RANCHI NEWS : जिसका मन स्वच्छ हो गया, उसमें लोभ और विकार नहीं आ सकते : पंडित निखिल जैन
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 12 Sep 2024 12:39 AM
पर्युषण पर्व के चौथे दिन उत्तम शौच धर्म के बारे में विस्तार से प्रकाश डाला गया. शौच अर्थात शुचिता, पवित्रता. तन की पवित्रता नहीं, शरीर की पवित्रता नहीं. बल्कि मन की शुचिता को शौच धर्म कहा गया है.
दिगंबर जैन मंदिर, रांची में पर्युषण पर्व रांची. पर्युषण पर्व के चौथे दिन उत्तम शौच धर्म के बारे में विस्तार से प्रकाश डाला गया. शौच अर्थात शुचिता, पवित्रता. तन की पवित्रता नहीं, शरीर की पवित्रता नहीं. बल्कि मन की शुचिता को शौच धर्म कहा गया है. ऋषि-मुनियों ने मन को लोभ से रहित करने, मन में अधिक लोभ नहीं आने को शौच शुचिता कहा है. सभी पाप, संग्रह आदि मन में विकार आने के परिणाम हैं. जिसका मन स्वच्छ हो गया, उसमें लोभ आदि विकार आ ही नहीं सकते. मन की शुचिता, लोभ का अभाव होने पर शौच धर्म प्रकट होता है. इसमें कहा गया कि हमें लोभ के चक्कर से बचने के उपायों का अपनाना है, जिससे हमारे अंतरंग में उत्तम शौच धर्म उद्घाटित होगा. ‘शुचेर्भावः शौचम्’ अर्थात् शुचिता का भाव ही ‘उत्तम शौच धर्म’ है. ये बातें अपर बाजार स्थित श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर में पंडित निखिल जैन शास्त्री ने बुधवार को कहीं. वे धर्मावलंबियों को दस धर्मों का सार समझाते हुए चौथे दिन लोभ के चक्कर से बचने का मार्ग बता रहे थे. उन्होंने धन और यश के लोभ की चिंता से बचने की प्रेरणा दी, क्योंकि यह सभी पुण्यकर्म से मिलता है. इसलिए इसकी चिंता व्यर्थ है. मनुष्य को चाहिए कि वह पवित्र मन से व्यापार आदि सभी कार्य करें. धन और यश का लाभ स्वतः ही होने लगता है.
इंसान विश्व की संपूर्ण दौलत पाने के बाद भी सुखी नहीं होता
पंडित निखिल जैन शास्त्री ने कहा : जिस प्रकार समुद्र अनेक नदियों से भी तृप्त नहीं होता, उसी प्रकार इंसान विश्व की संपूर्ण दौलत पाने के बाद भी सुखी और संतुष्ट नहीं होता. यदि मनुष्य अपने भीतर से लोभ कषाय को निकाल दे, तो जीवन में आये संतोष के धन से सुख प्राप्त अवश्य हो सकता है. लालच के कारण ही इंसान सारे पाप करता है. यह भी सहज ही है कि जो लालची होगा वह अपनी इच्छा पूर्ति के लिए समय आने पर चोरी, मायाचारी, छल-कपट, हिंसा, परिग्रह, बैर-भाव भी करता ही रहेगा. समाज में व्याप्त हिंसा, अनाचार, भ्रष्टाचार, चोरी, अपहरण हत्या, अपराध सब लोभ के कारण ही होते हैं. इसमें लोभ की प्रवृत्ति रहेगी, उसमें शुचिता पवित्रता संभव ही नहीं.आचार्य विद्यासागरजी के जीवन से अवगत कराया
इस अवसर पर शास्त्र सभा के बाद जैन युवा जागृति ने जैन तंबोला सांस्कृतिक कार्यक्रम के अंतर्गत समाधिस्थ संत शिरोमणि आचार्य विद्यासागर जी के जीवन से अवगत कराया. इस अवसर पर विनोद कुमार, राजेश कुमार, मुकेश कुमार बाकलीवाल, पारसमल महावीर प्रसाद ने अपर बाजार मंदिर में शांतिधारा की. मीडिया प्रभारी राकेश काशलीवाल ने कहा कि शांति देवी, संजय कुमार, अजय कुमार छाबड़ा, रिखबचंद, रोहित कुमार बाकलीवाल ने वासुपूज्य जिनालय में शांतिधारा की.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
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