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लॉकडाउन में राजनीति का मोहरा बन गये हैं प्रवासी मजदूर! ट्विटर पर सरयू राय और महेश पोद्दार का संवाद

Updated at : 25 May 2020 8:41 PM (IST)
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लॉकडाउन में राजनीति का मोहरा बन गये हैं प्रवासी मजदूर! ट्विटर पर सरयू राय और महेश पोद्दार का संवाद

झारखंड के प्रवासी मजदूर लॉकडाउन के दौरान राजनीति का मोहरा बन गये हैं! प्रदेश के एक पूर्व मंत्री एवं विधायक और एक राज्यसभा सांसद के ट्वीट से इस बहस की शुरुआत हुई. पूर्वी सिंहभूम के विधायक सरयू राय ने ट्वीट किया कि प्रवासी मजदूर राजनीति का मोहरा बनते जा रहे हैं. इन्हें लाने की जिम्मेदारी किसकी है, के सवाल पर, सीएम-पीएम पर, फेंकाफेंकी ठीक नहीं.

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रांची : झारखंड के प्रवासी मजदूर लॉकडाउन के दौरान राजनीति का मोहरा बन गये हैं! प्रदेश के एक पूर्व मंत्री एवं विधायक और एक राज्यसभा सांसद के ट्वीट से इस बहस की शुरुआत हुई. पूर्वी सिंहभूम के विधायक सरयू राय ने ट्वीट किया कि प्रवासी मजदूर राजनीति का मोहरा बनते जा रहे हैं. इन्हें लाने की जिम्मेदारी किसकी है, के सवाल पर, सीएम-पीएम पर, फेंकाफेंकी ठीक नहीं.

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उन्होंने आगे लिखा कि भारत का संविधान हम सभी धनी-गरीब को देश के किसी भी कोने में जाने, बसने, रोजगार-व्यवसाय करने की इजाजत देता है. हम सभी भारत के नागरिक हैं, किसी राज्य के नहीं. दो दिन पहले सरयू राय ने ट्विटर पर एक पोस्ट डाला, जिसमें उन्होंने लिखा, ‘विधानसभा अध्यक्ष से उनके आवास पर मिला. कोरोना संकट के संबंध में विधायिका की भूमिका और लोकसभा के माननीय अध्यक्ष की पहल पर बात हुई.’

श्री राय ने आगे लिखा कि ऐसे संकट के समय शासन के संघीय ढांचा की भावना के अनुरूप विधायिका की प्रभावी भूमिका एवं सार्थक हस्तक्षेप का विशेष महत्व है. इस पर राज्यसभा के सदस्य महेश पोद्दार ने उन्हें जवाब दिया कि भारत के एक पूर्व मंत्री और आज के सांसद रोजाना करीब 15 दिनों से अपने क्षेत्र के प्रवासी मजदूरों को लाने की मुख्यमंत्री से गुहार लगा रहे हैं. लेकिन, इस पर कोई संज्ञान नहीं लेता. हजारीबाग के सांसद जयंत सिन्हा को टैग करते हुए महेश पोद्दार ने श्री राय से पूछा, ‘आप इसे कैसे लेते हैं.’

इस पर सरयू राय ने लिखा किया कि प्रवासी मजदूरों की समस्या पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राज्य और राष्ट्र के स्तर पर सर्वसम्मति बनायें. कामगारों को राजनीति का मोहरा बनने से रोकें. संघीय ढांचा में केंद्र-राज्य संबंध परिभाषित है. प्रवासी मजदूर/हम/आप नागरिक देश के हैं, किसी राज्य के नहीं.

जमशेदपुर पूर्वी के विधायक सरयू राय ने एक और ट्वीट में कहा कि प्रवासी श्रमिकों की समस्या पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राज्य और राष्ट्र के स्तर पर सर्वदलीय मीटिंग बुलायें. इन्हें राजनीति का मोहरा बनाना दुर्भाग्यपूर्ण है. संघीय ढांचा में सरकारिया आयोग व अन्य ने केंद्र और राज्यों के बीच का संबंध परिभाषित किया है. इसे दोनों निभायें.

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बहस इन्हीं दोनों नेताओं के बीच नहीं रह गया. वरिष्ठ पत्रकार सुनील तिवारी ने लिखा, ‘चार्टर्ड हवाई जहाज मिलने का इंताजार है. बस मिला कि एक ही दिन में सबको ले आयेंगे. पता नहीं है क्या कि दुमका इलाके के लोग पूर्वोत्तर राज्यों से खुद से बस लेकर पहुंच रहे हैं. हवाई जहाज के सपने दिखाने की बजाय अगर इन्हें बस दिलवा दिया गया होता, तो भला होता? लेकिन अभी राजनीति जो करना है.’

भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) के सोशल मीडिया प्रभारी राहुल अवस्थी ने हेमंत सोरेन की सरकार पर कटाक्ष किया. लिखा, ‘सरकार के अथक प्रयास से झारखंड के सभी प्रवासी मजदूर अपने घर वापस लौट रहे हैं. ट्विटर पे सवार होकर’. धरातल पर तो झारखंड में सरकार है ही नहीं. वहीं, एक इंपोर्टर-एक्सपोर्टर रवि बर्णवाल ने जयंत सिन्हा पर चुटकी ली. उन्होंने लिखा, ‘जयंत सिन्हा जी को मजाक करना बहुत अच्छे से आता है. इसलिए इनकी बातों को मुख्यमंत्री हल्के में लेते हैं.’

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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