झारखंड में संचालित इन आयोग और बोर्ड में वर्षों से कई पद हैं खाली, सरकार की योजनाओं का नहीं मिल रहा लाभ

Author : Prabhat Khabar News Desk Published by : Prabhat Khabar Updated At : 19 Jul 2021 7:21 AM

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दुर्भाग्य की बात यह है कि यहां झारखंड में कई बोर्ड, निगम और आयोग में अध्यक्ष व सदस्य हैं ही नहीं. ऐसे में कई कार्य अटके पड़े हैं और असमंजस की स्थिति बनी हुई है. कई बोर्ड में काम ही नहीं हो रहा है. आयोग निष्क्रिय हो रहे हैं.

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Vacancy In Jharkhand Commission रांची : सरकार में व्यवस्था के तहत सारे कार्य और योजनाएं संचालित की जाती हैं. इन्हें हर स्तर पर लागू करने और इनकी समीक्षा करने को लेकर आयोग, बोर्ड, निगम और पर्षद जैसे संगठनों का गठन किया गया है. उक्त संगठन सरकार के मंत्रालय के ही एक घटक के रूप में काम करते रहे हैं. झारखंड निर्माण के बाद से कई बोर्ड और निगमों ने बेहतर काम किये हैं. वहीं कई कार्य ऐसे हुए हैं, जिनसे सरकार की फजीहत भी हुई है.

दुर्भाग्य की बात यह है कि यहां झारखंड में कई बोर्ड, निगम और आयोग में अध्यक्ष व सदस्य हैं ही नहीं. ऐसे में कई कार्य अटके पड़े हैं और असमंजस की स्थिति बनी हुई है. कई बोर्ड में काम ही नहीं हो रहा है. आयोग निष्क्रिय हो रहे हैं. सूचना आयोग, विद्युत नियामक आयोग, महिला आयोग जैसी संवैधानिक इकाई में भी साल-साल भर से पद रिक्त हैं. वित्त आयोग कार्यालय में तो ताला लटका हुआ है. इसका असर आम लोगों पर पड़ रहा है.

राज्य समाज कल्याण बोर्ड में एक साल से अध्यक्ष पद खाली

राज्य समाज कल्याण बोर्ड में एक साल से अध्यक्ष का पद खाली है. अध्यक्ष और सदस्यों के नहीं होने से आयोग काम-काज नहीं कर रहा है. वर्तमान में ओआइसी अविनाश कुमार कार्य संभाल रहे हैं. वहीं बोर्ड के अंतर्गत चल रहीं कई योजनाएं बंद कर दी गयी हैं. पालना घर, संक्षिप्त पाठ्यक्रम, जागरूकता प्रचार-प्रसार जैसी योजनाएं सालों पहले बंद हो चुकी हैं. आज भी समाज कल्याण विभाग के अंतर्गत आनेवाला यह बोर्ड किराये के भवन में चल रहा है. किराया पर लाखों रुपये खर्च किये जा रहे है, लेकिन काम नहीं के बराबर हो रहा है.

झारखंड राज्य खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड

वर्ष 2019 से झारखंड राज्य खादी बोर्ड में कोई अध्यक्ष नहीं है. जिस कारण ग्रामीण क्षेत्र में कुटीर उद्योग की स्थापना नहीं हो पा रही है. जो लोग पहले से काम कर रहे थे, उनके समक्ष अब काम नहीं है. अभी बोर्ड का संचालन सीइओ के माध्यम से हो रहा है. लेकिन अध्यक्ष के नहीं होने से कई नीतिगत काम-काज प्रभावित हो रहे हैं.

राज्य वन विकास निगम :

अध्यक्ष का पद खाली

राज्य वन विकास निगम कमाई करनेवाली संस्था है. यहां से केंदू पत्ता व अन्य कारोबार से लाखों लोगों को रोजगार मिलता है. लेकिन, इसके अध्यक्ष का पद भी खाली है. सरकार किसी जनप्रतिनिधि को अध्यक्ष मनोनीत करती है. सभी जिलों में निगम के कार्यालय हैं. इसमें ज्यादातर भाड़े के मकान में चलता है. मुख्यालय में किराये के मकान में चल रहा है.

