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Jharkhand High Court News : विश्वविद्यालयों में शिक्षकों के रिक्त पद चार माह में भरने का आदेश

Updated at : 06 Dec 2024 12:15 AM (IST)
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Jharkhand High Court News : विश्वविद्यालयों में शिक्षकों के रिक्त पद चार माह में भरने का आदेश

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झारखंड हाइकोर्ट के जस्टिस डॉ एसएन पाठक की अदालत ने राज्य के विश्वविद्यालयों में बार-बार असिस्टेंट प्रोफेसरों की संविदा पर नियुक्ति के मामले में दायर याचिकाओं पर सुनवाई की. सुनवाई पूरी होने पर अदालत ने राज्य सरकार, जेपीएससी और विश्वविद्यालयों को असिस्टेंट प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर व प्रोफेसर के सभी रिक्त पदों पर चार माह के भीतर नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया.

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रांची. झारखंड हाइकोर्ट के जस्टिस डॉ एसएन पाठक की अदालत ने राज्य के विश्वविद्यालयों में बार-बार असिस्टेंट प्रोफेसरों की संविदा पर नियुक्ति के मामले में दायर याचिकाओं पर सुनवाई की. अदालत ने प्रार्थी, राज्य सरकार और झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) का पक्ष सुना. सुनवाई पूरी होने पर अदालत ने राज्य सरकार, जेपीएससी और विश्वविद्यालयों को असिस्टेंट प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर व प्रोफेसर के सभी रिक्त पदों पर चार माह के भीतर नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया.

हाइकोर्ट ने कहा- नियुक्ति के नियमों की सारी बाधाएं दो माह के अंदर दूर करें

उच्च शिक्षा सचिव, उच्च शिक्षा निदेशक और जेपीएससी को नियुक्ति के नियमों की सारी बाधाएं दो माह के अंदर दूर करने को कहा. इसके बाद के दो माह के दौरान विश्वविद्यालयों से प्राप्त अधियाचना के आलोक में राज्य सरकार व जेपीएससी नियुक्ति के लिए विज्ञापन प्रकाशित करने और अन्य प्रक्रियाओं को पूर्ण करेंगे. इसी दौरान झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (जेट) भी आयोजित की जा सकती है, लेकिन जो समय सीमा निर्धारित की गयी है, उसके अंदर रिक्त पदों पर नियमित नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी की जानी चाहिए. प्रतिवादियों को उक्त निर्देश देते हुए हाइकोर्ट ने ने याचिका को निष्पादित कर दिया.

असिस्टेंट प्रोफेसर के रिक्त पदों पर नियमित नियुक्ति की मांग की गयी है याचिका में

इससे पूर्व जेपीएससी की ओर से अधिवक्ता संजय पिपरावाल ने पैरवी की, जबकि डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी विवि की ओर से अधिवक्ता अर्पण मिश्रा, विनोबा भावे विवि व कोल्हान विवि की ओर से अधिवक्ता डॉ अशोक कुमार सिंह ने पक्ष रखा. उल्लेखनीय है कि प्रार्थी डॉ प्रसिला सोरेन व अन्य की ओर से अलग-अलग याचिका दायर की गयी थी. असिस्टेंट प्रोफेसर के रिक्त पदों पर संविदा नियुक्ति के बदले नियमित नियुक्ति की मांग की गयी थी. कहा गया था कि वह सिदो-कान्हो विवि में संविदा पर शिक्षक पद पर कार्य कर रहे थे, लेकिन उन लोगों को यह कहते हुए हटा दिया गया कि अब स्थायी नियुक्ति होगी. इसके बाद संविदा पर कार्यरत अन्य शिक्षकों को नहीं हटाया गया. पूर्व की सुनवाई के दौरान जेपीएससी की ओर से बताया गया था कि वर्ष 2018 में विज्ञापन संख्या 4/2018 व 5/2018 के तहत विभिन्न विषयों में लगभग 500 से अधिक असिस्टेंट प्रोफेसरों की नियुक्ति की अनुशंसा की गयी है. कई विश्वविद्यालयों से अधियाचना आयी है, जिस पर प्रक्रिया आगे बढ़ायी गयी है.

सभी विश्वविद्यालयों को बनाया गया है प्रतिवादी

अदालत ने पूर्व में मामले की सुनवाई के दौरान चांसलर सहित राज्य के सभी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को प्रतिवादी बनाया था. साथ ही उच्च व तकनीकी शिक्षा व कौशल विभाग के सचिव, रांची विश्वविद्यालय, डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय, विनोबा भावे विश्वविद्यालय, कोल्हान विश्वविद्यालय, नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय, बिनोद बिहारी महतो कोयलांचल विश्वविद्यालय, सिदो-कान्हो विश्वविद्यालय के कुलपति व रजिस्ट्रार को सशरीर हाजिर भी होना पड़ा था.

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