टूरिज्म में इन्वेस्टमेंट का नया हॉटस्पॉट बनेगा झारखंड, फॉरेन इन्वेस्टर्स को न्योता देने की तैयारी

Published by : Sameer Oraon Updated At : 18 Jan 2026 1:54 PM

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झारखंड के जलप्रपात और उनकी संस्कृति, Pic Credit- Chatgpt

World Economic Forum: झारखंड पर्यटन में फॉरेन इन्वेस्टर्स को न्योता देने की तैयारी कर रहा है. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में WEF में झारखंड को दुनिया के सामने पेश किया जाएगा. यहां जंगल, झरने, आदिवासी संस्कृति और इतिहास का अनुभव सभी प्रकार के पर्यटकों के लिए गहरा और अपनापन भरा है.

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World Economic Forum, रांची: झारखंड में टूरिज्म के क्षेत्र में इन्वेस्टमेंट के लिए फॉरेन इन्वेस्टर्स को न्योता देने की तैयारी है. झारखंड में हाल के दिनों में देश विदेश के पर्यटकों की आवाजाही बढ़ी है. ऐसे में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में झारखंड वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में दुनिया को पर्यटन के लिए आमंत्रित किया जायेगा. नेचर लवर्स, इतिहास के जानकार, एडवेंचर पसंद करने वाले, सांस्कृतिक अनुभव चाहने वाले या पॉजिटिव जर्नी का इच्छा रखने वाले हर प्रकार के पर्यटक झारखंड में अपनी पसंद का अनुभव पा सकते हैं.

टूरिज्म के क्षेत्र में नये अवसरों का दरवाजा खोलने को तैयार है झारखंड

25 वर्ष का युवा झारखंड इन्वेस्टमेंट और विकास के माध्यम से पर्यटन क्षेत्र में नये अवसरों के दरवाजा खोलने को तैयार है. झारखंड में यात्रा भूमि, लोगों और परंपराओं के साथ गहरे और स्थायी संबंधों पर केंद्रित है. यहां के घने जंगल, झरने, आदिवासी संस्कृति और इतिहास की झलक मिलकर आने वालों को एक गहरा और अपनापन भरा अनुभव देते हैं. छोटानागपुर पठार की भौगोलिक संरचना यहां के पर्यटन के स्वरूप को डिफाइन करती है.

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हुंडरू, दशम, जोन्हा जैसे फॉल सबसे अट्रैक्टिव फॉल में शामिल

सड़कों के किनारे फैले जंगल, खुली घाटियों में बसे पारंपरिक गांव और चट्टानों से होकर बहती कलकल नदियां लोगों को आकर्षित करती हैं. हुंडरू, दशम, जोन्हा और लोध जैसे छोटे-बड़े फॉल पूर्वी भारत के सबसे आकर्षक और मनमोहक फॉल में शामिल हैं.

झारखंड की पहचान है जंगल और उनकी संस्कृति

झारखंड का टूरिज्म सिर्फ खूबसूरत जंगल और झरनों तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां आदिवासियों की अपनी जिंदगी और परंपरा भी देखने को मिलती है. यहां की भाषाएं, त्योहार, कला और रीति-रिवाज आज भी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा हैं. सरहुल, करम और सोहराय जैसे त्योहार मौसम और लोगों के साथ मिलकर जीने के तरीके को दिखाते हैं, जबकि सोहराय और कोहबर की पेंटिंग, पैतकर कला और छऊ नृत्य जमीन, विश्वास और क्रिएटिविटी से सीधे जुड़े हैं.

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लेखक के बारे में

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समीर उरांव, डिजिटल मीडिया में सीनियर जर्नलिस्ट हैं और वर्तमान में प्रभात खबर.कॉम में सीनियर कटेंट राइटर के पद पर हैं. झारखंड, लाइफ स्टाइल और स्पोर्ट्स जगत की खबरों के अनुभवी लेखक समीर को न्यूज वर्ल्ड में 5 साल से ज्यादा का वर्क एक्सपीरियंस है. वह खबरों की नब्ज पकड़कर आसान शब्दों में रीडर्स तक पहुंचाना बखूबी जानते हैं. साल 2019 में बतौर भारतीय जनसंचार संस्थान से पत्रकारिता करने के बाद उन्होंने हिंदी खबर चैनल में बतौर इंटर्न अपना करियर शुरू किया. इसके बाद समीर ने डेली हंट से होते हुए प्रभात खबर जा पहुंचे. जहां उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग और वैल्यू ऐडेड आर्टिकल्स लिखे, जो रीडर्स के लिए उपयोगी है. कई साल के अनुभव से समीर पाठकों की जिज्ञासाओं का ध्यान रखते हुए SEO-ऑप्टिमाइज्ड, डेटा ड्रिवन और मल्टीपल एंगल्स पर रीडर्स फर्स्ट अप्रोच राइटिंग कर रहे हैं.

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