इन आयोग, बोर्ड-निगमों व प्राधिकार में अध्यक्ष पद हैं खाली

झारखंड राज्य निगरानी पर्षद

राज्यस्तरीय 20 सूत्री कार्यक्रम कार्यान्वयन समिति

झारखंड राज्य विकास परिषद

झारखंड औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकार

झारखंड राज्य खादी ग्रामोद्योग बोर्ड

15 सूत्री कार्यक्रम क्रियान्वयन समिति

झारखंड राज्य आवास बोर्ड

झालको

झारखंड कृषि विपणन परिषद

रांची क्षेत्रीय विकास प्राधिकार

झारखंड पर्यटन विकास निगम

झारखंड राज्य वन विकास निगम

झारखंड राज्य धार्मिक न्यास बोर्ड

मुख्यमंत्री लघु एवं कुटीर उद्यम विकास बोर्ड

झारखंड माटी कला बोर्ड

समाज कल्याण बोर्ड

खनिज क्षेत्र विकास प्राधिकार, धनबाद

राज्य हिंदू धार्मिक न्यास बोर्ड

झारखंड श्वेतांबर जैन न्यास बोर्ड

राज्य प्रावैद्यिक शिक्षा परिषद

झारखंड भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार बोर्ड

सैरात रेमिशन कमेटी

झारखंड राज्य बाल श्रमिक आयोग

झारखंड राज्य अनुसूचित जाति आयोग

झारखंड अनुसूचित जनजाति आयोग

झारखंड राज्य गोसेवा आयोग

राज्य महिला आयोग

युवा आयोग

झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण परिषद

झारखंड शिक्षा न्यायाधिकरण

झारखंड राज्य विद्युत नियामक आयोग

सूचना और महिला आयोग जैसी संवैधानिक संस्थाओं में भी रिक्त हैं पद

अध्यक्ष और सदस्यों के नहीं रहने से कई आयोग हो रहे हैं निष्क्रिय

राज्य वित्त आयोग दफ्तर में ताला लटका

झारखंड राज्य वित्त आयोग के दफ्तर में तीन साल से ताला लटका हुआ है. इसमें न तो अध्यक्ष हैं और न ही कोई कर्मचारी. 73वें संविधान संशोधन के सहारे देश में पंचायती राज व्यवस्था लागू की गयी. पंचायती राज संस्थाओं की वित्तीय स्थिति की समीक्षा करने और उसके आर्थिक स्रोतों को विकसित करने के लिए राज्य वित्त आयोग के गठन का प्रावधान किया गया. इसके आलोक में राज्य में भी वित्त आयोग का गठन किया गया. हालांकि वित्त आयोग कभी पूरी तरह कार्यशील नहीं रहा. धीरे-धीरे वित्त आयोग की स्थिति खराब होती गयी. पिछले तीन साल से आयोग में कोई नहीं है. आयोग के कार्यालय में ताला लटका हुआ है.

विद्युत नियामक आयोग

एक साल से अध्यक्ष नहीं, जेबीवीएनएल समेत नौ कंपनियों का टैरिफ फंसा : झारखंड राज्य विद्युत नियामक आयोग में पिछले एक वर्ष से अध्यक्ष का पद रिक्त है. वहीं फरवरी 2021 के बाद से एक भी सदस्य नहीं है. जिस कारण झारखंड बिजली वितरण निगम समेत नौ कंपनियों का टैरिफ फंसा हुआ है.

राज्य महिला आयोग

एक साल से अध्यक्ष व सदस्य विहीन है : राज्य महिला आयोग में पिछले एक साल से अध्यक्ष और पांच सदस्यों के पद खाली हैं. अध्यक्ष और सदस्यों के नहीं रहने से काम-काज प्रभावित हो रहा है. साल भर से कर्मचारियों को वेतन भी नहीं मिल रहा है. आयोग का हाल ऐसा है कि केवल यहां केस रजिस्टर्ड हो रहे है, केस की कोई सुनवाई नहीं हो रही है.

Posted By : Sameer Oraon

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