झारखंड की मेरी बेरनादेत्त घोषित होंगी संत, प्रक्रिया शुरू

Updated at : 03 Jun 2024 12:39 AM (IST)
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झारखंड की मेरी बेरनादेत्त घोषित होंगी संत, प्रक्रिया शुरू

रांची महाधर्मप्रांत के मांडर पल्ली के सरगांव में वार्षिक तीर्थयात्रा में रविवार को हजारों की संख्या में श्रद्धालु जुटें. यह तीर्थयात्रा संत अन्ना धर्मसंघ की संस्थापिका माता मेरी बेरनादेत्त प्रसाद किस्पोट्टा की जन्मभूमि सरगांव में उनके सम्मान में आयोजित होती है.

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संवाददाता (रांची).

रांची महाधर्मप्रांत के मांडर पल्ली के सरगांव में वार्षिक तीर्थयात्रा में रविवार को हजारों की संख्या में श्रद्धालु जुटें. यह तीर्थयात्रा संत अन्ना धर्मसंघ की संस्थापिका माता मेरी बेरनादेत्त प्रसाद किस्पोट्टा की जन्मभूमि सरगांव में उनके सम्मान में आयोजित होती है. माता मेरी बेरनादेत्त की आज 145 वां जयंती भी थी. इस अवसर पर रांची धर्मप्रांत की ओर से बताया गया कि माता मेरी बेरनादेत्त को संत बनाने की प्रक्रिया शुरू की गयी है. उन्हें संत घोषित करने के लिए टीम गठित की गयी है जिसमें पोस्टुलेटर सिस्टर मरियम, सिस्टर अनूपा कुजूर, सहायक पोस्टुलेटर सिस्टर मेरी पुष्पा तिर्की, फादर तोबियस टोप्पो, फादर फ्रांसिस मिंज शामिल हैं. यह प्रक्रिया शुरुआती दौर में है पर इसे लेकर कैथोलिक विश्वासियों में उत्साह है. गौरतलब है कि माता बेरनादेत्त पूर्व में ही धन्य और ईश सेविका घोषित हो चुकी हैं. संत बनने की यह प्रक्रिया चौदह चरणों की है. पवित्र मिस्सा बलिदान से पहले ही आर्चबिशप सहित अन्य लोगों ने माता बेरनादेत्त की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित किया. इस समारोह में माता मेरी बेरनादेत्त किस्पोट्टा की आध्यात्मिकता नामक पुस्तक का विमोचन भी किया गया. इस अवसर पर मांडर विधायक शिल्पी नेहा तिर्की, फादर फ्रांसिस मिंज, फादर रिमोंड केरकेट्टा, मांदर के पल्ली पुरोहित फादर प्रसन्न तिर्की, फादर तोबियस टोप्पो, संत अन्ना धर्म समाज की सुपीरियर जेनरल सिस्टर लिली ग्रेस टोपनो, सिस्टर मेरी पुष्पा तिर्की, सिस्टर सोसन बाड़ा, सिस्टर मोनिका कुजूर, सिस्टर जसिंता केरकेट्टा, सिस्टर लंडा मेरी वान सहित अन्य शामिल थे.

माता मेरी बेरनादेत्त छोटानागपुर की कलीसिया के लिए विरासत :

आज इस विशेष अवसर पर धर्मविधि की अगुवाई आर्चबिशप विसेंट आईंद ने की. उन्होंने अपने उपदेश में कहा कि हममें प्रत्येक व्यक्ति में संत बनने की क्षमता है और इसी के लिए हम बुलाये गये हैं. उन्होंने कहा कि ईश सेवक फादर कांस्टेंट लीवंस, ईश सेवक हेरमन रस्कार्ट और ईश सेविका माता मेरी बेरनादेत्त छोटानागपुर की कलीसिया के लिए विरासत हैं. आर्चबिशप ने कहा कि पवित्र मिस्सा बलिदान जो हमारे प्रभु की आज्ञा व स्मृति में किया करते हैं, यह हमें स्वर्ग की ओर उन्मुख करता है. जिस तरह प्रभु यीशु ने अपने शरीर और रक्त को दूसरों के लिए समर्पित किया, वैसे ही यूखारिस्त में भाग लेने की सार्थकता तभी होगी जब हम भी अपने जीवन को दूसरों के लिए समर्पित करेंगे.

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