धुस्का, रुगड़ा की सब्जी और चना-घुघनी, Vande Bharat ट्रेन में यात्रियों को मिलेगा अब झारखंडी खाने का स्वाद

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Vande Bharat ट्रेन में परोसने के लिए झारखंडी व्यंजनों में धुस्का, लिट्टी-चोखा, सत्तू पराठा, चिल्का रोटी, रुगड़ा की सब्जी, आरू की सब्जी, पिठ्ठा और चना-घुधनी को शॉर्टलिस्ट कर भेजा जायेगा.

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Vande Bharat: यात्रा को और अधिक यादगार बनाने के लिए रेलवे ने वंदे भारत ट्रेनों में क्षेत्रीय फेमस खाने परोसने की पहल की है. इसी क्रम में रेलवे ने आईआरसीटीसी रांची को क्षेत्रीय भोजनों की सूची मुहैया कराने को लेकर पत्र लिखा है. रांची स्थित आइईआरसीटीसी के अधिकारी ने बताया कि पत्र के आलोक में जल्द ही व्यंजनों की सूची रेल मुख्यालय को भेजी जायेगी. इसके लिए यात्रियों से भी फीडबैक लिया जा रहा है. इसमें उन व्यंजनों को शामिल किया जायेगा जो झारखंडी कल्चर को दिखाती है. रांची से इस समय रांची-हावड़ा, रांची-वाराणसी और रांची-पटना के लिए वंदे भारत ट्रेनें चलती है. इन वंदे भारत ट्रेनों में अभी आलू चिप्स, कटलेट, अंडा, सैंडविच, आलू फ्राइ जैसे खाने दिये जाते हैं.

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झारखंडी पिठ्ठा खाने का मिलेगा मौका

वहीं, झारखंडी व्यंजनों में धुस्का, लिट्टी-चोखा, सत्तू पराठा, चिल्का रोटी, रुगड़ा की सब्जी, आरू की सब्जी, पिठ्ठा और चना-घुधनी को शॉर्टलिस्ट कर भेजा जायेगा. मुख्यालय से स्वीकृति मिलने के बाद यात्रियों को इन व्यंजनों में से कई परोसे जायेंगे. भारतीय रेल ने वंदे भारत ट्रेनों में क्षेत्रीय, पारंपरिक भोजन उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है. यात्रियों को अपनी सीट पर बैठे-बैठे देश के अलग-अलग राज्यों के विशिष्ट स्वादों का आनंद मिलेगा. महाराष्ट्र, गुजरात, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, केरल, बिहार, जम्मू और कश्मीर जैसे राज्यों के प्रसिद्ध भोजन अब वंदे भारत ट्रेनों में उपलब्ध होंगे. इससे स्थानीय यात्रियों को अपने घर जैसा स्वाद मिलेगा और अन्य राज्यों के यात्री भी की विविध संस्कृतियों से परिचित होंगे.

क्षेत्रीय भोजन से मजबूत होगी स्थानीय अर्थव्यवस्था: DRM

डीआरएम करुणानिधि सिंह ने कहा कि इस पहल का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि इससे स्थानीय उत्पादकों, रसोइयों और सप्लाई चेन को बढ़ावा मिलेगा. क्षेत्रीय व्यंजनों की मांग बढ़ने से स्थानीय सामग्री और पारंपरिक पकाने की विधियों को प्रोत्साहन मिलेगा, इससे “वोकल फॉर लोकल” की भावना को मजबूती मिलेगी और स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी. उन्होंने कहा कि वंदे भारत ट्रेनों में क्षेत्रीय भोजन की शुरुआत यह दर्शाती है कि भारतीय रेल अब यात्रियों की भावनाओं, उनकी संस्कृति और उनकी जड़ों को भी समझ रही है. भोजन केवल पेट भरने का साधन नहीं, बल्कि यादों, परंपराओं और अपनत्व का माध्यम होता है. जब कोई यात्री अपनी यात्रा के दौरान अपने राज्य का पसंदीदा व्यंजन चखता है, तो वह खुद को घर के और करीब महसूस करता है. अपने घर जैसा स्वाद मिलेगा और अन्य राज्यों के यात्री भी देश की विविध संस्कृतियों से परिचित होंगे.

किस ट्रेन में क्या मिलता है

राउरकेला-हावड़ा वंदे भारत एक्सप्रेस में कोषा पनीर और हावड़ा-पुरी वंदे भारत एक्सप्रेस में आलू पोतोल भाजा यात्रियों को बंगाल की पारंपरिक रसोई से जोड़ते हैं. बिहार से चलने वाली वंदे भारत ट्रेन में चंपारण पनीर (पटना-रांची) और चंपारण चिकन (पटना-हावड़ा) परोसा जाता है. महाराष्ट्र के नागपुर-सिकंदराबाद वंदे भारत एक्सप्रेस में कांदा पोहा और सीएसएमटी-मडगांव वंदे भारत एक्सप्रेस में मसाला उपमा दिया जाता है. मुंबई सेंट्रल-गांधीनगर वंदे भारत एक्सप्रेस में मेथी थेपला और साबरमती-वेरावल वंदे भारत एक्सप्रेस में मसाला लौकी परोसी जाती है. केरल की कासरगोड-तिरुवनंतपुरम और मंगलुरु-तिरुवनंतपुरम वंदे भारत एक्स्प्रेस में सफेद चावल, पचक्का चेरुपयार मेझुक्कुपेराटी, कडला करी, केरल पराठा, सादा दही, पालडा पायसम और अप्पम परोसा जाता है. जम्मू और कश्मीर वंदे भारत में अंबल कडू, जम्मू चना मसाला, टमाटर चमन और केसर फिरनी यात्रियों को मिलते हैं.

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