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अफसर ने किया था नौकरी के नाम पर ठगनेवाली कंपनी के दफ्तर का उद‍्घाटन

Updated at : 17 Jul 2020 6:12 AM (IST)
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अफसर ने किया था नौकरी के नाम पर ठगनेवाली कंपनी के दफ्तर का उद‍्घाटन

अफसर ने किया था नौकरी के नाम पर ठगनेवाली कंपनी के दफ्तर का उद‍्घाटन

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ओके :: अफसर ने किया था नौकरी के नाम पर ठगनेवाली कंपनी के दफ्तर का उद‍्घाटन – पाकुड़ के तत्कालीन अनुंडलीय कृषि पदाधिकारी एडमंड मिंज ने दिया था कंपनी को अनापत्ति प्रमाणपत्र – कंपनी को जिले के सभी 128 पंचायतों में एग्रीकल्चर प्रोडक्ट कलेक्शन सेंटर के लिए प्रमाणपत्र दिया गया था- बाद में कंपनी ने नौकरी के नाम पर ठगी किया और 10 जनवरी 2020 से अपना कार्यालय बंद कर दियाविशेष संवाददाता4रांची कृषि उत्पाद खरीदने और नौकरी के नाम पर ठगी करनेवाली कंपनी भारत एग्रो इंडस्ट्रीज का उद‍्घाटन कृषि सेवा के अधिकारी एडमंड मिंज ने किया था.

इस अधिकारी ने गलत तरीके से कंपनी को अनापत्ति प्रमाणपत्र दिया. रिटायर होने से पहले कंपनी के दफ्तर का उद‍्घाटन भी किया. बाद में कंपनी ने नौकरी के नाम पर ठगी किया और अपना कार्यालय बंद कर दिया.क्या है मामलावर्ष 2019 में सरकार ने किसानों को अधिक लाभ पहुंचाने से संबंधित एक घोषणा की थी. इसमें कहा गया था कि सरकार किसानों के उत्पाद को विदेशों में बाजार उपलब्ध करायेगी.

सरकार द्वारा की गयी घोषणा के बाद भारत एग्रो इंडस्ट्रीज नामक कंपनी ने पाकुड़ के तत्कालीन अनुंडलीय कृषि पदाधिकारी सह जिला कृषि पदाधिकारी को आवेदन दे कर एग्रीकल्चर प्रोडक्ट कलेक्शन सेंटर के लिए अनापत्ति प्रमाणपत्र की मांग की. कंपनी के अनुरोध पर मिंज ने उसे जिले के सभी 128 पंचायतों में एग्रीकल्चर प्रोडक्ट कलेक्शन सेंटर के लिए अनापत्ति प्रमाणपत्र दिया.

इतना ही नहीं, उन्होंने खुद ही भारत एग्रो प्रोडक्ट इंडस्ट्रीज के पाकुड़ स्थित दफ्तर का उद‍्घाटन किया. सितंबर में मिंज रिटायर हो गये. लेकिन इस बीच कंपनी ने यह प्रचार किया कि वह स्थानीय किसानों काे उत्पाद खरीद कर उसे विदेशों में बेचेगी और किसानों को अधिक मुनाफा दिलायेगी. इस काम के लिए उसे कर्मचारियों की जरूरत है. वह अपने कार्यालय में स्थानीय लोगों को ही नियुक्त करेगी.

आवेदन लेने के बाद उसने कुछ स्थानीय युवकों को नियुक्ति पत्र दिया. इसमें काम का समय सुबह 10 बजे से दोपहर दो बजे तक बताया गया. साथ ही विभिन्न पंचायतों में कृषि उत्पाद संग्रह करने और उसका हिसाब-किताब रखने के लिए चुने गये युवकों को 1500 रुपये की दर से जमानत राशि जमा करने का निर्देश दिया. यह राशि कंपनी द्वारा दिये जानेवाले किट के नाम पर वसूली गयी. दिसंबर में जिला प्रशासन को कंपनी के खिलाफ शिकायतें मिलीं. इसके बाद जिला कृषि पदाधिकारी ने तत्कालीन कृषि पदाधिकारी द्वारा दिये गये अनापत्ति प्रमाणपत्र को रद्द कर दिया.

उन्होंने कंपनी को इससे संबंधित दी गयी सूचना में इस बात का भी उल्लेख किया कि अनापत्ति प्रमाणपत्र निर्गत करना जिला कृषि पदाधिकारी के अधिकार में नहीं है. दिसंबर में अनापत्ति प्रमाणपत्र रद्द किये जाने के बाद कंपनी ने अपना दफ्तर बंद कर दिया. कंपनी ने 10 जनवरी 2020 को अपने कार्यालय पर एक नोटिस भी चिपकाया, जिसमें यह लिखा गया कि कृषि पदाधिकारी द्वारा अनापत्ति प्रमाणपत्र रद्द किये जाने की वजह से दफ्तर बंद कर दिया गया है. बाजार समिति से अनापत्ति प्रमाणपत्र मिलने के बाद शीघ्र ही कार्यालय खोला जायेगा. हालांकि अब तक कार्यालय बंद पड़ा है. पीड़ित लोगों ने सरकार से मामले में उचित कार्रवाई करने की मांग की है.

Post by : Pritish sahay

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