रांची में प्रतिभाशाली बच्चों को प्रभात खबर ने किया सम्मानित, मेडल-सर्टिफिकेट पाकर खिले बच्चों के चेहरे

Updated at : 19 Jun 2023 8:30 PM (IST)
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रांची में प्रतिभाशाली बच्चों को प्रभात खबर ने किया सम्मानित, मेडल-सर्टिफिकेट पाकर खिले बच्चों के चेहरे

बोर्ड के परिणाम बच्चाें के प्रदर्शन को साझा करती है. अब ज्यादातर बच्चे 90% से अधिक अंक हासिल कर रहे हैं. यह बच्चे देश का भविष्य है. शिक्षा और रोजगार आपस में जुड़ी हुई है. अच्छी शिक्षा रोजगार की संभावना को बढ़ाती है. बावजूद इसके हिंदी पट्टी के राज्यों में शिक्षा व्यवस्था को तवज्जोह नहीं दिया जाता.

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खुशियों से चमकते चेहरे, उत्साह और भविष्य संवारने की ललक लेकर रविवार को राजधानी के होनहार छात्र- छात्रा गुरुनाननक स्कूल ऑडिटोरियम पहुंचे थे. प्रभात खबर राजधानी के प्रतिभावन छात्रों को सम्मानित करने के लिए समारोह आयोजित किया था.

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इस भव्य समारोह में उज्ज्वल भविष्य के जज्बे के साथ पहुंचे बच्चे के परिजन के आंखों में खुशियां छलक रही थीं. सम्मान पाकर बच्चे अह्ललादित और प्रेरित थे.

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इस सम्मान समारोह में सत्र 2022-23 में जैक, सीबीएसइ और आईसीएसई बोर्ड परीक्षा 10वीं व 12वीं में टॉपर व मेधावी चार हजार से अधिक विद्यार्थियों को प्रभात खबर सम्मान समारोह में बच्चों को सम्मानित किया.

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मौके पर मुख्य अतिथि वित्त मंत्री डॉ रामेश्वर उरांव ने कहा कि बच्चों घर से ही अपनी इतिहास सर्वप्रथम सीखे. बच्चे अपने पूर्वजों को जानेंगे, बुनियादी चीजों से जानेंगे तभी परिवार, समाज सुधरेगा.

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स्कूलों में प्रार्थना होती है लेकिन छात्रों को समाचार नहीं सुनाया जाता है. छात्रों को देश-विदेश में हो रही गतिविधियों के बारे में जानने की जरूरत है. जिससे बच्चे अपडेट रहेंगे. बच्चों को संविधान अवश्य पढ़ना चाहिए.

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इससे देश, समाज सुधरेगा. बराबरी आयेगी, लोगों के बीच भाईचारा आयेगा. उन्होंने कहा कि बच्चों को अन्य भाषाओं के साथ-साथ अपनी मातृभाषा हिंदी अवश्य सीखाये. काफी जद्दोजहद के बाद हिंदी राष्ट्रभाषा बनी.

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इसके लिए तीन बार संसद में वोटिंग हुई. साउथ वाले अंग्रेजी व नार्थ वाले हिंदी राष्ट्रभाषा हो इसके लिए मातदान किये. तीसरी बार में दोनों टाई हो गया. पूर्व राष्ट्रपति ने कास्टिंग वोट देकर हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाया.

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यह जरूरी नहीं है कि अभी कम नंबर आया तो आगे भी कम आयेगा. स्कूल देखे कि अगर बच्चे में टैलेंट है तो उसे आगे बढ़ाये. बच्चों के अभिभावक बच्चों को पूरा सहयोग करें. उनके प्रतिभा के अनुसार निखारने का प्रयास करें.

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पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री मिथिलेश ठाकुर ने कहा कि प्रभात खबर की ओर से प्रतिभा सम्मान समारोह निरंतर कई वर्षों से हो रहा है. रांची के सभी जिलों में इसका आयोजन होता है. लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के रूप में जो भूमिका होनी चाहिए उसका बखूबी निर्वहन प्रभात खबर कर रहा है.

