Ranchi News : जतरा में जनजातीय संस्कृति की दिखी सतरंगी छटा

Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 16 Nov 2025 6:26 PM

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राज्य स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में रविवार को पर्यटन, कला, संस्कृति, खेलकूद और युवा कार्य विभाग की ओर से जतरा का आयोजन किया गया.

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::: बिरसा के उलगुलान से लेकर जनजातीय संस्कृति की दिखी अद्भुत छटा

::: 4000 से अधिक कलाकारों ने जनजातीय जीवन के जीवंत दर्शन कराये

::: दर्जन भर झांकियों में झारखंड की कला संस्कृति के हुए दर्शन

रांची. राज्य स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में रविवार को पर्यटन, कला, संस्कृति, खेलकूद और युवा कार्य विभाग की ओर से जतरा का आयोजन किया गया. इसमें झारखंड के गौरवपूर्ण अतीत, नृत्य-संगीत, सांस्कृतिक विरासत और समृद्ध परंपरा की झलक प्रस्तुत की गयी. जतरा का शुभारंभ कल्याण मंत्री चमरा लिंडा ने जैप-1 के पास हरा झंडा दिखाकर और नगाड़ा बजाकर किया. वहीं, अलबर्ट एक्का चौक पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने जतरा यात्रा का स्वागत किया और अलबर्ट एक्का चौक से शहीद चौक तक यात्रा में शामिल भी हुए. इस दौरान हेलीकॉप्टर से पुष्पवर्षा भी की गयी.

चार हजार से अधिक लोग हुए शामिल

जतरा में रांची और आसपास के क्षेत्रों से जनजातीय समुदाय के चार हजार से अधिक लोग शामिल हुए. इनमें पेशेवर कलाकारों के साथ-साथ गांवों से आये सामान्य ग्रामीण भी थे. युवक-युवतियां, बुजुर्ग और बच्चे सभी पारंपरिक वस्त्रों में यात्रा का हिस्सा बने. जतरा जैप-1 से शुरू होकर ओवरब्रिज, सुजाता चौक, मेन रोड, अलबर्ट एक्का चौक और शहीद चौक होते हुए लाइन टैंक रोड के मार्ग से जेल मोड़ स्थित बिरसा स्मृति पार्क में सम्पन्न हुई. यात्रा के दौरान कलाकारों ने उलगुलान का जीवंत प्रदर्शन किया. ब्रिटिश सैनिकों से बिरसा मुंडा और उनके साथियों की संघर्ष गाथा पर आधारित लघु नाटिका भी प्रस्तुत की गयी.

जनजातीय और नागपुरी गीतों ने बांधा समां

जतरा में उरांव, मुंडा, संताल, खड़िया सहित विभिन्न जनजातीय समुदायों के लोगों ने हिस्सा लिया. यात्रा का पूरा मार्ग नागपुरी और जनजातीय भाषा के गीतों से गूंजता रहा. “अबुआ दिशुम अबुआ राज, उलगुलान रे… जैसे गीतों की प्रस्तुति ने माहौल में जोश भर दिया. विभिन्न समुदायों के लोग अपनी पारंपरिक पोशाकों में नजर आये. किसी ने लाल पाड़ की साड़ी पहनी थी, तो कोई सफेद गंजी-धोती में था. संताली दल लाल-हरी पोशाक में, जबकि कुछ समूह की महिलाएं पीली साड़ी में दिखायी दीं. हर दल में नगाड़ा, मांदर और घंटी बजाने वाले कलाकार शामिल थे. सबसे आगे पहियों पर लगी ट्रॉली पर बजते विशाव नगाड़े ने वातावरण में उत्साह भर दिया.

झांकियों में उलगुलान और संस्कृति की झलक

जतरा में लगभग एक दर्जन झांकियां शामिल थीं. एक झांकी में डोंबारी बाना पर अंग्रेजों और बिरसा मुंडा के अनुयायियों के संघर्ष को दर्शाया गया. एक अन्य झांकी में झारखंड के पहाड़ों और प्राकृतिक सौंदर्य का प्रदर्शन था. सरहुल और करम पर्व पर आधारित झांकियां भी आकर्षण का केंद्र रहीं. सोहराई पेंटिंग बनाते ग्रामीणों को दिखाती झांकी और झारखंड के औद्योगिक विकास को दर्शाती झांकियां भी शामिल थीं. छऊ नृत्य पर आधारित झांकी और जनजातीय आभूषणों को समर्पित प्रस्तुति ने दर्शकों का विशेष ध्यान खींचा.

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