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श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के पहले प्रकाश पर्व पर सजा विशेष दीवान, शबद गायन और कथावाचन से निहाल हुए साध संगत

Updated at : 24 Aug 2025 6:36 PM (IST)
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Prakash Parv 2025 Ranchi

श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के पहले प्रकाश पर्व पर सजा विशेष दीवान

Prakash Parv 2025: रांची की कृष्णा नगर कॉलोनी स्थित गुरुद्वारा साहिब में श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का पहला प्रकाश पर्व धूमधाम से मनाया गया. शबद गायन एवं कथावाचन से साध संगत निहाल हुए. मौके पर विशेष दीवान सजाया गया. गुरुद्वारा के हेड ग्रंथी ज्ञानी जिवेंदर सिंह ने साध संगत से गुरमत विचार साझा करते हुए गुरु ग्रंथ साहिब जी के पहले प्रकाश पर्व की जानकारी दी. इस मौके पर गुरुनानक सत्संग सभा द्वारा गुरु का अटूट लंगर चलाया गया.

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Prakash Parv 2025: रांची-गुरुद्वारा श्री गुरु नानक सत्संग सभा द्वारा कृष्णा नगर कॉलोनी स्थित गुरुद्वारा साहिब में रविवार को धन-धन श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का पहला प्रकाश पर्व मनाया गया. इस उपलक्ष्य में सजाए गए विशेष दीवान की शुरुआत सुबह 7:40 बजे हजूरी रागी जत्था भाई महिपाल सिंह द्वारा आसा दी वार कीर्तन से हुई. इस दीवान में विशेष रूप से शिरकत करने पहुंच रहे सिख पंथ के प्रसिद्ध रागी जत्था भाई सुखप्रीत सिंह (लखनऊवाले) ने सुबह 9 बजे से 10:45 बजे तक गुर राम दास राखो शरनाई…एवं संता के कारज आप खलोंया हर कम करावन आया राम…तथा सो सतगुर प्यारा मेरे नाल है.. एवं हम बैठे तुम देहो असीसां..जैसे कई शबद कीर्तन कर साध संगत को निहाल किया. श्री आनंद साहिब जी के पाठ, अरदास, हुकुमनामा एवं कढ़ाह प्रसाद वितरण के साथ दीवान की समाप्ति सुबह 11:00 बजे हुई

साध संगत से साझा किए गुरमत विचार


गुरुद्वारा के हेड ग्रंथी ज्ञानी जिवेंदर सिंह ने साध संगत से गुरमत विचार साझा करते हुए गुरु ग्रंथ साहिब जी के पहले प्रकाश पर्व के बारे विस्तार से जानकारी दी. उन्होंने साध संगत को बताया कि गुरुनानक देव जी से लेकर गुरु राम दास जी की वाणी श्री पोथी साहिब में लिखी जाती थी और वो पोथी गोइंदवाल साहिब(गुरु अर्जुन देव जी का ननिहाल) के बाबा मोहन सिंह के पास थी. गुरु अर्जुन देव जी इस पोथी साहिब को अमृतसर ले आए और चंवर से इसकी सेवा करते रहे. 1602 में गुरु अर्जुन देव जी ने रामसर साहिब में श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की रचना शुरू की. इसमें गुरु अर्जुन देव जी बोलते थे और भाई गुरदास जी लिखते थे. 1604 में श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का पहला प्रकाश हुआ और पहला प्रकाश बाबा बुड्ढा जी ने किया. उस समय श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी में 974 अंग(पृष्ठ) थे और उसमें पांच गुरुओं की वाणी थी. श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का पहला हुक्मनामा था ‘ संता के कारज आप खलोंया हर कम करावन आया राम’.

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श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का स्वरूप ऐसे हुआ तैयार


श्री गुरु गोविंद सिंह जी ने दमदमा साहिब में अन्य पांच गुरुओं की वाणी को संकलित कर इसका संपादन किया. इस क्रम में उन्होंने वाणी का उच्चारण किया और भाई मनी सिंह जी ने उन वाणीयों को लिखा. अंततः कुल 1430 अंग (पृष्ठ) का श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का स्वरूप तैयार हुआ. इसके संपादन में नौ महीने, नौ दिन और नौ घड़ियां लगी.

गुरु घर का सारोपा देकर किया सम्मानित


इस मौके पर गुरुनानक सत्संग सभा द्वारा गुरु का अटूट लंगर चलाया गया. सत्संग सभा के प्रधान अर्जुन देव मिढ़ा एवं सचिव सुरेश मिढ़ा ने भाई सुखप्रीत सिंह जी एवं साथियों को गुरु घर का सारोपा देकर सम्मानित किया. प्रकाश पर्व में सहयोग के लिए विनोद मालाकार और गुड्डू साउंड को गुरु घर का सारोपा देकर नवाजा गया. कार्यक्रम का संचालन मनीष मिढ़ा ने किया.

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Guru Swarup Mishra

लेखक के बारे में

By Guru Swarup Mishra

मैं गुरुस्वरूप मिश्रा. फिलवक्त डिजिटल मीडिया में कार्यरत. वर्ष 2008 से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से पत्रकारिता की शुरुआत. आकाशवाणी रांची में आकस्मिक समाचार वाचक रहा. प्रिंट मीडिया (हिन्दुस्तान और पंचायतनामा) में फील्ड रिपोर्टिंग की. दैनिक भास्कर के लिए फ्रीलांसिंग. पत्रकारिता में डेढ़ दशक से अधिक का अनुभव. रांची विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एमए. 2020 और 2022 में लाडली मीडिया अवार्ड.

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