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उन्होंने कहा कि शिक्षा से ही भारत विश्व शक्ति बन सकता है. दृढ़ इच्छा शक्ति के साथ बच्चे आगे बढ़े. किसी एक कक्षा में कम अंक लाने से नहीं घबराये. सरकार शिक्षा के क्षेत्र में झारखंड को अग्राणी राज्य बनाने के लिए अनेक कदम उठा रहे हैं. जिसके दूरगामी परिणाम दिखेंगे.

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ग्रामीण क्षेत्र के बच्चे अच्छे स्कूलों में शिक्षा नहीं ग्रहण कर पाते थे. सभी 24 जिलों में 80 सरकारी स्कूलों में सीबीएसई पैटर्न पर पढ़ाई होगी. इसके लिए शिक्षकों को प्रशिक्षत किया जायेगा. आज प्रतियोगिता अंक में नहीं प्वाइंट में हो रहा है.

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जिस क्षेत्र में जाना चाहे कोई भी लक्ष्य अगर ठान ले जो मुश्किल नहीं होता है. अपनी क्षमता का पूरा प्रयोग करते है तो सफलता जरूर मिलेगी. अपने अंदर सकारात्मक सोच रखे. ठान ले कि कुछ भी मुश्किल नहीं है तो सभी क्षेत्र में सफल हो सकते हैं.

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अभिभावक बच्चों को सिर्फ पढ़ाई पर नहीं अन्य गतिविधियों के लिए प्रेरित करे. इससे बच्चों को सर्वांगीण विकास होगा. बच्चे टाइम मैनेजमेंट करें. बच्चों पर दवाब नहीं बनायें और उनकी प्रतिभा के अनुसार निखारें.

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छात्र खुल कर अपने अभिभावक के समक्ष अपनी बातों को रखें. बच्चे देश के भविष्य हैं. यह संकल्प ले कि हम जो क्षेत्र में जाये उसमें सफल होंगे. छात्र व्यक्तिगत स्वार्थ को परे रख कर कार्य करें. ज्ञान को बांटें और दूसरों को भी शिक्षित करें.

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प्रभात खबर के प्रधान संपादक आशुतोष चतुर्वेदी ने कहा कि बोर्ड के परिणाम बच्चाें के प्रदर्शन को साझा करती है. अब ज्यादातर बच्चे 90% से अधिक अंक हासिल कर रहे हैं. यह बच्चे देश का भविष्य है. शिक्षा और रोजगार आपस में जुड़ी हुई है. अच्छी शिक्षा रोजगार की संभावना को बढ़ाती है. बावजूद इसके हिंदी पट्टी के राज्यों में शिक्षा व्यवस्था को तवज्जोह नहीं दिया जाता.

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आज भी राज्य के विद्यार्थी एक समय के बाद बेहतर शिक्षा के लिए दक्षिण भारत की ओर पलायन कर रहे हैं. जिला के विद्यालयों को बेहतर बनाना होगा. अभिभावक अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा बच्चों की पढ़ाई पर खर्च करते हैं. बच्चों को इसे जिम्मेदारी के रूप में लेना होगा. समय की बर्बादी न हो इसके लिए सोच-समझ कर नियंत्रित रूप से तकनीक का इस्तेमाल करना होगा.

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प्रभात खबर के कार्यकारी निदेशक आरके दत्ता ने कहा कि 2004 से संस्था बच्चों की प्रतिभा को सम्मानित करता आ रहा है. इसका उद्देश्य जिला व प्रखंड के सुदूरवर्ती इलाके के बच्चों को सम्मानित करना है. जिससे वे प्रेरित होकर जीवन में बेहतर मुकाम हासिल कर सकें. बच्चे यह कभी न सोचे की कोई भी काम असंभव है. लगन और कठिन परिश्रम से प्रत्येक काम को संभव बनाया जा सकता है.

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आज के समय में डॉक्टर, इंजीनियर, यूपीएससी या आर्मी ही एकमात्र जीवन के रोजगार विकल्प नहीं है. समाज में हुए शैक्षणिक विकास से सैकड़ों रोजगार के अवसर तैयार हुए हैं. विद्यार्थियों को अपनी रुचि के अनुसार जीवन के लक्ष्य को तय करना होगा. डिजिटल दुनिया बच्चों के जीवन में तेजी से हावी हो रही है. इन सभी के बीच बेहतर स्वस्थ्य के लिए आधे घंटे का समय बेहतर स्वास्थ्य के लिए निकालना होगा.

