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पंकज मिश्रा की जमानत याचिका खारिज, ट्रायल तेज करने के निर्देश

Updated at : 11 Feb 2024 5:19 AM (IST)
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पंकज मिश्रा की जमानत याचिका खारिज, ट्रायल तेज करने के निर्देश

याचिका की सुनवाई न्यायमूर्ति गौतम कुमार चौधरी की अदालत में हुई. इस दौरान पंकज मिश्रा की ओर से दलील पेश की गयी कि अवैध खनन के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सह अभियुक्त बच्चू यादव को जमानत दे दी है.

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रांची : झारखंड हाइकोर्ट में अवैध खनन के किंग पिन के रूप में चिह्नित पंकज मिश्रा की जमानत याचिका खारिज कर दी है. साथ ही मुकदमे का ट्रायल तेज करने के निर्देश दिये हैं. न्यायमूर्ति गौतम कुमार चौधरी की अदालत ने जमानत याचिका पर अपना फैसला सुनाते हुए यह निर्देश दिया है. सुप्रीम कोर्ट से जमानत याचिका वापस लेने के छह महीने बाद पंकज मिश्रा ने पहले ट्रायल कोर्ट में जमानत याचिका दायर की. ट्रायल कोर्ट से जमानत याचिका खारिज होने के बाद उसने हाइकोर्ट में जमानत याचिका दायर की थी. याचिका की सुनवाई न्यायमूर्ति गौतम कुमार चौधरी की अदालत में हुई. इस दौरान पंकज मिश्रा की ओर से दलील पेश की गयी कि अवैध खनन के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सह अभियुक्त बच्चू यादव को जमानत दे दी है. झारखंड हाइकोर्ट से भी सह अभियुक्त कृष्णा साहा को जमानत मिल चुकी है.

अवैध खनन के मामले में पंकज मिश्रा पर आरोप गठन हो चुका है. मामले में ट्रायल चल रहा है. मामले से संबंधित 42 गवाहों में से 10 की गवाही पूरी हो चुकी है. लेकिन, बरहरवा थाना कांड संख्या 85/2020 में पंकज मिश्रा के खिलाफ ट्रायल नहीं चल रहा है. इडी के अवैध खनन का संबंध बरहरवा थाना से है. पंकज मिश्रा 20-7-2022 से जेल में हैं. पीएमएलए की धारा-3 सह पठित धारा-4 में छह साल की सजा है. पंकज मिश्रा की ओर से मनीष शिशोदिया बनाम सीबीआइ के मामले में सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी को उद्धृत करते हुए कहा गया कि ट्रायल की अवधि को सजा मान कर अभियुक्त को जमानत देने से इनकार नहीं किया जा सकता है. याचिकादाता पैंक्रियाज की गंभीर बीमारी से ग्रसित है. उसे डायबिटीज सहित अन्य बीमारियां हैं. इलाज के लिए उसे दिल्ली के अस्पताल में भेजा गया था. इसलिए अब उसे जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया जाना चाहिए.

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इडी की ओर से जमानत याचिका का विरोध करते हुए यह कहा गया कि बच्चू यादव और कृष्णा साहा के मामले के इस याचिका दाता से जोड़ कर नहीं देखा जाना चाहिए. याचिका दाता अवैध खनन मामले का किंग पिन है. मनीष शिशोदिया के मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा कही गयी बात सिर्फ न्यायालय की टिप्पणी है. यह न्यायालय को कोई आदेश या निर्देश नहीं है. जहां तक अभियुक्त की बीमारी का मामला है, तो जेल के डॉक्टर उसका इलाज कर रहे हैं. जरूरत पड़ने पर उसे बेहतर इलाज के लिए बड़े अस्पताल में भी भेजा गया था. इसलिए याचिकादता को जमानत नहीं दी जानी चाहिए.

कोर्ट ने कहा : मामला बड़े पैमाने पर अवैध खनन और उससे संबंधित पैसों का

न्यायालय ने सभी पक्षों की बात सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था. बाद में न्यायालय ने अपना फैसला सुनाया. न्यायालय ने अपने फैसला में कहा कि याचिकादाता तत्कालीन मुख्यमंत्री का प्रतिनिधि है. उसका प्रशासनिक और राजनीतिक कनेक्शन है. मामला बड़े पैमाने पर अवैध खनन और उससे संबंधित पैसों का है. याचिका दाता किंग पिन के रूप में चिह्नित है. ट्रायल भी शुरुआती स्टेज पर है. याचिका में कोई नहीं बात नहीं है. इसलिए जमानत याचिका खारिज की जाती है. साथ ही ट्रायल कोर्ट को ट्रायल में तेजी लाने का निर्देश दिया जाता है.

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