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Ranchi News : कोयला कंपनियों का भूमि लगान बढ़ा, अब 50 लाख की जगह देने होंगे ढाई करोड़

Ranchi News : राज्य सरकार ने कोयला कंपनियों के उपयोग में लगी भूमि का लगान बढ़ा दिया है.

रांची. राज्य सरकार ने कोयला कंपनियों के उपयोग में लगी भूमि का लगान बढ़ा दिया है. झारखंड में संचालित कोयला कंपनियों की जिस भूमि का लगान 50 से 60 लाख रुपये तक लग रहा था, उसे अब 2.5 से 7.50 करोड़ रुपये तक देना पड़ेगा. कोयला कंपनियों को लगान अब वाणिज्य कर या इंडस्ट्रियल रेट पर देना होगा. इसमें से जो ज्यादा होगा, वही राशि कोयला कंपनियों को देनी होगी. कोयला कंपनियों ने राज्य सरकार से आग्रह किया है कि इस पर पुनर्विचार किया जाये.

कई परियोजनाओं को चालू करना मुश्किल हो जायेगा

कंपनियों ने कहा है कि ऐसा नहीं किये जाने से कोयला कंपनियों के लिए कई परियोजनाओं को चालू करना मुश्किल हो जायेगा.यह भौतिक रूप से कोयला कंपनियों के लिए फायदेमंद नहीं होगा. इस पर राज्य सरकार ने विचार करने और कमेटी बनाकर दूसरे राज्यों में लग रहे लगान का आकलन करने का आश्वासन दिया है. दरअसल राज्य सरकार ने 2023 में एक संशोधन किया था. इसमें खनन गतिविधियों को औद्योगिक घोषित कर दिया गया था. इसके उपयोग के लिए ली गयी जमीन पर लगनेवाले लगान की दर को संशोधित करने का आदेश कोयला कंपनियों को दिया गया है. इसके आलोक में कोयला कंपनियों ने लगान का आकलन कराया है. इसमें कहा गया है कि नये नियम के अनुसार, पुराने लगान से करीब चार गुना अधिक राशि का भुगतान करना होगा. इसमें और कुछ फैक्टर भी जोड़ा गया है. कोयला मंत्री और सचिव ने भी राज्य सरकार से आग्रह किया है कि झारखंड की कोयला कंपनियां लगाये जाने वाले लगान का फिर से अध्ययन करें.

छत्तीसगढ़ में आठ से 70 लाख रुपये तक है लगान

छत्तीसगढ़ में भूमि का लगान आठ से 70 लाख रुपये प्रति एकड़ लग रहा है. दूसरे राज्यों में भी कोयला खदान के लिए ली जानेवाली जमीन की लगान दर इसी के आसपास है. अभी कोयला कंपनियों के खनन के लिए ली गयी प्रति एकड़ जमीन के लिए लिये जानेवाले कृषि लगान से करीब डेढ़ गुना ज्यादा राशि ली जाती है.

झारखंड में तीन कंपनियां करती हैं खनन का काम

झारखंड में कोल इंडिया की तीन कंपनियां खनन का काम करती हैं. इसमें सीसीएल, बीसीसीएल और इसीएल (कुछ हिस्सा) हैं. राज्य सरकार का मानना है कि झारखंड में करीब 95772 हेक्टेयर के आसपास जमीन का अधिग्रहण कोयला कंपनियों ने किया है. इसमें अलग-अलग तरह की भूमि है.

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Prabhat Khabar News Desk
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