार्यपालिका के बीच बेहतर तालमेल से न केवल पेंडेंसी कम होगी, बल्कि जनता का लोकतंत्र के प्रति विश्वास भी और अधिक प्रगाढ़ होगा.
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By Sameer Oraon
इंटरनेशनल स्कूल ऑफ बिजनेस एंड मीडिया से बीबीए मीडिया में ग्रेजुएट होने के बाद साल 2019 में भारतीय जनसंचार संस्थान दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. 5 साल से अधिक समय से प्रभात खबर में डिजिटल पत्रकार के रूप में कार्यरत हूं. इससे पहले डेली हंट में बतौर प्रूफ रीडर एसोसिएट के रूप में काम किया. झारखंड के सभी समसामयिक मुद्दे खासकर राजनीति, लाइफ स्टाइल, हेल्थ से जुड़े विषयों पर लिखने और पढ़ने में गहरी रुचि है. तीन साल से अधिक समय से झारखंड डेस्क पर काम कर रहा हूं. फिर लंबे समय तक लाइफ स्टाइल के क्षेत्र में भी काम किया हूं. इसके अलावा स्पोर्ट्स में भी गहरी रुचि है.
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