कोरोना काल में अपनों का छूटा साथ तो मो खालिद का बढ़ा हाथ, 70 से अधिक शवों का किया अंतिम संस्कार

Updated at : 30 Apr 2021 9:52 PM (IST)
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कोरोना काल में अपनों का छूटा साथ तो मो खालिद का बढ़ा हाथ, 70 से अधिक शवों का किया अंतिम संस्कार

Jharkhand News (हजारीबाग) : कोरोना महामारी से पिछले 44 दिनों में करीब 70 शवों का अंतिम संस्कार हजारीबाग के मो खालिद ने किया है. हजारीबाग-रामगढ़ रोड कोनार नदी के किनारे कोविड गाइडलाइन के तहत बने श्मशान घाट में हर दिन आधा दर्जन से अधिक शव का अंतिम संस्कार कर रहे हैं. कोरोना योद्धा के रूप में पिछले साल मार्च में हजारीबाग में 28 और रांची में लगभग 98 कोरोना से मौत शव का अंतिम संस्कार किया था. मुर्दा कल्याण समिति के संचालक मो खालिद पिछले 14 साल से लावारिश शव का अंतिम संस्कार कर समाज में अलग पहचान बनाया है.

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Jharkhand News (सलाउद्दीन-हजारीबाग) : कोरोना महामारी से पिछले 44 दिनों में करीब 70 शवों का अंतिम संस्कार हजारीबाग के मो खालिद ने किया है. हजारीबाग-रामगढ़ रोड कोनार नदी के किनारे कोविड गाइडलाइन के तहत बने श्मशान घाट में हर दिन आधा दर्जन से अधिक शव का अंतिम संस्कार कर रहे हैं. कोरोना योद्धा के रूप में पिछले साल मार्च में हजारीबाग में 28 और रांची में लगभग 98 कोरोना से मौत शव का अंतिम संस्कार किया था. मुर्दा कल्याण समिति के संचालक मो खालिद पिछले 14 साल से लावारिश शव का अंतिम संस्कार कर समाज में अलग पहचान बनाया है.

कोरोना महामारी के दूसरे फेज में हर दिन मौत की संख्या बढ़ने के बाद भी मो खालिद हिम्मत के साथ कार्यों को अंजाम दे रहे हैं. शुरुआती दिनों में कोरोना संक्रमित से मौत के बाद शव को अंतिम संस्कार करने में इन्हें काफी परेशानी आयी. लोग सरकारी सुविधा से अंतिम संस्कार करने का दबाव इन पर भी बनाने लगे. धीरे-धीरे लोग समझ पाये कि मुर्दा कल्याण समिति के संचालक मो खालिद जनता के लिए समर्पित समाजसेवी हैं जो जनता के सहयोग से ही कार्यों को पूरा करते हैं. कई अडचनों के बावजूद हजारीबाग के जनता के प्यार को दिन में रखकर अपने कार्यों में लगे हुए हैं.

मो खालिद की जुबानी अंतिम संस्कार की कहानी

मो खालिद ने बताया कि कोरोना संक्रमण के दूसरे फेज में हर लोग काफी डरे हुए हैं. पिता की मौत होने पर बेटा भी अर्थी को कंधा देने से घबरा रहा है. बचपन से जिनके साथ खेला, पला, बढ़ा और मुहल्ले के लोग भी कोविड से मौत के बाद श्रद्धांजलि देने तक नहीं पहुंच रहे हैं. श्मशाम घाट में दो से तीन लोग ही परिजन आ रहे हैं. ऐसी परिस्थिति में भी दिन और रात में शवों का अंतिम संस्कार कर रहा हूं.

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पत्रकार के शव को शाम को ही अंतिम संस्कार कराया

मो खालिद ने बताया कि पत्रकार शाद्वल कुमार का अंतिम संस्कार देर रात करना पडा क्योंकि दूसरे दिन उसके पिता का श्राद्धक्रम और पूजा पाठ होना था. पत्रकार टीपी सिंह के शव को भी अंतिम संस्कार के लिए उनके घर में जाकर तैयार किया.

जिसका कोई नहीं उसके लिए खालिद बना हमदर्द

मो खालिद पिछले एक माह के अंदर कई शव का अंतिम संस्कार उसके परिजन और बेटा बनकर किया. इमली कोठी रोड मुहल्ले में एक परिवार के 4 सदस्य कोरोना संक्रमित हो गये थे. दो पुत्र हॉस्पिटल में भर्ती थे. बुढ़े पिता की मौत हो गयी थी. बुढ़ी मां घर पर मौजूद थी. अंतिम संस्कार करनेवाला कोई नहीं था. ऐसे में मो खालिद उस परिवार का सहारा बने और अंतिम संस्कार किया. ऐसे भी परिवार थे जहां सिर्फ पति-पत्नी थे. कोरोना से पति की मौत हो गयी. पत्नी अकेले घर में थी. मो खालिद ने शव का अंतिम संस्कार किया.

शहर के एक चर्चित समाजसेवी की मौत होने पर पार्टी, संस्था और मुहल्ले के लोगों ने अंतिम संस्कार में हाथ नहीं बढाया तो मो खालिद ने श्मशान घाट में जाकर शव का अंतिम संस्कार किया. कटकमसांडी बहिमर चौक के आगे एक वृद्ध की मौत हो गयी. शव को घर से श्मशान तक लाने में सभी लोग कतराने लगे. मो खालिद ने शव को एंबुलेंस से लाकर अंतिम संस्कार किया.

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बेटियों ने दिया मुखाग्नि

मो खालिद ने बताया कि कोरोना काल में कई परिवार में मौत के बाद बेटियों ने मुखाग्नि दी. कोर्रा मुहल्ले की एक महिला की मौत होने पर उसके बेटी सुषमा ने मुखाग्नि दी. इसी तरह चार-पांच शवों का अंतिम संस्कार बेटियों ने किया.

शव की अस्थी चुनने की भी जवाबदेही

कोरोना काल में लगभग 70 से अधिक शवों का अंतिम संस्कार किया. मो खालिद ने बताया कि पिछले अधिकांश परिवार ने अस्थी कलश को भी रखने की जवाबदेही मुझे ही सौंप दिया. लोगों के प्यार और विश्वास में इस कार्य को भी ईमानदारी पूर्वक कर रहा हूं. कोरोना योद्धा के इन कार्यों के लिए शहरवासी काफी प्रभावित है.

Posted By : Samir Ranjan.

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