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एमेटी यूनिवर्सिटी के निदेशक इंजीनियरिंग विभाग विकास मिश्रा ने कहा कि बच्चों की सफलता अभिभावकों के योगदान और त्याग को दर्शाती है. 10वीं और 12वीं के बाद अक्सर विद्यार्थी कैरियर विकल्प को लेकर चिंतित रहते हैं. ऐसे में उस कोर्स का चयन करें, जिसमें अवसर और बेहतर कैरियर हो. इसके लिए उच्च शिक्षा को हासिल करने के लिए संस्था का चयन महत्वपूर्ण है. विद्यार्थी कोर्स से जुड़ने से पहले संबंधित संस्थान का अवलोकन करें, पर्याप्त संसाधन होने पर ही उसमें नामांकन लें.

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वर्तमान समय में इंडस्ट्री रेडी प्रोफेशनल कोर्स की मांग बढ़ी है. इसके लिए कम खर्च में कैसे बेहतर प्रशिक्षण हासिल किया जा सकता है, पर ध्यान दें. विद्यार्थी जितना स्किल्ड होंगे उनके प्लेसमेंट की संभावना उतनी ही मजबूत होगी. शैक्षणिक विषय के साथ-साथ एक फॉरेन लैंगवेज कोर्स को अपनाये. इससे बड़े अवसर को हासिल करने में मदद मिलेगी.

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इक्फाइ विवि के वीसी प्रो रमन कुमार झा ने कहा कि राज्य में बीते 12 वर्षों में कई शैक्षणिक संस्थाएं स्थापित हुई. इससे शैक्षणिक बदलाव हुआ है. बावजूद इसके राज्य के विद्यार्थी दूसरें राज्यों में पलायन कर रहे हैं. विद्यार्थियों को यह समझने की जरूरत है कि उनके आस-पास के संस्थानों में जो कोर्स मौजूद है. उनमें कैसे अपनी जगह बना सकते हैं.

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संस्थान की सुविधाएं विद्यार्थियों को अवसर दे सकती है, पर स्थापित होने की जिम्मेदारी छात्र-छात्राओं की है. विद्यार्थियों को हमेशा अपनी परेशानी का हल स्वत: तलाशने में विश्वास करना चाहिए. इससे पेशेवर मूल्यों के साथ तरक्की करना संभव होगा. पेशेवर मूल्य तैयार करने के लिए खुद पर विश्वास रखने और आत्मविश्वास बनाये रखने की जरूरी है. इसके लिए विद्यार्थी को अनंत शिक्षा का भागीदार बने रहना होगा.

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आयोजन के मौके पर आइआइएम रांची के निदेशक प्रो दीपक श्रीवास्तव ने कहा कि वर्तमान समय में हर पेशे में प्रतियोगिता बढ़ी है. ऐसे में उच्च शिक्षा हासिल कर प्रतियोगिता के अनुरूप खुद को तैयार किया जा सकता है.

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पूर्व में जहां 10वीं में 60 फीसदी अंक लाने वाले को समाज श्रेष्ठ मानती थी, वे मिसाल के रूप में गीने जाते थे. जबकि, अब सर्वाधिक अंक की चाह प्रतियोगिता को लगातार बढ़ा रही है. आने वाले समय में चुनौतियां और बढ़ेगी. इसमें खुद को स्थापित करने के लिए संसाधानों को बेहतर इस्तेमाल करने सीखना होगा.

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वर्तमान समय में औद्योगिक क्रांति 4.0 पर लगातार विमर्श चल रहा है. तकनीक आधारित इस दौर में हाई स्किल से प्रशिक्षित व्यक्ति ही खुद को स्थापित कर सकेंगे. बाजार की मांग के अनुरूप खुद को तैयार करने के लिए युवाओं को लगातार रचनात्मक सोच के साथ नये प्रयोग करने होंगे.

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लगातार सीखने की प्रवृत्ति ही लोगों को सफलता की ओर ले जायेगी. समाज ने हमेशा से नये प्रयोग का स्वागत किया है, ऐसे में स्टार्टअप एक बेहतर विकल्प है. इससे जुड़कर समाज को नयी दिशा और संभावनाएं दी जा सकेगी.

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