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विशाखापत्तनम के बाद अब गुजरात में फंसे 13 प्रवासी श्रमिक, वापसी के प्रयास में जुटी झारखंड सरकार

Updated at : 30 Sep 2025 6:12 PM (IST)
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Migrant Laborers Stuck in Gujarat this company

गुजरात की इसी कंपनी में बंधक बने हुए हैं पूर्वी सिंहभूम के 13 श्रमिक. कुणाल षाड़ंगी ने सीएम से की मदद की अपील.

Migrant Laborers Stuck in Gujarat: आंध्रप्रदेश के विशाखापत्तनम में फंसे 13 श्रमिकों की वापसी को अभी एक सप्ताह भी नहीं बीते कि अब गुजरात में झारखंड के 13 प्रवासी श्रमिकों के फंसे होने की सूचना मिली है. सूचना पर हेमंत सोरेन ने तत्काल अधिकारियों को आदेश दिया कि मजदूरों की वापसी सुनिश्चित की जाये. अधिकारियों ने इस पर काम करना शुरू कर दिया है. जल्द ही सभी की वापसी हो जायेगी.

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Migrant Laborers Stuck in Gujarat: आंध्रप्रदेश के विशाखापत्तनम में बंधक बने बोकारो जिले के 13 प्रवासी श्रमिकों को वापस लाने के एक सप्ताह बाद अब झारखंड के 13 प्रवासी श्रमिकों के गुजरात के कच्छ जिले के बेला में फंसे होने की सूचना मिली है. परिजनों क शिकायत के बाद सूचना मिलते ही झारखंड सरकार ने उन सभी की वापसी की तैयारी शुरू कर दी है. जैसे ही सरकार को इसकी जानकारी मिली, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अधिकारियों को श्रमिकों की सुरक्षित वापसी कराने के निर्देश दिये. जिले के उपायुक्त से लेकर श्रम विभाग के प्रवासी नियंत्रण प्रकोष्ठ तक सक्रिय हो गया. सभी ने मिलकर उनकी वापसी के प्रयास शुरू कर दिये हैं. एक अधिकारी ने मंगलवार को यह जानकारी दी.

बहरागोड़ा प्रखंड के मटिहाना गांव के हैं मजदूर

पूर्वी सिंहभूम जिले के उपायुक्त कर्ण सत्यार्थी ने कहा कि जिले के बहरागोड़ा प्रखंड के मटिहाना निवासी मजदूर एक निजी कंपनी में काम करने के लिए गुजरात गये थे. पूर्वी सिंहभूम के उपायुक्त कर्ण सत्यार्थी ने कहा, ‘हमने प्रवासी श्रमिकों से संपर्क किया है. वे सुरक्षित हैं, लेकिन कंपनी ने उन्हें घर लौटने की अनुमति नहीं दी है. हम कंपनी प्रबंधन और गुजरात में संबंधित अधिकारियों से बात करने के बाद उनकी वापसी की व्यवस्था करेंगे.’

पूर्वी सिंहभूम के उपायुक्त कर्ण सत्यार्थी का बयान.

Migrant Laborers Stuck in Gujarat: कुणाल ने ‘एक्स’ पर हेमंत सोरेन को किया टैग

बहरागोड़ा के पूर्व विधायक कुणाल षाड़ंगी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को टैग करते हुए सोशल मीडिया साइट ‘एक्स’ पर श्रमिकों की ‘दुर्दशा’ साझा की. इसके बाद हेमंत सोरेन ने जिला प्रशासन और राज्य श्रम विभाग के प्रवासी नियंत्रण प्रकोष्ठ को उन्हें वापस लाने का निर्देश दिया. कुणाल षाड़ंगी ने आरोप लगाया कि मजदूरों को खाना नहीं दिया जा रहा है और उनका वेतन रोक दिया गया है.

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श्रम पदाधिकारी शिखा लकड़ा ने कहा- सभी की सुरक्षित वापसी की व्यवस्था की जायेगी

झामुमो के पूर्व विधायक कुणाल षाड़ंगी ने बताया कि मजदूरों के रिश्तेदारों ने बहरागोड़ा पुलिस थाने में शिकायत भी दर्ज करायी है. प्रवासी नियंत्रण प्रकोष्ठ की अधिकारी शिखा लकड़ा ने कहा कि कंपनी प्रबंधन से बात की जायेगी, ताकि श्रमिकों को वेतन मिल सके. साथ ही उनकी सुरक्षित वापसी की व्यवस्था भी की जायेगी.

झारखंड सरकार के प्रवासी नियंत्रण प्रकोष्ठ की अधिकारी शिखा लकड़ा.

विशाखापत्तनम से वापस लाये गये थे बोकारो के 13 श्रमिक

इसी महीने दक्षिण भारत के विशाखापत्तनम की एक कंपनी से झारखंड के 13 प्रवासी श्रमिकों को श्रम विभाग की मदद से सुरक्षित घर लाया गया था. ये लोग बोकारो जिले के रहने वाले थे. सभी को एक ठेकेदार NIKNAM CHEMICALS PRIVATE LTD विशाखापत्तनम में काम करने के लिए ले गया था. पुट्टी का काम करने के दौरान श्रमिकों को स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं आने लगीं, तो उन्होंने घर जाने की इच्छा जतायी. कंपनी ने ठेकेदार के साथ मिलकर उन सभी को बंधक बना लिया. घर जाने की अनुमति नहीं दी. श्रम विभाग को सूचना मिलने पर इन सबकी वापसी सुनिश्चित की गयी.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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