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ऑफिस ऑफ प्रॉफिट की हैं तीन शर्तें, हाईकोर्ट व चुनाव आयोग लेगा निर्णय

हेमंत सोरेन द्वारा माइनिंग लीज लेने को लेकर चुनाव आयोग ने मुख्य सचिव को पत्र भेज कर पूरे मामले से दस्तावेज उपलब्ध कराने को कहा है. मुद्दे पर प्रभात खबर ने कानूनी तथ्यों को जानने के लिए संविधान विशेषज्ञ व जानकारों से बात की है.

By Prabhat Khabar Print Desk
Updated Date
ऑफिस ऑफ प्रोफिट मामले में विशेषज्ञों की राय
ऑफिस ऑफ प्रोफिट मामले में विशेषज्ञों की राय
प्रभात खबर

रांची : पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा माइनिंग लीज लेने को लेकर राज्यपाल रमेश बैस से शिकायत की थी. राज्यपाल ने श्री दास के शिकायत पत्र के बारे में निर्वाचन आयोग को जानकारी दी. आयोग ने मुख्य सचिव को पत्र भेज कर पूरे मामले में 15 दिनों के अंदर इससे संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराने को कहा है.

आयोग जनप्रतिनिधि अधिनियम की धारा 9 ए के तहत ऑफिस ऑफ प्रॉफिट के मामले की पड़ताल कर रहा है. इस मुद्दे पर प्रभात खबर ने कानूनी तथ्यों को जानने के लिए संविधान विशेषज्ञ व जानकारों से बात की है.

संविधान विशेषज्ञ सुभाष कश्यप से बातचीत

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की माइनिंग लीज मामले में संविधान विशेषज्ञ सुभाष कश्यप ने कहा है कि ऑफिस ऑफ प्रोफिट की तीन कंडीशन होते हैं. पहला- कोई पद होना चाहिए, दूसरा- इसके तहत कोई लाभ होना चाहिए और तीसरा यह सरकार के अधीन होना चाहिए. अगर यह है, तो वह ऑफिस ऑफ प्रॉफिट होगा. मामला न्यायालय में विचाराधीन है. हालांकि, यह मामला चुनाव आयोग व झारखंड हाइकोर्ट में है. इस मामले में उन्हें ही निर्णय लेना है.

चुनाव आयोग सीधे सदस्यता से अयोग्य घोषित नहीं कर सकता : अधिवक्ता अरविंद लाल

हाइकोर्ट में चुनाव मामलों के विशेषज्ञ अधिवक्ता अरविंद कुमार लाल ने कहा कि ऑफिस ऑफ प्रॉफिट दो तरह के हैं. एक नामांकन के समय का ऑफिस अॉफ प्रॉफिट और एक जीत जाने के बाद का ऑफिस ऑफ प्रॉफिट. दोनों अलग-अलग चीज है. विधायक जीतने के बाद मंत्री-मुख्यमंत्री बनता है.

यदि वह ऑफिस ऑफ प्रॉफिट करता है, तो सदस्यता से अयोग्य घोषित हो सकता है. जहां तक हेमंत सोरेन द्वारा अपने नाम से माइनिंग लीज लेने का मामला है, तो यह देखना होगा कि लीज से किसको लाभ हो रहा है. लाभ लिया गया है या नहीं. बिना दस्तावेज देखे, स्पष्ट रूप से कुछ कहा नहीं जा सकता है. चुनाव आयोग किसी सदस्य को सीधे अयोग्य घोषित नहीं कर सकता है. नियम है कि राज्यपाल चुनाव आयोग को भेजते हैं. आयोग जांच कर सुप्रीम कोर्ट को अोपेनियन के लिए भेजेगा. सुप्रीम कोर्ट का अोपेनियन मिलने पर आयोग उसे राज्यपाल के पास भेजेगा.

Posted By: Sameer Oraon

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